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आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड तैयार करने के मामले में कॉलेज देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। वहीं, मध्यप्रदेश में यह पहले स्थान पर है।
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कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में प्रदेश के सबसे अधिक मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज किए जा रहे हैं। कॉलेज से जुड़े एमवाय अस्पताल, चाचा नेहरू अस्पताल, सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल, एमटीएच अस्पताल और कैंसर अस्पताल सहित अन्य संस्थानों में रोजाना करीब 10 हजार मरीजों का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है।
डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ ने मरीजों के डिजिटल रजिस्ट्रेशन को प्राथमिकता दी है। इसके चलते रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी आई है। दो माह पहले स्वास्थ्य आयुक्त धनराजू एस ने भी इस संबंध में दौरा कियाा थाा।
एक जगह सुरक्षित होगी मरीज की पूरी हेल्थ हिस्ट्री
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य देश में एक मजबूत डिजिटल हेल्थ सिस्टम तैयार करना है। इसके तहत मरीज के मेडिकल रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जा रही है। इसमें मरीज की बीमारी, डॉक्टर की सलाह, इलाज, दवाइयों और जांच से जुड़ी जानकारी दर्ज की जा सकती है।
अभी मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में इलाज के दौरान पुराने पर्चे, जांच रिपोर्ट और दवाइयों का रिकॉर्ड संभालकर रखना पड़ता है। डिजिटल रिकॉर्ड बनने के बाद इन दस्तावेजों पर निर्भरता कम होगी।
देश के किसी भी अस्पताल में मिल सकेगा पुराना रिकॉर्ड
इसके तहत मरीज का आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट आईडी (ABHA) बनाया जाता है। इसके माध्यम से मरीज का स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रखा जा सकता है। मरीज देश के किसी अन्य पंजीकृत अस्पताल में इलाज कराने जाता है तो आईडी के माध्यम से उसका उपलब्ध डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड देखा जा सकेगा।
डॉक्टर-नर्सों ने रजिस्ट्रेशन को बनाया प्राथमिकता
डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीज रोजाना इलाज के लिए पहुंचते हैं। इन मरीजों का डिजिटल रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करने के लिए डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को प्रक्रिया से जोड़ा गया है। रोजाना करीब 10 हजार मरीजों का रजिस्ट्रेशन होने से एमजीएम डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड व्यवस्था देश के अग्रणी संस्थानों में शामिल हुआ है।
