रांची22 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

2394 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सेवा से हटाने का कोई विधिवत आदेश गुरुवार को संबंधित विभागों से जारी नहीं हुआ। इस विषय पर अधिकारी दिन भर वेट एंड वाच की स्थिति में रहे।
इस बीच, वैकल्पिक व्यवस्था के तहत खाद्य आपूर्ति विभाग में काम शुरू किया गया है। सीडीपीओ का चल रहा प्रशिक्षण बंद हो गया है। सचिवालय में गुरुवार को दिन भर गहमा-गहमी बनी रही। कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने उप समार्हता, सहायक प्रशाखा पदाधिकारी और निम्न वर्गीय लिपिक को सरकार द्वारा दो दिन पूर्व जारी आदेशों के आलोक में सरकारी सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी नहीं किया। हालांकि इस संबंध में फाइल ऊपर बढ़ी, लेकिन उस पर कोई आदेश नहीं हुआ।
सभी की नजरें झारखंड हाईकोर्ट में दायर केस के निर्णय पर लगी रही। मालूम हो कि मंगलवार की देर रात झारखंड सरकार के दो महत्वपूर्ण आदेश से 2394 पदों पर कार्यरत लोगों के सेवा में बने रहने पर संकट खड़ा हो गया था। इसका असर गुरुवार को सचिवालय के कई विभागों में दिखा। अधिकतर विभागों में सहायक प्रशाखा पदाधिकारियों ने काम नहीं किया। वे धरना-प्रदर्शन करते रहे। उप समाहर्ता रैंक के 207 अधिकारियों को हटाने पर कोई विधिवत निर्णय नहीं हुआ। हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर के बाद दोपहर से सचिवालय का माहौल में बदलाव दिखा। नवनियुक्त डिप्टी कलेक्टर का प्रोबेशन और देवघर श्रावणी मेले में हुई प्रतिनियुक्ति रद्द नहीं हुई है।
सीडीपीओ का चल रहा प्रशिक्षण बंद समाज कल्याण सचिव उमाशंकर सिंह ने बताया कि कार्मिक विभाग का आदेश जारी होने के बाद नवनियुक्त सीडीपीओ का चल रहा प्रशिक्षण बंद कर दिया गया है। इधर, खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 6 माह पूर्व जिस तरह से खाली प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों के पदों के विरुद्ध विकल्प से काम चलाया जा रहा था। उसी तरह की व्यवस्था फिर से लागू कर दी गई है। संबंधित जिले के डीसी, बीडीओ, सीओ और अलग-अलग विभागों के पदाधिकारियों से खाली हुए बीएसओ के पदों का काम ले रहे हैं।

