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नई दिल्ली17 मिनट पहले
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तस्वीर 21 जुलाई की है, दावा किया गया था कि पुलिस के लाठीचार्ज में 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारी घायल हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट सोमवार को उन याचिकाओं पर सुनवाई करने वाला है, जिनमें 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान पुलिस पर बर्बरता का आरोप लगाया गया है। केस CJI सूर्यकांत की बेंच में लिस्ट किया गया है।
गौरतलब है कि परीक्षाओं में गड़बड़ी और NEET पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध प्रदर्शन 36 दिन तक चला था। 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह प्रदर्शन खत्म कर दिया गया था।
कोर्ट का फोकस 2 मुद्दों पर…
- बेंच प्रदर्शनकारियों और पैलेट गन से घायलों के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में एक SIT बना सकती है।
- कोर्ट यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकता है कि पुलिसकर्मियों पर हमले छात्रों ने किए थे या छात्रों की भीड़ में घुस आए शरारती तत्वों ने।

पिछली सुनवाई में कहा था- क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले छोड़े न जाएं
28 जुलाई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई भी सख्त कार्रवाई करने से रोक दिया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि 18 साल से कम उम्र वाले लोगों का कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं हो तो उन्हें रिहा कर दिया जाए।
अदालत ने महाराष्ट्र, बिहार, असम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरलम सरकार को नोटिस जारी किए थे और उनके एडवोकेट जनरल से अगली सुनवाई की तारीख पर ऑनलाइन पेश होने को कहा था।
जिन राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए थे, अदालत ने वहां सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी-कैमरा फुटेज, वायरलेस कम्युनिकेशन रिकॉर्ड, PCR लॉग और विरोध प्रदर्शन से जुड़े अन्य डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने के लिए निर्देश जारी किए थे। पढ़ें पूरी खबर…
20 जुलाई को संसद मार्च में हुआ था लाठीचार्ज
20 जुलाई को दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुईं। सुरक्षाकर्मियों ने संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।
प्रदर्शनकारी NEET पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। 25 जुलाई को प्रधान के इस्तीफे और जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग मान लेने के साथ ही आंदोलन खत्म हो गया था।
20 जुलाई के संसद मार्च की 2 तस्वीरें…

पुलिस-रैपिड एक्शन फोर्स ने लाठीचार्ज किया,आंसू गैस के गोले छोड़े, पथराव भी हुआ।

इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी घायल हुए। 100 से ज्यादा लोगों काे चोटें आईं थीं।
‘फेशियल रिकग्निशन’ के इस्तेमाल के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका
राज्यसभा के एक सांसद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी (FRT) और बायोमेट्रिक निगरानी के दूसरे तरीकों के इस्तेमाल को चुनौती दी गई है।
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के केरलम से राज्यसभा सदस्य एए रहीम ने मांग की है कि शांतिपूर्ण सार्वजनिक सभाओं में बिना किसी भेदभाव के बायोमैट्रिक निगरानी का इस्तेमाल असंवैधानिक घोषित किया जाए।
पहले भी 3 बार सुप्रीम कोर्ट पहुंची कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ी याचिका
1. पहली बार- 24 मई, मांग थी- CJP बनाने वालों की गतिविधियों की जांच CBI करे
याचिकाकर्ता के वकील एनके गोस्वामी का दावा था कि CJP, ज्यूडीशियरी की इमेज खराब कर रही है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने कहा, ‘इसे इतनी भावुकता से मत लें।’
इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट में कार्यवाही के दौरान दिए गए मौखिक अदालती बयानों के कमर्शियलाइजेशन किए जाने के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई। इस पर CJI ने जवाब दिया था- “अभी ऐसी कोई गंभीर आपात स्थिति नहीं है। देखते हैं क्या होता है।” पढ़ें पूरी खबर…
2. दूसरी बार- 22 जुलाई, मांग थी- कॉकरोच पार्टी के समर्थकों पर लाठीचार्ज की जांच हो

एक वकील ने CJI की अगुआई वाली 3 जजों की बेंच के सामने जनहित याचिका लगाई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकील ने कहा- छात्र महत्वपूर्ण मुद्दे उठा रहे हैं। लेकिन उन पर पुलिस की बर्बरता के वीडियो भी हैं। यदि संभव हो तो मामले की सुनवाई जल्द की जाए।
इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा था, ‘हमें वीडियो में दिलचस्पी नहीं है, हमारे पास देखने का समय नहीं है।’ जब वकील ने छात्रों के साथ मारपीट के वीडियो देखने का दूसरी बार अनुरोध किया तो CJI ने कहा, ‘हमारा और अपना समय बर्बाद मत कीजिए।’ पढ़ें पूरी खबर…
3. तीसरी बार- 24 जुलाई, मांग थी- पुलिस पर कंट्रोल जरूरी, कोर्ट हमारे बीच आ रहा है
इस बार मामला सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने उठाया। उन्होंने कोर्ट में बताया प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की हिंसा से जुड़ी 2 याचिकाएं दायर की गई हैं। इनमें कई राज्य पक्षकार के तौर पर शामिल हैं। इनका जिक्र पहले इसलिए नहीं किया गया क्योंकि वे डायरी नंबर का इंतजार कर रहे थे। इन दलीलों के बाद CJI ने कहा, “इसे लिस्टिंग में आने दें, हम इस पर सुनवाई करेंगे।”

इससे पहले एक दूसरे मामले की सुनवाई के दौरान CJI ने कहा था- मैंने CJP के प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज से जुड़ी किसी भी याचिका की सुनवाई से इनकार नहीं किया। सच ये है कि कोई रिट याचिका दाखिल ही नहीं की गई थी। मीडिया ने भी गलत खबरें चलाईं। पढ़ें पूरी खबर…

