कांगड़ा के ढगवार में निर्माणाधीन मिल्क प्लांट का जायजा लेते कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार।
कांगड़ा के ढगवार में बन रहे अत्याधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र (मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट) हिमाचल प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने उपायुक्
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मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना के निर्माण में पहले ही हुई देरी को देखते हुए, नवंबर 2026 तक इसके सिविल, बिजली और पानी से जुड़े सभी बुनियादी कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।

कांगड़ा के ढगवार में निर्माणाधीन मिल्क प्लांट का जायजा लेते कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार।
निरंतर जल आपूर्ति के लिए ली जाए विशेषज्ञों की मदद : चंद्र कुमार
बैठक के दौरान प्लांट में पानी की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा हुई। मंत्री ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में सतही जल स्रोत सीमित हैं और स्थानीय खड्डों-नालों में साल भर पर्याप्त पानी नहीं रहता।
प्लांट को निरंतर पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय भूजल बोर्ड के विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। भूजल उपलब्धता का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराकर आवश्यकतानुसार एक से अधिक ट्यूबवेल स्थापित किए जाएंगे।

कांगड़ा के ढगवार में निर्माणाधीन मिल्क प्लांट को लेकर अधिकारियों संग मीटिंग करते कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार।
मिल्क प्लांट के शुरू होने से 35 हजार पशुपालकों को मिलेगा लाभ
प्रो. चंद्र कुमार ने बताया कि इस अत्याधुनिक संयंत्र के शुरू होने से कांगड़ा, चंबा, हमीरपुर, मंडी और ऊना जिलों के 35 हजार से अधिक पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों को सीधा लाभ मिलेगा।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में दूध का उचित मूल्य प्राप्त होगा, साथ ही परिवहन, आपूर्ति श्रृंखला और रख-रखाव जैसे क्षेत्रों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे। इस पूरे प्रोजेक्ट का वित्तपोषण राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा है।
बैठक में उपस्थित मिल्क फेडरेशन के अध्यक्ष बुद्धि सिंह ठाकुर ने जानकारी दी कि दत्तनगर दुग्ध संयंत्र के सफल संचालन के अनुभव को देखते हुए, प्रदेश सरकार ने नालागढ़, नाहन और झलेड़ा (ऊना) में नए प्लांट भी राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के माध्यम से बनवाने का निर्णय लिया है। ढगवार प्लांट के लिए बड़ी संख्या में दुग्ध सहकारी समितियां पहले ही पंजीकृत की जा चुकी हैं।
