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Latehar News | Ambulance Stuck, Villagers Carry Corpse On Stretcher


जिस सड़क से बीमार को अस्पताल और एंबुलेंस को गांव तक पहुंचना चाहिए, उसी सड़क ने एक मृत महिला की अंतिम यात्रा भी रोक दी। चंदवा के किता अंबाटांड़ गांव में सड़क और पुल की बदहाली के कारण एंबुलेंस शव लेकर आगे नहीं जा सकी।

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इसके बाद ग्रामीणों ने पार्वती देवी के शव को खटिया पर रखा और करीब दो किलोमीटर तक पैदल चलकर नदी पार कराते हुए घर पहुंचाया। एंबुलेंस के फंसने के बाद परिजन और ग्रामीण मजबूर होकर शव को खटिया पर उठाए आगे बढ़े।

एंबुलेंस के फंसने के बाद परिजन और ग्रामीण मजबूर होकर शव को खटिया पर उठाए आगे बढ़े।

एंबुलेंस के फंसने के बाद परिजन और ग्रामीण मजबूर होकर शव को खटिया पर उठाए आगे बढ़े।

इस दौरान परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। घटना ने एक बार फिर गांव की वर्षों पुरानी सड़क और पुल की समस्या को सामने ला दिया है।

मालगाड़ी की चपेट में आई थीं पार्वती

पार्वती देवी किता अंबाटांड़ निवासी विरु तुरी की पत्नी थीं। रविवार को चंदवा रेलवे क्रॉसिंग के पास मालगाड़ी की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। इसके बाद एंबुलेंस शव लेकर गांव के लिए रवाना हुई, लेकिन गांव तक पहुंचने वाली जर्जर सड़क और पुल की खराब हालत ने रास्ता रोक दिया।

एंबुलेंस आगे नहीं बढ़ सकी और रास्ते में ही फंस गई। इसके बाद ग्रामीणों ने शव को खटिया पर रखा। नदी के रास्ते को पार कराते हुए ग्रामीण करीब दो किलोमीटर पैदल चले और शव को घर तक पहुंचाया। अंतिम यात्रा के दौरान परिजनों और ग्रामीणों की आंखों में आंसू थे, लेकिन इसके साथ वर्षों से चली आ रही सड़क की समस्या को लेकर आक्रोश भी नजर आया।

अंतिम यात्रा के दौरान परिजनों और ग्रामीणों की आंखों में आंसू थे, लेकिन इसके साथ वर्षों से चली आ रही सड़क की समस्या को लेकर आक्रोश भी नजर आया।

अंतिम यात्रा के दौरान परिजनों और ग्रामीणों की आंखों में आंसू थे, लेकिन इसके साथ वर्षों से चली आ रही सड़क की समस्या को लेकर आक्रोश भी नजर आया।

दो बार बना पुल भी बारिश में बहा

गांव की मुखिया अनिता देवी के अनुसार किता अंबाटांड़ में आजादी के बाद से अब तक सड़क का निर्माण नहीं हुआ है। पंचायत के चार गांव किता अंबाटांड़, निंद्रा, एरूध और कुरामू तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को दो नदियां पार करनी पड़ती हैं। एक नदी पर दो बार पुल बनाया गया, लेकिन दोनों बार बारिश में पुल बह गया।

दूसरी नदी पर अब तक कोई स्थायी पुल नहीं बन सका है। करीब तीन हजार आदिवासी और परहिया समुदाय के लोगों की आबादी वाले इस इलाके में सड़क और पुल का अभाव रोजमर्रा की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है।

बारिश के दिनों में बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है। मरीजों और खासकर गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में भी ग्रामीणों को काफी परेशानी होती है। कई बार मरीजों को खटिया या दूसरे साधनों पर रखकर नदी पार कर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है।

मुखिया अनिता देवी ने बताया कि सड़क और पुल की समस्या को लेकर सांसद कालीचरण सिंह और स्थानीय विधायक प्रकाश राम को ज्ञापन दिया गया है।

मुखिया अनिता देवी ने बताया कि सड़क और पुल की समस्या को लेकर सांसद कालीचरण सिंह और स्थानीय विधायक प्रकाश राम को ज्ञापन दिया गया है।

सांसद-विधायक को ज्ञापन, नहीं मिला समाधान

मुखिया अनिता देवी ने बताया कि सड़क और पुल की समस्या को लेकर सांसद कालीचरण सिंह और स्थानीय विधायक प्रकाश राम को ज्ञापन दिया गया है। पूर्व उपायुक्त भोर सिंह को भी ग्रामीणों की परेशानी से अवगत कराया गया था, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में उन्हें हर दिन जोखिम उठाकर आवागमन करना पड़ता है।



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