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Iran Statement on US Midterm Election


तेहरान/वॉशिंगटन डीसी4 घंटे पहले

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ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी वोटरों के नाम 25 पेज की खुली चिट्ठी जारी की है। इसमें राष्ट्रपति ट्रम्प को भरोसे के लायक नहीं बताया गया है और अमेरिकी लोगों से सोच-समझकर फैसला लेने की अपील की गई है।

IRGC की यह चिट्ठी अमेरिका में होने वाले मिडटर्म चुनाव से करीब 5 हफ्ते पहले आई है। मिडटर्म चुनाव में अमेरिकी संसद के दोनों सदनों के लिए वोटिंग होती है।

मिडटर्म चुनाव में हार से संसद में ट्रम्प की ताकत कम हो सकती है। उन्हें अपने फैसले पास कराने के लिए विपक्षी पार्टी का समर्थन लेना पड़ सकता है।

IRGC के प्रवक्ता जनरल होसैन मोहेब्बी ने मंगलवार को तेहरान में प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

IRGC के प्रवक्ता जनरल होसैन मोहेब्बी ने मंगलवार को तेहरान में प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

IRGC की चिट्ठी में 3 बड़ी बातें

अमेरिका युद्ध में अपना मकसद हासिल नहीं कर पाया

IRGC का दावा है कि इस युद्ध में अमेरिका-इजराइल के सत्ता परिवर्तन, परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम खत्म करने जैसे लक्ष्य पूरे नहीं हुए।

‘डेथ टू अमेरिका’ अमेरिकी जनता के खिलाफ नहीं

पत्र में कहा गया कि डेथ टू अमेरिका का नारा अमेरिकी शासक वर्ग और व्हाइट हाउस के खिलाफ है, आम अमेरिकियों के खिलाफ नहीं है।

अमेरिका से सैन्य दखल कम करने की मांग

IRGC ने अमेरिकी जनता से इजराइल को समर्थन और क्षेत्र में सैन्य हस्तक्षेप का विरोध करने की अपील की है।

ट्रम्प ने UN में ईरान को खत्म करने की धमकी दी थी

अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर ट्रम्प ने पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि अगर वह चाहें तो ईरान को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं।

अमेरिका का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना युद्ध के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।

UNGA में ट्रम्प की कड़ी ईरान चेतावनी के बाद ईरानी प्रतिनिधियों ने विरोध जताते हुए वॉकआउट किया था।

UNGA में ट्रम्प की कड़ी ईरान चेतावनी के बाद ईरानी प्रतिनिधियों ने विरोध जताते हुए वॉकआउट किया था।

होर्मुज को लेकर भी अमेरिका पर निशाना साधा

IRGC ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिकी दावों पर भी सवाल उठाए। मोहेब्बी ने कहा कि अमेरिकी सेना ने कुछ तेल टैंकरों को ही इस रास्ते से निकालने में सफलता पाई है।

उनके मुताबिक, इससे यह साबित नहीं होता कि होर्मुज पूरी तरह खुल गया है। बीते दिनों ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट को ट्रम्प स्ट्रेट बताया था। उन्होंने इससे जड़ा एक मैप ट्रुथ सोशल पर शेयर किया था।

संसद में ट्रम्प के लिए बहुमत बचाना जरूरी है

अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने हैं। ये चुनाव राष्ट्रपति चुनाव के बीच में होते हैं। इनमें अमेरिकी लोग संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों – हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट के लिए प्रतिनिधि चुनते हैं।

इन चुनावों से यह तय होता है कि अगले दो साल में अमेरिकी संसद में किस पार्टी की ताकत कितनी रहेगी। सीनेट में 100 सदस्य होते हैं। इस बार 35 सीटों पर चुनाव होने हैं।

वहीं हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 435 सीटों पर चुनाव होने हैं। अभी रिपब्लिकन पार्टी के पास सीनेट में 53 सीटें हैं। जबकि हाउस में 218 सीटें हैं।

अगर ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी ये चुनाव हार जाती है तो संसद में ट्रम्प के लिए बिल पास कराना बहुत मुश्किल हो जाएगा। वह अपनी मर्जी से किसी बिल को सीधे कानून नहीं बना पाएंगे।

यही वजह है कि ट्रम्प मिडटर्म चुनाव के नतीजे का इंतजार कर रहे हैं, ताकि कांग्रेस में उनकी पार्टी के बहुमत पर असर न पड़े।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प संसद में स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण देते हुए। यह तस्वीर 24 फरवरी 2026 की है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प संसद में स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण देते हुए। यह तस्वीर 24 फरवरी 2026 की है।

हैनोई हन्ना की तरह अमेरिकी जनता तक पहुंचने की कोशिश

ईरान का अमेरिकी लोगों तक सीधे पहुंचने का तरीका नया नहीं है। वियतनाम युद्ध के दौरान त्रिन्ह थी न्गो नाम की वियतनामी रेडियो प्रसारक अंग्रेजी में अमेरिकी सैनिकों के लिए कार्यक्रम करती थीं। उन्हें हैनोई हन्ना कहा जाता था।

वह अपने कार्यक्रमों में युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों और अमेरिका में हो रहे युद्ध-विरोधी प्रदर्शनों का जिक्र करती थीं।

अब ईरान भी कुछ इसी तरह सीधे अमेरिकी जनता तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।

ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची

अमेरिका से जारी युद्ध के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है। मंगलवार को ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान में एक डॉलर की कीमत 25 लाख रियाल से ज्यादा हो गई।

यानी एक तरफ ईरान अमेरिकी लोगों से ट्रम्प सरकार की युद्ध नीति का विरोध करने की अपील कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ युद्ध का असर उसकी अपनी अर्थव्यवस्था पर भी दिख रहा है।

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