छत्तीसगढ़ में इलाज के दौरान लापरवाही के 4 अलग-अलग मामले सामने आए हैं, जिनमें 4 लोगों की मौत हुई है। मृतकों में 2 महिला और 2 बच्चे शामिल हैं। कोंडागांव जिले में एक लैब टेक्नीशियन ने 32 वर्षीय महिला को इंजेक्शन लगाया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई।
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बलरामपुर जिले में कथित झोलाछाप डॉक्टर के इलाज के बाद 3 साल के बच्चे ने दम तोड़ दिया, जबकि मनेंद्रगढ़ के एक निजी हॉस्पिटल में ऑपरेशन के बाद 35 वर्षीय महिला ने दम तोड़ दिया।
वहीं, सुकमा जिले के कोंटा अस्पताल में 5वीं की छात्रा को मलेरिया बताकर जिला अस्पताल किया रेफर किया गया, जहां बच्चे ने रास्ते में दम तोड़ दिया। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की। सभी मामलों में परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषी पर कार्रवाई की मांग की है।


कोंडागांव में लैब टेक्नीशियन के इंजेक्शन लगाने के बाद एक महिला की मौत हो गई।
केस 1: कोंडागांव में इंजेक्शन के बाद महिला की मौत
कोंडागांव जिले के विश्रामपुरी में ग्राम पिटेचुआ कोटवारपारा की रहने वाली मिथिला नेताम (35) सर्दी-खांसी से परेशान थी। पति सुनील कुमार नेताम 18 अगस्त की सुबह उसे ब्लड टेस्ट कराने के लिए लैब टेक्नीशियन सहदेव वर्मा के घर ले गए थे। आरोप है कि ब्लड सैंपल लेने के बाद सहदेव वर्मा ने मिथिला के हाथ में इंजेक्शन लगाया।
इंजेक्शन लगने के बाद बिगड़ी तबीयत, मौत
परिजनों का कहना है कि इंजेक्शन लगने के कुछ ही देर बाद मिथिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह बेहोश हो गई। हालत गंभीर होने पर परिजन उसे तुरंत विश्रामपुरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
विश्रामपुरी के बीएमओ डॉ. अनुराग भारती ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने सहदेव वर्मा से जवाब मांगा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।



बलरामपुर में कथित झोलाछाप डॉक्टर के इलाज के बाद 3 साल के बच्चे की मौत हो गई।
केस 2: बलरामपुर में 3 साल के बच्चे की मौत
बलरामपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र में कथित झोलाछाप डॉक्टर के इलाज के बाद 3 साल के बच्चे की मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। ग्राम जमुआटांड़ का रहने वाला अभीस चेरवा (3 साल) बुखार से पीड़ित था।
परिजनों के अनुसार, अभीस को बुखार आने पर वे उसे सरनाडीह गांव में भूलेश्वर सिंह के पास इलाज के लिए ले गए थे। आरोप है कि इलाज के दौरान बच्चे को इंजेक्शन लगाया गया। इसके बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई।
हालत गंभीर होने पर परिजन बच्चे को घर ले जाने लगे, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। बच्चे की अचानक मौत से परिवार में मातम छा गया। घटना की सूचना मिलने के बाद कोतवाली पुलिस ने मर्ग कायम किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट होगी। इसके बाद ही इलाज में लापरवाही या किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय की जा सकेगी।

मनेंद्रगढ़ में ऑपरेशन के बाद महिला की मौत हो गई, परिजनों ने हंगामा किया।
केस 3: मनेंद्रगढ़ में ऑपरेशन के बाद महिला की मौत
मनेन्द्रगढ़ के मेट्रो हॉस्पिटल में ऑपरेशन के बाद नीतू सिंह (35) की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज और ऑपरेशन में लापरवाही का आरोप लगाते हुए सिटी कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई है।
गर्भाशय के ऑपरेशन के बाद बिगड़ी तबीयत, मौत
सिरौली निवासी नीतू सिंह को पेट दर्द की शिकायत के बाद मेट्रो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने जांच के बाद गर्भाशय का ऑपरेशन करने की सलाह दी। परिजनों के अनुसार, ऑपरेशन के बाद नीतू को होश नहीं आया और उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई।
हालत गंभीर होने पर अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें सूरजपुर के एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया। वहां इलाज के दौरान नीतू सिंह की मौत हो गई।
शिकायत के बाद OPD बंद
मनेन्द्रगढ़ के 220 बिस्तरीय शासकीय अस्पताल के अधीक्षक डॉ. स्वप्निल तिवारी ने बताया कि मेट्रो हॉस्पिटल से महिला के इलाज और ऑपरेशन से जुड़े दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं। जिला प्रशासन के निर्देश पर फिलहाल मेट्रो हॉस्पिटल की ओपीडी बंद कर दी गई है।

सुकमा में 5वीं की छात्रा की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा किया, कार्रवाई की मांग की।
केस 4: सुकमा में 5वीं की छात्रा की इलाज के दौरान मौत
सुकमा के कोंटा ब्लॉक में पांचवीं कक्षा की छात्रा कृष्णवेणी बारसे की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक, 17 अगस्त को बुखार के बाद उसे कोंटा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां मलेरिया बताया गया।
अगले दिन सुकमा जिला अस्पताल रेफर करने के दौरान रास्ते में उसकी मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि छात्रा को मलेरिया काफी समय से था और उसे देर से अस्पताल लाया गया। मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
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