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Punjab Employees DA Case | Supreme Court Caveat Filed Against Government


पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते (DA) का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा गया है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से कर्मचारियों के पक्ष में फैसला आने के बाद सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना को देखते हुए कर्मचारियों ने पहले ही कैविए

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3 अगस्त को हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को 15 दिनों के भीतर कर्मचारियों और पेंशनरों का बकाया डीए जारी करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने साफ कहा है कि यदि इस महीने के अंत तक भुगतान नहीं किया गया, तो सरकार को 6% ब्याज के साथ राशि देनी होगी।

इधर, सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील किए जाने की आशंका के बीच कर्मचारी पक्ष ने 5 अगस्त को कैविएट याचिका दाखिल कर दी। इसका मतलब है कि यदि सरकार हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देती है, तो सुप्रीम कोर्ट कर्मचारी पक्ष को सुने बिना कोई आदेश पारित नहीं करेगा। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट अभिषेक गुप्ता सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखेंगे।

कर्मचारियों इस कदम से क्या फायदा…

  • आखिर क्या होती है कैविएट: कैविएट एक तरह का कानूनी ‘प्रीकॉशनरी मेजर’ (अग्रिम सुरक्षा चक्र) है। जब किसी पक्ष को यह अंदेशा होता है कि निचली अदालत में हारा हुआ दूसरा पक्ष ऊपरी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का दरवाजा खटखटा सकता है, तब कैविएट फाइल की जाती है।
  • एकतरफा स्टे का खतरा खत्म – कैविएट दाखिल होने के बाद, यदि पंजाब सरकार हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करती है, तो सुप्रीम कोर्ट कर्मचारियों का पक्ष सुने बिना सरकार के पक्ष में कोई एकतरफा स्टे या अंतरिम राहत नहीं दे सकेगा।
  • नोटिस देना अनिवार्य – अब सुप्रीम कोर्ट को कोई भी फैसला या अंतरिम आदेश देने से पहले कर्मचारियों (याचिकाकर्ता) को नोटिस जारी कर उनका पक्ष सुनना ही पड़ेगा।

हाईकोर्ट ने रद्द की थी 42 किश्तों वाली नीति हाल ही में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार की उस नीति को खारिज कर दिया था, जिसके तहत DA का बकाया 42 किश्तों में देने का प्रावधान किया गया था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि राज्य सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को केंद्र सरकार की तर्ज पर DA और DR का भुगतान करे।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि कर्मचारियों द्वारा उठाया गया यह कदम बेहद सतर्कता भरा है। इससे यह सुनिश्चित हो गया है कि अगर सरकार सुप्रीम कोर्ट जाती भी है, तो कर्मचारियों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलेगा।

कर्मचारियों के बकाया DA का पूरा मामला जानिए…

  • वर्ष 2016: पंजाब में छठे वेतन आयोग की रिपोर्ट आई। इसके बाद 1 जनवरी 2016 से जुलाई 2021 तक का कर्मचारियों का बकाया DA अलग-अलग प्रशासनिक वजहों से फ्रीज कर दिया गया।
  • वर्ष 2021-2022: कांग्रेस सरकार ने चुनाव नजदीक आने पर वेतन आयोग की सिफारिशें तो लागू कर दीं, लेकिन ₹14,191 करोड़ के पिछले बकाए का भुगतान नहीं किया। मामला पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया।
  • 18 फरवरी 2025: राज्य की AAP सरकार ने हाईकोर्ट में एक सिस्टमैटिक लिक्विडेशन प्लान (किस्तों में भुगतान की योजना) पेश किया। सरकार का दावा है कि इस योजना के तहत सरकार ने उम्र के हिसाब से बुजुर्ग पेंशनर्स को प्राथमिकता देते हुए 3 साल में करीब ₹6,000 करोड़ का भुगतान कर्मचारियों को किया।
  • 8 अप्रैल 2026: हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सरकार के लिक्विडेशन प्लान को मनमाना और असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि पंजाब सरकार 30 जून 2026 तक सभी कर्मचारियों और पेंशनर्स का पूरा बकाया DA क्लियर करे।
  • अप्रैल-जुलाई 2026: पंजाब सरकार ने वित्तीय तंगी का हवाला देते हुए सिंगल बेंच के इस फैसले को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (दो जजों की पीठ) में चुनौती दी।
  • 3 अगस्त 2026: मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की डिवीजन बेंच ने पंजाब सरकार की अपीलों को पूरी तरह खारिज कर दिया। कोर्ट ने 76 पन्नों का विस्तृत आदेश जारी करते हुए सख्त निर्देश दिए।
फाइनेंस मंत्री हरपाल सिंह चीमा।

फाइनेंस मंत्री हरपाल सिंह चीमा।

जानिए हाईकोर्ट के फैसले पर वित्तमंत्री ने क्या कहा था

  • 2016 में आई रिपोर्ट पंजाब में लागू नहीं की गई: वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने कहा था कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला दिया, जिसमें पंजाब के मुलाजिमों की DA की किश्त को लेकर आदेश दिया था। मुलाजिमों का पे कमीशन उस समय गठित हुआ था, जिस वक्त पंजाब में अकाली दल और BJP गठबंधन की सरकार थी। यह रिपोर्ट 2016 में आई थी। इस रिपोर्ट को पंजाब में लागू नहीं किया गया।
  • चुनाव से ठीक पहले रिपोर्ट लागू हुई: उन्होंने कहा- 2016 से लंबे समय तक इस पर मीटिंग होती रही। फिर 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले यह रिपोर्ट लागू कर दी गई। 1 जनवरी 2016 से लेकर जुलाई 2021 तक DA का बकाया फ्रीज कर दिया गया। उसे रिलीज नहीं किया गया। इसके बाद पंजाब में बकाए की राशि 14 हजार 191 करोड़ बनती थी। बकाया अकाली दल, भाजपा की गठबंधन की सरकार के समय शुरू हुआ, कांग्रेस ने भी 5 साल निकाल दिए, कोई रकम नहीं दी।
  • 85 से बड़ी उम्र का बकाया हम दे चुके: वित्तमंत्री ने कहा- इसके बाद कई साथी लिटिगेशन में गए। उन्होंने कोर्ट में इसे चैलेंज किया। कोर्ट में हमने लिक्विडेशन प्लान दिया। इसके तहत 2024-25 में 85 साल से बड़ी उम्र के पेंशनर का बकाया हम दे चुके हैं। 2025-26 में हमने 75 साल से ऊपर के पेंशनर्स का बकाया दिया। 2026-27 में हम पेंशनर और मुलाजिमों को अप्रैल 2026 से बकाया DA देना शुरू कर दिया।
  • बकाया चुकाने का प्लान कोर्ट ने मंजूर किया: मंत्री चीमा ने कहा- कुल 14,191 करोड़ में से करीब 6 हजार करोड़ रुपया हम दे चुके हैं। बकाया अमाउंट देने का प्लान हम हाईकोर्ट को दे चुके हैं। कोर्ट ने उसे मंजूर किया। उसे लागू कर रहे हैं।

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