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सावन शुरू होने से पहले कबीरधाम के प्रसिद्ध भोरमदेव महादेव मंदिर में आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। पांच दिवसीय महाचतुर शुद्धि सहस्र कलशम्- 2026 के चौथे दिन मंगलवार को बाबा भोरमदेव का 1000 कलशों के पवित्र जल से सहस्र अभिषेक किया गया।
इस दुर्लभ अनुष्ठान को केरल से आए विद्वान आचार्यों ने शैव आगम परंपरा के अनुसार संपन्न कराया। पूरे दिन मंदिर परिसर वैदिक मंत्रों और हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजता रहा। अनुष्ठान में तांबे और पीतल के 1000 कलशों में गंगाजल, पंचगव्य, औषधियां, आम के पत्ते और श्रीफल स्थापित कर विशेष पूजा की गई। इसके बाद भगवान भोरमदेव का अभिषेक किया गया। आचार्यों ने बताया कि यह अनुष्ठान मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने और क्षेत्र में सुख-शांति की कामना के लिए किया जाता है।
शाम होते ही भगवान भोरमदेव का प्रांगण अद्भुत सांस्कृतिक व आध्यात्मिक छटा से सराबोर हो उठा। केरल से आए कलाकारों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों नादस्वरम, चेंडा और मृदंगम की मंगलध्वनि से माहौल को भक्तिमय बना दिया। भगवान शिव (नटराज) के समक्ष शास्त्रीय नृत्य और वाद्य अर्चना प्रस्तुत की गई।
सीएम विष्णुदेव साय ने पत्नी के साथ की पूजा चौथे दिन महा अनुष्ठान में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपनी पत्नी कौशिल्या साय के साथ शामिल हुए। उन्होंने बाबा भोरमदेव की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान उन्होंने कहा कि सावन में भोरमदेव धाम पहुंचने वाले कांवड़ यात्रियों का इस बार भी पुष्प वर्षा से स्वागत करेंगे। इस दौरान पंडरिया विधायक भावना बोहरा, जिपं उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि व अधिकारी शामिल रहे।
महा अनुष्ठान की अंतिम पूर्णाहुति 29 जुलाई को 5 दिवसीय इस महा अनुष्ठान की अंतिम पूर्णाहुति 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर होगी। समापन दिवस पर प्रभात में उषा पूजा, प्रातः सहस्र कलशाभिषेक, दोपहर में शिवलिंग निमज्जनम् और सायंकाल भव्य श्रीचक्र पूजा होगी। आयोजन समिति ने कबीरधाम और प्रदेश भर के श्रद्धालुओं से गुरु पूर्णिमा पर भोरमदेव धाम पहुंचकर इस दुर्लभ और अलौकिक अनुष्ठान का पुण्य लाभ लेने की अपील की है।
