रायपुर7 घंटे पहले
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छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में मां-बेटी की हत्या और रेप के मामले में कोर्ट में चार्जशीट पेश की गई। प्रत्यक्ष गवाही के अभाव में पुलिस ने फॉरेंसिक और डिजिटल सबूतों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मामला साबित किया। घटनास्थल से मिले बाल, सीढ़ियों की रेलिंग पर मिले फिंगरप्रिंट और कपड़ों पर मिले खून के धब्बे जांच में अहम साबित हुए।
अदालत ने माना कि कुलदीप खुद को बचाने के लिए बहाने बना रहा था। उसने आरोप लगाया था कि घटना के दिन उसे हिरासत में रखा गया और उसके खून, स्पर्म, उंगलियों व हथेली के निशान और बालों के नमूने लेकर उसे झूठे मामले में फंसाने की कोशिश की गई। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

आरोपियों को सजा सुनाए जाने के बाद पुलिसकर्मियों और उनके परिवार के सदस्यों ने दीवाली मनाई।
किचन में मिले बाल, रेलिंग के फिंगरप्रिंट बने अहम सबूत
कोर्ट में पेश चार्जशीट के मुताबिक, जांच के दौरान घटनास्थल की कीचन से इंसानी बाल जब्त किए गए। डीएनए जांच में इन नमूनों का आरोपियों से मिलान होने की बात सामने आई। मृतका के कपड़ों और घटनास्थल से मिले जैविक नमूनों की डीएनए प्रोफाइलिंग ने भी अभियोजन पक्ष (आरोपी पक्ष) को महत्वपूर्ण आधार दिया।
पुलिसकर्मी के घर की सीढ़ियों की रेलिंग से मिले फिंगरप्रिंट की जांच की गई। फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों के मुताबिक, ये निशान मुख्य आरोपी कुलदीप साहू से मेल खाते थे। इसके अलावा कॉल डिटेल और दूसरे डिजिटल सबूतों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया। इन साक्ष्यों की कड़ियों के आधार पर कोर्ट ने आरोपियों की भूमिका पर विचार किया।
जिलाबदर होने के बावजूद शहर में घूम रहा था कुलदीप
कोर्ट में पेश चार्जशीट के मुताबिक, मुख्य साजिशकर्ता कुलदीप साहू जिला मजिस्ट्रेट के आदेश से जिलाबदर था, लेकिन इसके बावजूद वह शहर में घूम रहा था।
वारदात वाली रात उसने चेकिंग कर रही पुलिस टीम पर खौलता तेल फेंका और भागते समय फायरिंग भी की थी। इसके बाद पुलिसकर्मी से पुरानी रंजिश के चलते वह साथियों के साथ उसके घर पहुंचा और वारदात को अंजाम दिया।

बचाव पक्ष के तर्क खारिज, 51 गवाहों के बयान हुए
सुनवाई के दौरान कुलदीप ने पुलिस पर दबाव डालकर सैंपल लेने का आरोप लगाया। फूल सिंह उर्फ रिंकू ने दुर्गा विसर्जन में मौजूदगी के फोटो-वीडियो का हवाला दिया, जबकि चंद्रकांत ने कपड़े प्लांट करने का दावा किया। अदालत ने बचाव पक्ष के तर्कों पर विचार करने के बाद मौजूद सबूतों के आधार पर फैसला सुनाया।
कुल 6 आरोपी थे, 4 पर आरोप साबित हुए
मामले में कुल छह आरोपी थे। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 51 गवाहों के बयान और फॉरेंसिक रिपोर्ट पेश की। चार आरोपियों के खिलाफ डिजिटल और वैज्ञानिक साक्ष्य पेश किए गए।
वहीं, सूरज साहू के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर अदालत ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया। छठे आरोपी के संबंध में अंतिम फैसले की स्थिति उपलब्ध विवरण में स्पष्ट नहीं है।
वैज्ञानिक जांच से जुटाए सबूतों के बाद दोषी करार
अब फांसी की सजा पर हाईकोर्ट की पुष्टि की प्रक्रिया पूरी होनी है। इस मामले में डीएनए, फिंगरप्रिंट और डिजिटल साक्ष्यों ने अहम भूमिका निभाई। चश्मदीद गवाह के अभाव में वैज्ञानिक जांच से जुटाए गए सबूतों के आधार पर अदालत ने दोषियों को सजा सुनाई है।
रायपुर सेंट्रल जेल में बंद है तीनों आरोपी
बता दें कि केस के तीनों आरोपी अभी रायपुर सेंट्रल जेल में हैं। जहां उन्हें अलग-अलग बैरक में रखा गया है। फांसी की सजा की पुष्टि के लिए संबंधित दस्तावेज छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर भेजे गए हैं। इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले की खास बात यह रही कि वारदात का कोई चश्मदीद गवाह नहीं था।

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मां-बेटी हत्याकांड केस में आरोपियों को रायपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट कर दिया
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में मां-बेटी हत्याकांड केस में स्पेशल कोर्ट ने आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई है। अब मुख्य आरोपी कुलदीप साहू को रायपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट कर दिया गया है। बाकी दो आरोपियों चंद्रकांत चौधरी और फूल सिंह उर्फ रिंकू को पहले ही जेल भेज दिया गया था। पढ़ें पूरी खबर…

