भारत-तिब्बत (चीन) सीमा पर स्थित ऐतिहासिक शिपकिला दर्रे (Shipki La) से होने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े व्यापारियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। सीमांत व्यापारियों की गंभीर समस्याओं को लेकर सरकार के साथ हुई एक उच्चस्तरीय वीडियो कॉन्फ्रें
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सरकार ने आश्वासन दिया है कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री स्वयं 7 सितंबर को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री के समक्ष इन मुद्दों को व्यक्तिगत रूप से उठाएंगे।
आईजीएसटी (IGST) के बोझ से दम तोड़ रहा है पारंपरिक व्यापार
किन्नौर इंडो-चाइना ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष हिशे नेगी ने बताया कि इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य एजेंडा पारंपरिक बार्टर व्यापार (वस्तु-विनिमय यानी सामान के बदले सामान) पर लगाए जा रहे इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (IGST) का था।
एसोसिएशन का तर्क है कि सदियों पुराने इस पारंपरिक सीमा व्यापार पर अतिरिक्त टैक्स का बोझ डालना इसे आर्थिक रूप से पूरी तरह नुकसानदेह बना रहा है। इस भारी टैक्स के कारण स्थानीय जनजातीय व्यापारियों की आजीविका पर गहरा संकट मंडरा रहा है।

मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार का आश्वासन और भूख हड़ताल स्थगित
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभाग सिंह ने व्यापारियों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने घोषणा की कि मुख्यमंत्री खुद इस मामले को केंद्र सरकार के सर्वोच्च स्तर पर सुलझाएंगे।
सरकार के इस सकारात्मक और ठोस आश्वासन के बाद, किन्नौर इंडो-चाइना ट्रेड एसोसिएशन ने 15 अगस्त से प्रस्तावित अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को फिलहाल 7 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया है। एसोसिएशन ने साफ किया है कि दिल्ली में होने वाली बैठक के नतीजों के आधार पर ही अगली रणनीति तय होगी।

व्यापारियों की प्रमुख मांगें
बैठक के दौरान एसोसिएशन ने केंद्र और राज्य सरकार के समक्ष निम्नलिखित महत्वपूर्ण मांगें रखीं कि पारंपरिक बार्टर व्यापार को अतिरिक्त टैक्स के दायरे से बाहर रखा जाए। निर्धारित सीमा व्यापार केंद्रों के बीच व्यापारियों और सामान की सुरक्षित आवाजाही के लिए बेहतर मोटर योग्य (पक्की) सड़क का निर्माण किया जाए।
सीमा पार से आने वाले सामान और सुरक्षा मानकों के लिए सीमा पर ही एक समर्पित क्वारंटीन सेंटर की स्थापना हो। वर्तमान समय की आवश्यकताओं और जमीनी परिस्थितियों को देखते हुए ट्रेड इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट (आयात-निर्यात) की सूची का पुनरीक्षण और युक्तिसंगत संशोधन किया जाए।
