एमपी के लगभग 90% हिस्से में अगले 4 दिन यानी, 23 जुलाई तक हल्की बारिश का दौर बना रहेगा। इस बीच 4 से 5 जिलों में भारी बारिश यानी, हेवी रेन हो सकती है। सोमवार को दमोह, मंडला और डिंडौरी में भारी बारिश का अलर्ट है, जबकि भोपाल, इंदौर समेत 47 जिलों में बूंद
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IMD (मौसम केंद्र) भोपाल के अनुसार, जुलाई में पिछले 12 दिन से भारी बारिश नहीं हुई है। इसका सीधा असर बारिश के ओवरऑल आंकड़े पर हो रहा है। अब प्रदेश में 16 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
प्रदेश में अब तक 261.4 मिमी (10.3) बारिश हो चुकी है, जो सामान्य बारिश के 311.8 मिमी (12.3) से 16% कम है। दूसरी ओर, पूर्वी हिस्से के जिलों में 23 प्रतिशत पानी कम गिरा है। वहीं, पश्चिमी हिस्से में भी 10% कम बारिश दर्ज की गई है।

शनिवार को भोपाल में गधे को गुलाब जामुन खिलाए गए थे, जबकि रविवार को नर्मदापुरम समेत कई जिलों में बारिश हुई।
आज इन जिलों में अलर्ट दमोह, मंडला और डिंडौरी में भारी बारिश का अलर्ट है। वहीं, भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में गरज-चमक, आंधी के साथ हल्की बारिश हो सकती है।
नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन और आगर-मालवा में बादल छाए रहेंगे, लेकिन यहां बारिश होने का अलर्ट नहीं है।
इन जिलों की अच्छी-बुरी स्थिति
कम बारिश वाले 39 जिले- अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, दतिया, धार, गुना, झाबुआ, मुरैना, नर्मदापुरम, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी और विदिशा।
ज्यादा बारिश वाले 16 जिले- निवाड़ी, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, देवास, ग्वालियर, हरदा, इंदौर, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, सीहोर और उज्जैन।
मैप से समझें, 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम




आगे कैसा रहेगा मौसम? मौसम एक्सपर्ट शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया, वर्तमान मौसमीय परिस्थितियां मानसून के लिए अनुकूल बनी हुई हैं। मानसून ट्रफ उत्तर-पश्चिम भारत से बंगाल की खाड़ी तक सक्रिय है। झारखंड–बिहार, दक्षिण-पश्चिम मध्य प्रदेश और उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश-दक्षिण छत्तीसगढ़ के ऊपर ऊपरी हवा के चक्रवातीय परिसंचरण सक्रिय हैं। इन तंत्रों के कारण बंगाल की खाड़ी से नमी का सतत प्रवाह मध्य भारत की ओर बना हुआ है।
यही कारण है कि पूर्वी मध्य प्रदेश में संवहनीय बादलों का विकास लगातार हो रहा है, जबकि पश्चिमी भागों में वर्षा अपेक्षाकृत कम रही है। यदि आगामी दिनों में मौसमीय तंत्र पश्चिम की ओर खिसकते हैं, तो वर्षा का क्षेत्र भी पश्चिमी मध्य प्रदेश की ओर विस्तारित हो सकता है।
जून के बाद जुलाई में भी आंकड़ा कम मौसम विभाग के अनुसार, जून में कम बारिश हुई, लेकिन जुलाई की शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह बढ़ गया। बाद में लगातार 9 दिन से तेज बारिश नहीं होने से लगातार चौथे दिन से आंकड़ा माइनस में आ गया है। बता दें कि इस महीने पूरे मानसून की एक तिहाई बारिश का ट्रेंड है। जैसे- भोपाल में 39 इंच सामान्य बारिश है तो 14 इंच बारिश जुलाई में होती है। बड़े शहरों में जबलपुर ही ऐसा है, जहां सबसे ज्यादा 17 इंच से ज्यादा बारिश होती है। जुलाई के महीने में ही प्रदेश में कोटे की 40 प्रतिशत तक बारिश होती है।
प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक है।
देवास में 18 इंच पानी गिरा, भोपाल-इंदौर बेहतर प्रदेश में देवास सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला है। यहां 102 प्रतिशत ज्यादा पानी गिर चुका है। मौसम विभाग के आंकड़ों की माने तो यहां अब तक 18 इंच बारिश हो चुकी है। इंदौर-सीहोर में 14 इंच बरसात हुई है। हरदा में 15 इंच पानी गिर चुका है। भोपाल में 13.1 इंच पानी गिरा है। आगर-मालवा, अशोकनगर, बैतूल, बुरहानपुर, गुना, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर, उज्जैन, विदिशा, अनूपपुर, बालाघाट, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, मंडला, पांढुर्णा, पन्ना, सागर, सिवनी और उमरिया जिले भी बेहतर स्थिति में है। आलीराजपुर में सबसे कम सवा 2 इंच ही बारिश हुई है, जो सामान्य से 74 प्रतिशत कम है।
जुलाई में MP के 5 बड़े शहरों में ऐसा ट्रेंड
इंदौर में 24 घंटे में 11.5 इंच बारिश का रिकॉर्ड इंदौर की बात करें तो 24 घंटे में 11.5 इंच बारिश होने का रिकॉर्ड है, जो 27 जुलाई 1913 में हुई थी। वर्ष 1973 को पूरे महीने 30.5 इंच पानी गिरा था। बारिश के चलते यहां भी तापमान में गिरावट देखने को मिलती है।
इंदौर में महीने की एवरेज बारिश 12 इंच है। एवरेज 13 दिन यहां बारिश होती है।
भोपाल में 41 इंच बारिश का रिकॉर्ड राजधानी भोपाल में जुलाई में खूब बारिश होती है। यहां एक ही महीने में 1031.4 मिमी यानी 41 इंच के करीब बारिश होने का रिकॉर्ड है। यह साल 1986 को हुई थी। 22 जुलाई 1973 को एक ही दिन में 11 इंच बारिश हुई थी, जो अब तक का रिकॉर्ड है।
भोपाल में बारिश के दिनों की बात करें तो जुलाई महीने में एवरेज 15 दिन बारिश होती है। यानी, हर दूसरे दिन पानी बरसता है। महीने की एवरेज बारिश 367.7 मिमी यानी 14.4 इंच है। बारिश के चलते दिन का तापमान 30 और रात में पारा 25 डिग्री से कम रहता है।

भोपाल में जुलाई महीने में एवरेज 15 दिन बारिश होती है।
जबलपुर में सबसे ज्यादा बारिश होने का रिकॉर्ड चारों बड़े शहरों में जबलपुर ऐसा है, जहां सबसे ज्यादा बारिश होती है। वर्ष 1930 में करीब 45 इंच पानी बरसा था, जबकि 30 जुलाई 1915 को 24 घंटे की सर्वाधिक 13.5 इंच बारिश हुई थी। पिछले साल जुलाई में 13 इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। 2013 और 2016 में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी।
जबलपुर में जुलाई की सामान्य बारिश 17 इंच है। महीने में 15 से 16 दिन पानी बरसता है।
ग्वालियर में 6 बार 8 इंच से कम बारिश भोपाल, इंदौर और जबलपुर की तुलना में ग्वालियर में सबसे कम बारिश होती है। पिछले 10 साल में 6 बार ऐसा हुआ, जब 8 इंच से कम पानी गिरा हो, जबकि यहां की एवरेज बारिश 9 इंच के करीब है। ग्वालियर में वर्ष 1935 में महीने की सबसे ज्यादा बारिश हुई थी। तब 623.3 मिमी यानी 24.5 इंच बारिश दर्ज की गई थी।
24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश की बात करें तो 12 जुलाई 2015 में 190.6 मिमी यानी साढ़े 7 इंच पानी बरसा था। ग्वालियर में जुलाई के महीने में एवरेज 11 दिन बारिश होती है।
उज्जैन में जमकर होती है बारिश प्रदेश के अन्य शहरों की तरह उज्जैन में भी जुलाई में जमकर बारिश होती है। कोटे की करीब 40 प्रतिशत बारिश इसी महीने हो जाती है।
