रायपुर12 मिनट पहले
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छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूलों में शिक्षकों की ऑनलाइन अटेंडेंस के लिए नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत अब शिक्षकों को वीएसके ऐप के जरिए स्कूल पहुंचते ही पंच-इन और छुट्टी के समय पंच-आउट करना होगा।
शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि इसी डिजिटल अटेंडेंस के आधार पर वेतन का भुगतान होगा। यानी जिस दिन शिक्षक की अटेंडेंस ऐप में दर्ज नहीं होगी या समय पर पंच-इन-पंच-आउट नहीं हो पाएगा, उस दिन के वेतन पर असर पड़ सकता है।
लेकिन ये व्यवस्था अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। प्रदेश के शिक्षकों ने नई व्यवस्था का विरोध किया है। शिक्षकों के ग्रुप का एक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें शिक्षक खुद नौका चलाकर उफनती नदी पार कर रहे हैं।
इसी दौरान शिक्षक नई व्यवस्था पर भी सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में वीएसके ऐप के जरिए व्यवस्था कैसे संभलेगी। शिक्षकों का आरोप है कि ऐप में न तो लोकेशन सही दिखती है और न ही टाइमिंग ठीक दर्ज होती है।
वहीं, प्रदेश के कई स्कूलों में नेटवर्क की समस्या के कारण उपस्थिति दर्ज करने में भी दिक्कत आ रही है। ऐसे में शिक्षक संगठनों ने भी मामले पर आवाज उठाते हुए 7 अगस्त को आंदोलन की चेतावनी दी है।

वीडियो कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा ब्लॉक का है।
ऐप की तकनीकी खामियों पर सवाल
शिक्षक संगठनों का कहना है कि ऐप की तकनीकी खामियों के कारण शिक्षकों की उपस्थिति सही तरीके से दर्ज नहीं हो पा रही है। ऐसे में केवल ऐप के रिकॉर्ड के आधार पर वेतन रोकना या कटौती करना उचित नहीं होगा।
संगठन बोला- सिस्टम की गलती पर शिक्षकों को सजा गलत
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा और छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे का कहना है कि शिक्षक रोज स्कूल पहुंचकर पढ़ाई करा रहे हैं, लेकिन ऐप की तकनीकी दिक्कतों के कारण उनकी पूरी अटेंडेंस रिकॉर्ड नहीं हो रही। ऐसे में गलती सिस्टम की है, शिक्षक की नहीं।


इस आदेश को लेकर ही पूरा विरोध है।
GPS लोकेशन तक सही ट्रैक नहीं कर पा रहा ऐप
शिक्षक संगठनों के मुताबिक ऐप में जीपीएस लोकेशन सही से कैप्चर नहीं हो रही। कई जगह स्कूल और ऐप की लोकेशन अलग दिख रही है। इसके अलावा कमजोर नेटवर्क, सर्वर की समस्या, लॉगिन में परेशानी, ऐप का हैंग होना आम है।
इसके अलावा समय पर चेक-इन व चेक-आउट दर्ज नहीं होना जैसी दिक्कतें लगातार सामने आ रही हैं। दो पाली वाले स्कूलों में भी यही स्थिति बनी हुई है।

शिक्षकों ने भास्कर के साथ ये स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए कहा कि 4 बजे का वक्त चेक आउट का होता है, लेकिन चेक इन शो हो रहा है।
83% अटेंडेंस का दावा, लेकिन पूरा रिकॉर्ड कौन देगा?
शिक्षा विभाग का दावा है कि करीब 83 प्रतिशत शिक्षक वीएसके ऐप के जरिए अटेंडेंस दर्ज कर रहे हैं। हालांकि शिक्षक संगठनों का कहना है कि ऐप में उपस्थिति दर्ज होना और पूरे महीने की नियमित अटेंडेंस रिकॉर्ड होना अलग-अलग बातें हैं।
उनका सवाल है कि क्या विभाग यह प्रमाणित कर सकता है कि जुलाई महीने में 83 प्रतिशत शिक्षकों की हर दिन सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक की पूरी उपस्थिति ऐप में बिना किसी तकनीकी बाधा के दर्ज हुई है?
स्कूल की अटेंडेंस रजिस्टर को भी मिले मान्यता
दोनों संगठनों का कहना है कि जब तक वीएसके ऐप पूरी तरह ठीक से काम नहीं करने लगता, तब तक स्कूलों में प्राचार्य और प्रधान पाठक की ओर से रखे जाने वाले उपस्थिति रजिस्टर को भी उपस्थिति का मान्य रिकॉर्ड माना जाए।
अगर शिक्षक स्कूल में मौजूद रहा है और उसने उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर किए हैं, तो केवल ऐप में रिकॉर्ड नहीं बनने की वजह से उसका वेतन नहीं रोका जाना चाहिए।

बायोमेट्रिक सिस्टम लागू करने की भी मांग
संगठनों का कहना है कि यदि शिक्षा विभाग पूरी तरह डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम लागू करना चाहता है तो सभी स्कूलों में बायोमेट्रिक मशीन उपलब्ध कराई जानी चाहिए। केवल मोबाइल ऐप के भरोसे उपस्थिति दर्ज करना दूरस्थ और कमजोर नेटवर्क वाले इलाकों में व्यवहारिक नहीं है।
आंदोलन की चेतावनी
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि ऐप के आधार पर वेतन कटौती की गई तो 7 अगस्त को प्रदेशभर में डीडीओ कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। वहीं छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ ने भी कहा है कि यदि शिक्षकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई हुई तो संगठन सीएम हाउस घेराव समेत बड़े आंदोलन की रणनीति अपनाएगा।
अब फैसला शिक्षा विभाग के पाले में
दोनों शिक्षक संगठनों की मांग साफ है कि वीएसके ऐप की तकनीकी खामियां दूर होने तक केवल ऐप को वेतन का आधार न बनाया जाए। साथ ही स्कूलों में संधारित मैनुअल अटेंडेंस रजिस्टर को भी मान्य रिकॉर्ड माना जाए, ताकि तकनीकी कारणों का खामियाजा शिक्षकों को न भुगतना पड़े।
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