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Global Doctor Shortage Crisis | India Facing Retirement Challenge


नई दिल्ली41 मिनट पहले

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डब्ल्यूएचओ की नई रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में करीब 25% डॉक्टर 55 वर्ष से अधिक उम्र के हैं।

रिपोर्ट में स्वास्थ्यकर्मियों की बढ़ती संख्या के बावजूद देशों के बीच भारी असमानता और कार्यबल के बूढ़े होने को बड़ी चुनौती बताया गया है।

भारत वाले समूह में भी 65 वर्ष से अधिक उम्र की आबादी 2024 से 2030 के बीच 26% बढ़ने का अनुमान। स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरतें बढ़ेंगी।

रिपोर्ट की 4 बड़ी बातें…

अच्छी बात

20 साल में 52% बढ़े स्वास्थ्यकर्मी

2006 में प्रति 10 हजार पर 44.8 हेल्थ कर्मी थे, 2025 में 67.9 हुई।

चुनौती

2030 तक 1.11 करोड़ स्वास्थ्यकर्मियों की कमी का अनुमान।

67 देशों में डॉक्टर और नर्स की कमी होगी।

डॉक्टरों की कमी का आम आदमी पर असर

सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के चलते लोगों को मजबूरी में प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। वहां की भारी-भरकम फीस आम आदमी की जेब पर सीधा और बड़ा आर्थिक बोझ डालती है।

अस्पतालों में भारी भीड़ की वजह से मरीजों को इलाज के लिए घंटों या कई दिनों तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। डॉक्टरों पर काम का दबाव इतना ज्यादा होता है कि वे हर मरीज को पर्याप्त समय और जरूरी देखभाल नहीं दे पाते।

गांवों और देहाती इलाकों में स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं। इस वजह से ग्रामीण आबादी को मामूली और बुनियादी इलाज के लिए भी मीलों दूर शहरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

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