- Hindi News
- Lifestyle
- Mobile Tower Installation Fraud; Fake Documents Agreement | Cyber Scam Prevention
1 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
- कॉपी लिंक

फर्ज करिए, आपके पास खेत, खाली प्लॉट या मकान की बड़ी छत है। एक दिन अचानक कॉल या मैसेज आता है कि आप वहां मोबाइल टावर लगवाकर हर महीने 30-50 हजार रुपए किराया कमा सकते हैं। कई लोग बिना कोई जांच-पड़ताल किए इस आकर्षक ऑफर पर भरोसा कर लेते हैं।
इसी भरोसे का फायदा उठाकर जालसाज ठगी को अंजाम दे रहे हैं। वे खुद को किसी टेलीकॉम कंपनी या सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर मोटे किराये, एडवांस पेमेंट और नौकरी का लालच देते हैं। इसके बाद रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग फीस, एनओसी या सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर पैसे ऐंठते हैं।
कई मामलों में आधार, पैन और जमीन के डॉक्यूमेंट्स लेकर पहचान और आइडेंटिटी से जुड़ी धोखाधड़ी भी करते हैं। हाल ही में प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने भी इसे लेकर अलर्ट जारी किया है।
इसलिए ‘साइबर लिटरेसी’ कॉलम में आज हम टावर लगाने के नाम पर होने वाले इस स्कैम के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- ठग लोगों को किस तरह अपने जाल में फंसाते हैं?
- मोबाइल टावर के नाम पर होने वाले स्कैम से कैसे बचें?
एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस
सवाल- मोबाइल टावर लगाने के नाम पर फ्रॉड कैसे हो रहा है?
जवाब- ठग पहले लोगों का भरोसा जीतते हैं। फिर फर्जी दस्तावेज और बड़े किराये का लालच देकर लोगों को फंसाते हैं। इसके बाद अलग-अलग बहानों से पैसे और जरूरी दस्तावेज मांगते हैं। पूरा स्कैम ग्राफिक में देखिए-

सवाल- ठग लोगों को किस तरह अपने जाल में फंसाते हैं?
जवाब- पॉइंटर्स से समझिए-
- हर महीने 30-50 हजार रुपए किराए मिलने का दावा करते हैं।
- 15 साल या उससे ज्यादा समय का एग्रीमेंट होने की बात कहते हैं।
- एडवांस किराया देने का लालच देते हैं।
- परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का वादा करते हैं।
- बिजली का पूरा बिल कंपनी द्वारा भरने का दावा करते हैं।
- हर साल किराया बढ़ाने का वादा करते हैं।
- फर्जी एग्रीमेंट और कंपनी के लेटरहेड भेजकर भरोसा जीतते हैं।
सवाल- जालसाज किन लोगों को ज्यादा निशाना बनाते हैं?
जवाब- ठग आमतौर पर ऐसे लोगों को निशाना बनाते हैं, जिनके पास खेत, खाली प्लॉट या बड़ी छत होती है। वे ऐसे लोगों को भी टारगेट करते हैं, जिन्हें इस तरह के स्कैम की जानकारी कम होती है। इनमें शामिल हैं-
- किसान
- बुजुर्ग
- जो डिजिटली जागरूक नहीं हैं
सवाल- ठग टावर लगवाने के लिए कौन-से डॉक्यूमेंट्स मांगते हैं और इन्हें शेयर करने के क्या रिस्क हैं?
जवाब- ठग टावर लगवाने के नाम पर प्रॉपर्टी और आइडेंटिटी से जुड़े डॉक्यूमेंट्स मांगते हैं। बाद में ठगी और ब्लैकमेलिंग के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं। ग्राफिक में पूरे डॉक्यूमेंट्स की लिस्ट देखिए-

सवाल- ठग किन बहानाें से पैसे मांगते हैं?
जवाब- ठग पैसे ऐंठने के लिए अलग-अलग फीस और चार्ज का बहाना बनाते हैं, जैसेकि-
- रजिस्ट्रेशन फीस
- एग्रीमेंट चार्ज
- प्रोसेसिंग फीस
- NOC चार्ज
- फाइल चार्ज
- सिक्योरिटी डिपॉजिट
- सर्वे फीस
- स्टांप ड्यूटी
- इंस्टॉलेशन चार्ज
याद रखें, कोई भी वैध टेलीकॉम कंपनी टावर लगाने के लिए मकान मालिक से इस तरह की फीस नहीं मांगती है।
सवाल- अगर कोई मोबाइल टावर लगाने का ऑफर दे तो क्या करें?
जवाब- बिना आवेदन के मोबाइल टावर लगाने का ऑफर आमतौर पर फर्जी होता है। अगर ऐसा ऑफर आए तो-
- सबसे पहले ऑफर देने वाली कंपनी का नाम, वेबसाइट और कॉन्टेक्ट नंबर चेक करें।
- सिर्फ फोन, वॉट्सअप या ईमेल पर भेजे गए डॉक्यूमेंट्स के आधार पर भरोसा न करें।
- संबंधित कंपनी के आधिकारिक कस्टमर केयर से संपर्क कर ऑफर की पुष्टि करें।
- किसी भी तरह की रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग या NOC फीस जमा न करें।
- आधार, पैन, बैंक डिटेल या संपत्ति के डॉक्यूमेंट्स बिना वेरिफिकेशन के शेयर न करें।
- एग्रीमेंट पर साइन करने से पहले उसकी कानूनी जांच करा लें।
- ऑफर संदिग्ध लगे तो साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत करें।
सवाल- मोबाइल टावर के नाम पर होने वाले स्कैम से कैसे बचें?
जवाब- मोबाइल टावर लगाने का कोई भी ऑफर मिलने पर पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल करें। थोड़ी सावधानी आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है। इसलिए ग्राफिक में दी गई कुछ बातों का खास ध्यान रखें-

सवाल- क्या टेलीकॉम कंपनियां टावर लगाने के लिए सीधे लोगों से संपर्क करती हैं?
जवाब- बड़ी टेलीकॉम कंपनियां या उनके अधिकृत इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर तय प्रक्रिया के तहत काम करते हैं। वे व्यक्तिगत रूप से लोगों से संपर्क नहीं करते हैं। अगर कोई कॉल, मैसेज या फर्जी कागजात के जरिए आकर्षक ऑफर का लालच देता है, तो वह फ्रॉड है।
सवाल- क्या असली मोबाइल कंपनियां टावर लगाने के लिए पैसे मांगती हैं?
जवाब- नहीं, वैध कंपनियां जमीन या छत उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति से रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग, एनओसी, सिक्योरिटी डिपॉजिट या इंस्टॉलेशन फीस नहीं मांगतीं। अगर कोई पहले पैसे जमा करने की बात कहे तो वह फ्रॉड है।
सवाल- क्या सरकारी विभाग या DoT मोबाइल टावर लगाने के लिए कोई NOC जारी करता है?
जवाब- मोबाइल टावर लगाने की प्रक्रिया में अलग-अलग स्थानीय निकायों और संबंधित नियमों के अनुसार अनुमति ली जाती है। लेकिन कोई सरकारी विभाग या DoT (डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्युनिकेशन) फोन, वॉट्सएप या ईमेल के जरिए मोबाइल टावर लगाने के लिए NOC जारी करने के नाम पर पैसे नहीं मांगता। अगर कोई NOC या सरकारी मंजूरी के बदले फीस जमा करने को कहे, तो वह फ्रॉड है।
सवाल- फर्जी एग्रीमेंट, लेटर या सरकारी डॉक्यूमेंट की पहचान कैसे करें?
जवाब- ठग अक्सर ऐसे डॉक्यूमेंट तैयार करते हैं, जो पहली नजर में असली लगते हैं। इसलिए केवल लेटरहेड या मुहर देखकर भरोसा न करें। ग्राफिक में फर्जी दस्तावेज पहचानने के टिप्स देखिए-

सवाल- अगर गलती से पैसे दे दिए हैं तो क्या करें?
जवाब- सबसे पहले घबराएं नहीं। जितनी जल्दी कार्रवाई करेंगे, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ज्यादा होगी। ऐसी स्थिति में-
- तुरंत बैंक को सूचना दें।
- संबंधित खाते या कार्ड को ब्लॉक करवाएं।
- सभी चैट, कॉल रिकॉर्ड, स्क्रीनशॉट और रसीद सुरक्षित रखें।
- तुरंत नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज करें।
सवाल- मोबाइल टावर फ्रॉड की शिकायत कहां और कैसे करें?
जवाब- पॉइंटर्स से समझिए-
- साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करें।
- नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर इसकी शिकायत दर्ज करें।
- नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करें।
- बैंक को ट्रांजैक्शन की जानकारी दें।
- सभी दस्तावेज और डिजिटल सबूत जमा करें।

सवाल- मोबाइल टावर लगवाने की सही प्रक्रिया क्या है?
जवाब- पॉइंटर्स से पूरी प्रक्रिया समझिए-
- अगर किसी क्षेत्र में नेटवर्क बढ़ाने के लिए टावर की जरूरत होती है तो टेलीकॉम कंपनी या उसकी अधिकृत इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी स्थान का सर्वे करती है।
- उपयुक्त जगह मिलने पर जमीन या घर के मालिक से कानूनी समझौता किया जाता है।
- इसके बाद स्थानीय नियमों और आवश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
- पूरी प्रक्रिया लिखित अनुबंध और वेरिफाइड डॉक्यूमेंट्स के साथ होती है।
- यह वॉट्सएप पर भेजे गए फर्जी कागजों से नहीं होती।
सवाल- मोबाइल टावर लगवाने पर लगभग कितना किराया मिलता है?
जवाब- मोबाइल टावर का किराया किसी तय दर पर नहीं होता। यह शहर, इलाके, जमीन या छत के आकार, नेटवर्क की जरूरत और कंपनी की शर्तों पर निर्भर करता है। अलग-अलग क्षेत्रों में यह राशि अलग हो सकती है।
…………………………
ये खबर भी पढ़ें…
साइबर लिटरेसी- वॉट्सएप पर ‘बॉस बनकर’ कर रहे ठगी:स्कैमर ZIP फाइल भेजकर प्रोफेशनल्स को बनाते निशाना, जानें इस स्कैम से कैसे बचें

फर्ज करिए, आप जॉब करते हैं। अचानक आपके बॉस के नाम से वॉट्सएप पर ZIP फाइल के साथ एक मैसेज आता है- “इसे तुरंत चेक करें।” ऐसे में संभव है कि आप इसे जरूरी ऑफिस फाइल समझकर बिना ज्यादा सोचे-समझे डाउनलोड कर लें। ये खबर भी पढ़ें…

