श्रीगंगानगर के रायसिंहनगर से विदेश में 815 करोड़ रुपए भेजे जाने के मामले में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को सीए शेरिल गुप्ता ने बताया कि- ये रुपए हांगकांग भेजे गए थे। इसके बाद फर्जी कंपनियों के जरिए ये रुपया वापस भारत में आना था।
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एक कंपनी से तो CA ने विदेश में 990 ट्रांजैक्शन कर 610 करोड़ से ज्यादा रुपए विदेश में ट्रांसफर किए थे। शेरिल ने बिना डॉक्यूमेंट जांच किए इन रुपयों को लेकर 15CB का सर्टिफिकेट भी दे दिया।
जबकि 815 करोड़ की कुल रकम पर 163 करोड़ का टैक्स जमा होना था। पढ़िए विदेश में गई रकम पर ये रिपोर्ट…

न डॉक्यूमेंट्स देखे न वेरीफाई किया
आयकर विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सर्वे के दौरान शेरिल गुप्ता ने स्वीकार किया कि संबंधित अकाउंट्स, समझौतों और दस्तावेजों को खुद नहीं देखा और न ही उनका वेरिफिकेशन किया।
कई लोगों ने इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं किया था या उनका घोषित कारोबार बहुत कम था, फिर भी उनके नाम पर बड़ी रकम विदेश भेजी गई। आईटी विभाग के अनुसार, इनमें से कुछ शेल कंपनियां भी थीं।

18 अगस्त रायसिंहनगर में सीएम शेरिल गुप्ता के ऑफिस में सर्च की गई थी। इस दौरान टैक्स चोरी की जानकारी मिली।
सिंडिकेट की भी जांच
आयकर विभाग के उपनिदेशक (अन्वेषण) कन्हैयालाल मीणा की शिकायत पर रायसिंहनगर पुलिस थाने में मामला दर्ज हुआ है। शिकायत में अन्य मध्यस्थों और संभावित सिंडिकेट की भूमिका की जांच की बात कही गई है।
अगर कोई अन्य व्यक्ति या समूह शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। अब ईडी ने इस प्रकरण में पुलिस से फाइल मांगी है। श्रीगंगानगर में एक बड़ा हवाला कारोबारी पर भी आयकर विभाग के रडार पर है।

163 करोड़ का चूना लगाया
नियम के हिसाब से एक कंपनी रेमिटेंस के माध्यम से 5 से 10 लाख तक रुपए विदेश भेज सकती है। अगर रकम इससे ज्यादा है तो फॉर्म-15CB लगाना पड़ता है। जिसका टैक्स 20 प्रतिशत होता है। 20 प्रतिशत के हिसाब से 815 करोड़ का टैक्स 163 करोड़ रुपए बनता है।
क्या है फॉर्म-15CB
- फॉर्म-15CB आयकर नियमों के तहत चार्टर्ड अकाउंटेंट जारी करता है। जब कोई व्यक्ति या विदेशी कंपनी फाइनेंशियल ईयर में 5 लाख रुपए से ज्यादा का भुगतान (जो भारत में कर योग्य हो) करता है और इसमें आकलन अधिकारी से धारा 195/197 के तहत प्रमाणपत्र नहीं लिया गया हो, तो CA को फॉर्म-15CB जारी करना पड़ता है।
- इसमें CA भुगतान की प्रकृति, उद्देश्य, लागू TDS दर, कर कटौती और आयकर अधिनियम की धारा 5 व 9 तथा डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA) के प्रावधानों के अनुसार कर योग्यता की जांच करके प्रमाणित करता है।
- यह फॉर्म 15CA (पार्ट-सी) भरने से पहले जरूरी होता है। बैंक या अधिकृत डीलर विदेश में पैसा भेजने से पहले इसी सर्टिफिकेट पर निर्भर करते हैं। बिना उचित वेरिफिकेशन के बड़े पैमाने पर ऐसे सर्टिफिकेट जारी करना नियमों का घोर उल्लंघन माना जाता है।
ये था पूरा मामला
जयपुर से आयकर की टीम 18 अगस्त को रायसिंहनगर पहुंची। ओल्ड धान मंडी स्थित एमबीएस अंबिका आयरन स्टोर की पहली मंजिल पर दुकान नंबर-35 में चल रहे CA शेरिल गुप्ता के ऑफिस में सर्च किया गया। जांच में सामने आया कि उन्होंने कुल 1674 फॉर्म-15CB सर्टिफिकेट जारी किए थे। पूरी खबर पढ़िए…
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