रूमी जाफरी7 घंटे पहले
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बीआर चोपड़ा की सुपरहिट फिल्म ‘नया दौर’ में दिलीप कुमार और वैजयंती माला।
मेरे हिस्से के किस्से में आज फिर बात बीआर चोपड़ा जी की। पिछले हफ्ते मैंने उनकी पहली सुपरहिट फिल्म ‘अफसाना’ तक की कहानी आप लोगों को सुनाई थी। जैसा मैंने बताया था कि अफसाना की कहानी आईएस जोहर साहब ने लिखी थी। फाइनेंसर भी उनको आसानी से मिल गए थे।
सबकी तरह चोपड़ा साहब की भी ख्वाहिश थी कि उस वक्त के सबसे बड़े स्टार दिलीप कुमार के साथ काम किया जाए। तो किसी तरह वो दिलीप साहब तक पहुंच गए। दिलीप साहब ने चोपड़ा साहब से पूछा, “तुमने पहले कौन-सी फिल्म डायरेक्ट की है?’ चोपड़ा साहब ने कहा, “कोई नहीं।’ तब पूछा, “किसके असिस्टेंट रहे हो?’ तो चोपड़ा साहब ने कहा, “किसी का नहीं।’ दिलीप साहब ने कहा, “फिर तुमने डायरेक्शन कहां से सीखा है?’ चोपड़ा साहब ने जवाब दिया, “सीखा तो नहीं है, मगर मैं फिल्म बना लूंगा, ये मुझे यकीन है।’ चोपड़ा साहब की ये बात सुनकर दिलीप साहब उनको हैरत से देखते रहे। फिर बोले, “अच्छा, कहानी सुनाओ।’ चोपड़ा साहब ने कहानी सुनाई। सुनकर दिलीप कुमार बहुत खुश हो गए। बोले, “तुम्हारी कहानी बहुत अच्छी है, मगर मैं नहीं कर पाऊंगा क्योंकि मैं इस रोल में फिट नहीं हूं। मैं जज नहीं लगता। तुम अशोक कुमार जी के साथ फिल्म बना लो। वो जज लगते हैं।’ तो चोपड़ा साहब ने कहा, “बड़ी मुश्किल से तो आप तक पहुंचा हूं।’ इस पर दिलीप साहब बोले, “मैं उनसे कह देता हूं। वो मेरा कहना नहीं टालेंगे क्योंकि तुम्हारी कहानी और रोल दोनों बहुत अच्छे हैं। वो जरूर करेंगे।’ और फिर चोपड़ा साहब ने अशोक कुमार जी से बात की और अशोक जी ने फिल्म कर ली। तो उस दौर में ऐसे अच्छे लोग थे, इतना अपनापन था, इतना लिहाज था, इतना भाईचारा था इंडस्ट्री में। वो वक्त ही कुछ और था।
कुछ साल बाद समय ने करवट बदली। अख्तर मिर्जा साहब ने चोपड़ा साहब को कहानी सुनाई। उन्हें कहानी बहुत पसंद आई। उन्होंने कहा कि मैं ये बनाऊंगा। जब इस कहानी पर उन्होंने काम करना शुरू किया तो यह बात मेहबूब खान को पता लगी। वो चोपड़ा साहब को चाहते थे और चोपड़ा साहब उनको अपना गुरु मानते थे। वो चोपड़ा साहब से मिले और उन्होंने पूछा, “मैंने सुना है कि तुम अख्तर मिर्जा की कहानी ‘नया दौर’ बना रहे हो, बस और टांगेवाले की कहानी?’ चोपड़ा साहब ने कहा, “हां।’ तो वो बोले, “कोई नहीं देखेगा। फ्लॉप हो जाएगी। तुम्हें नुकसान हो जाएगा।’ इस पर चोपड़ा साहब ने कहा, “मैंने अपने पहले आर्टिकल में यही लिखा था कि फिल्म इंडस्ट्री को कुछ नई कहानियां बनानी चाहिए। कुछ ऐसी जिनमें मैसेज हों। इस बात पर मैं खुद अमल न करूं, ये तो नहीं हो सकता।’
अब देखिए वक्त कैसे पलटता है। चोपड़ा साहब ने सोचा कि इसमें वो अशोक कुमार को लेंगे। उन्होंने अशोक कुमार को कहानी सुनाई। सुनकर अशोक जी बोले, “कहानी तुम्हारी बहुत अच्छी है, मगर मेरे साथ बनाओगे तो फ्लॉप हो जाएगी, क्योंकि मैं टांगेवाला लगता नहीं हूं। इसमें तुम दिलीप कुमार को लोगे तो वो ये काम जबरदस्त करेंगे।’ चोपड़ा साहब ने कहा, “अगर उन्होंने मना कर दिया तो?’ अशोक कुमार बोले, “मैं दिलीप कुमार से कह दूंगा। वो ना नहीं करेंगे।’ इस तरह पहले दिलीप कुमार के कहने पर अशोक कुमार ने बीआर चोपड़ा की ‘अफसाना’ फिल्म में काम किया। फिर अशोक कुमार के कहने पर दिलीप कुमार ने ‘नया दौर’ की।
‘नया दौर’ की हीरोइन पहले मधुबाला थीं। उस वक्त दिलीप कुमार और मधुबाला एक दूसरे को चाहते थे, लेकिन मधुबाला के वालिद को यह पसंद नहीं था। खैर, कुछ दिनों तक फिल्म की शूटिंग हुई, लेकिन जब बीआर चोपड़ा ने तय किया कि वो इसकी आगे की शूटिंग भोपाल में करेंगे तो मधुबाला के पिताजी ने मना कर दिया कि वो दिलीप कुमार के साथ आउटडोर शूटिंग पर नहीं जाएंगी।
इससे झगड़ा बढ़ा और मधुबाला ने फिल्म छोड़ दी। फिर चोपड़ा मुआवजा मांगने कोर्ट चले गए। कोर्ट में केस चला और यह फिल्म के इतिहास का सबसे अद्भुत उदाहरण है कि दिलीप कुमार कैसे सच्चाई के साथ खड़े रहे। मोहब्बत उनकी मधुबाला थी और झुकाव भी उनकी तरफ था, लेकिन कोर्ट में उन्होंने इंसाफ किया। वहां उन्होंने मधुबाला के खिलाफ और बीआर चोपड़ा के पक्ष में गवाही दी। इसके बाद चोपड़ा साहब को मुआवजा मिला और फिर वैजयंती माला को लेकर ‘नया दौर’ फिल्म बनाई गई, जिसने इतिहास रच दिया। आज बीआर चोपड़ा की याद में उनकी इसी फिल्म का ये गाना सुनिए, अपना ख्याल रखिए और खुश रहिए :
उड़ें जब जब जुल्फें तेरी, कुंवारियों का दिल मचले…

