जयपुर24 मिनट पहलेलेखक: गोवर्धन चौधरी/श्रीधर व्यास
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‘मैंने हमेशा मान-सम्मान और स्वाभिमान से जीवन जिया है, मेरे उसूल और आदर्शों से कभी कोई समझौता नहीं किया। मेरे कार्यकर्ताओं में मौजूदा चापलूसी की परंपरा के कारण आक्रोश है, यदि सच को सच कहना, गलत और झूठ का साथ नहीं देना पाप है तो मैं इसको हर बार करूंगा, मैं ना गलत करता हूं न ही गलत सहन करता हूं…’
भरतपुर के पूर्व राजपरिवार से आने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह के नाम से हुई एक सोशल मीडिया पोस्ट ने कांग्रेस में भूचाल लाते हुए राजस्थान के सियासी पारे को अचानक गरमा दिया है।
अपनी बेबाक शैली के लिए पहचाने जाने वाले विश्वेंद्र सिंह ने अध्यक्ष के नाम भावुक पोस्ट लिखते हुए साफ कहा कि ‘गलत नीति-रीति के साथ कदमताल करने की बजाय अलविदा कहना ही बेहतर है।’
दिनभर मान-मनौव्वल के कयासों के बाद शाम को कांग्रेस की अनुशासन कमेटी की ओर से उन्हें नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा गया है।
आखिर कांग्रेस के कद्दावर नेता विश्वेंद्र सिंह के ‘इस्तीफे’ का पूरा विवाद क्या है, उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा पर क्या संगीन आरोप लगाए, इस पूरे घटनाक्रम के सियासी मायने क्या हैं और शाम को क्यों अचानक सख्त अंदाज में उतर आई कांग्रेस? यही जानेंगे आज के राजस्थान एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह के इस्तीफे का क्या मामला है और उन्होंने क्या सफाई दी?
जवाब: 2 अक्टूबर की सुबह प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया, जब पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे विश्वेंद्र सिंह के नाम से एक सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए एक पोस्ट सामने आई। इस पूरे मामले में शुक्रवार को दिनभर क्या-क्या घटनाक्रम हुआ, विस्तार से जानिए।
सुबह विश्वेंद्र सिंह ने की भावुक पोस्ट
विश्वेंद्र सिंह के नाम से जारी पोस्ट में लिखा कि पार्टी में व्याप्त चाटुकारिता, चापलूसी की परंपरा और गलत नीतियों के कारण उनका ‘दम घुट रहा था’। उन्होंने लिखा, ‘दम घुटने से मरने के बजाय स्वाभिमान की मौत मरना बेहतर है’।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पुरखों ने कभी गलत चीजों और स्वाभिमान से समझौता नहीं किया, इसलिए वे ऐसी कार्यप्रणाली के साथ कदमताल नहीं कर सकते।
दिनभर की अटकलों के बाद विश्वेंद्र सिंह ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से कोई औपचारिक त्यागपत्र नहीं दिया है, बल्कि कांग्रेस आलाकमान को अपनी पीड़ा बताते हुए इस्तीफे के संकेत दिए थे।
उन्होंने कहा कि- पार्टी के लिए जीवन देने वाले वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर कुछ ‘छुटभैये और पैराशूट नेताओं’ को तवज्जो दी जा रही है, जिससे उनके कार्यकर्ताओं में भारी रोष है।

दोपहर में मान-मनौव्वल की अटकलें
सूत्रों के मुताबिक, पूरे विवाद के बीच कांग्रेस के कुछ नेताओं की ओर से विश्वेंद्रसिंह से मान-मनौव्वल और जल्दबाजी में कोई कठोर कदम उठाने के बजाय आलाकमान के रुख का इंतजार करने की बात की जा रही थी। इस समझाइश के बाद ही माना जा रहा था कि विश्वेंद्र सिंह के तेवर कुछ नरम हुए।
शाम को अनुशासन समिति ने जारी किया नोटिस
देर शाम कांग्रेस की अनुशासन समिति के चेयरमैन उदयलाल आंजना की ओर से विश्वेंद्र सिंह के नाम 8 बिंदुओं को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 7 दिन में जवाब मांग लिया गया। जिसमें लिखा गया कि, जिलाध्यक्ष डीग एवं जिलाध्यक्ष भरतपुर की ओर से प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजी गई शिकायत के आधार पर ये नोटिस जारी किया गया है।

सवाल-2: विश्वेंद्र सिंह की नाराजगी का असली कारण क्या है और PCC चीफ डोटासरा पर क्या आरोप लगाए?
जवाब: कांग्रेस नेता विश्वेंद्र सिंह का गुस्सा अचानक नहीं फूटा है। बल्कि भरतपुर और डीग जिले में निकाय चुनावों के शर्मनाक प्रदर्शन के बाद से ही वे प्रदेश संगठन पर हमलावर थे। उनकी नाराजगी की 3 बड़ी वजहें हैं।
1. निकाय चुनाव में हार और गलत टिकट वितरण: शहरी निकाय चुनाव में भरतपुर और डीग जिले में कांग्रेस का एक भी बोर्ड नहीं बनने पर विश्वेंद्र सिंह ने हार के लिए डोटासरा और भरतपुर जिलाध्यक्ष व डीग जिलाध्यक्ष को जिम्मेदार बताया था। उन्होंने कहा था- प्रदेश अध्यक्ष मूक-बधिर बनकर बैठे हैं। वहीं कांग्रेस सूत्रों का दावा है कि, निकाय चुनाव के लिए विश्वेंद्र सिंह और स्थानीय टीम को ही अधिकृत किया गया था और सिंबल भी उन्हीं की सिफारिश पर जारी किए गए।
2. भर्ती घोटालों और डोटासरा के परिवार पर निशाना: विश्वेंद्र सिंह ने सियासी जंग को व्यक्तिगत आरोपों तक भी पहुंचा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि गोविंद डोटासरा के शिक्षा मंत्री रहते REET भर्ती परीक्षा में धांधली हुई और उनके बेटे-बहू और रिश्तेदारों को RAS साक्षात्कार में कथित तौर पर समान 80-80 अंक दिलवाकर नियमों का उल्लंघन किया गया। उन्होंने इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। हालांकि इस मामले में वहीं कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष पर लगाए आरोपों और मनमुटाव से जुड़े सवाल पर डोटासरा ने मतभेद की बात खारिज करते हुए इसे भाजपा का टूलकिट और दुष्प्रचार बताया।
3. निष्कासन की आहट से पहले आक्रामक दांव: अंदरखाने की खबरों के अनुसार, पिछले कुछ समय से विश्वेंद्र सिंह की बयानबाजी से नाराज होकर प्रदेश संगठन उनके खिलाफ अनुशासनहीनता की कार्रवाई या निष्कासन की तैयारी कर रहा था। इस गाज के गिरने से पहले ही विश्वेंद्र सिंह ने इस्तीफे के संकेत का दांव खेलकर बढ़त बनाने की कोशिश की।
सवाल-3: पूर्व राजपरिवार के मुखिया विश्वेंद्र सिंह का राजनीतिक इतिहास और भरतपुर में कितना दबदबा है? जवाब: भरतपुर के पूर्व महाराजा बृजेंद्र सिंह के पुत्र विश्वेंद्र सिंह को स्थानीय राजनीति में ‘राजा जी’ के नाम से जाना जाता है। पूर्वी राजस्थान के जाट समुदाय और मेवात-मत्स्य क्षेत्र में उनका गहरा राजनीतिक असर माना जाता है।
3 बार सांसद और विधायक: वे जनता दल, बीजेपी और कांग्रेस तीनों प्रमुख धाराओं से राजनीति कर चुके हैं। वे 1989, 1999 और 2004 में लोकसभा सांसद रहे और 1993 में नदबई, 2013 व 2018 में डीग-कुम्हेर सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए।
कैबिनेट मंत्री का पद: अशोक गहलोत सरकार में वे पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन कैबिनेट मंत्री रहे हैं।
2020 मानेसर संकट के प्रमुख चेहरे: 2020 में जब सचिन पायलट खेमे ने गहलोत सरकार के खिलाफ बगावत की थी, तब विश्वेंद्र सिंह पायलट के साथ मानेसर में डटे थे। इसके बाद उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त भी कर दिया गया था, हालांकि बाद में उनका पुनरुद्धार हुआ।
2024 लोकसभा चुनाव में प्रभाव: 2024 के लोकसभा चुनाव में भरतपुर (सुरक्षित) सीट से कांग्रेस प्रत्याशी संजना जाटव की जीत में विश्वेंद्र सिंह के सियासी दबदबे की अहम भूमिका मानी जाती है।
सवाल-4: इस पूरे विवाद और उथल-पुथल का राजस्थान की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा? जवाब: पंचायत राज चुनावों से ठीक पहले विश्वेंद्र सिंह का आक्रामक रुख कांग्रेस के लिए बड़ा सिरदर्द बन गया है।
पूर्वी राजस्थान में वोट बैंक का गणित: भरतपुर, डीग, करौली और धौलपुर बेल्ट में जाट वोटबैंक पर विश्वेंद्र सिंह की मजबूत पकड़ है। यदि वे ऐसे समय पर पार्टी से अलग होते हैं या निष्क्रिय होते हैं तो कांग्रेस का यह मजबूत गढ़ कमजोर पड़ सकता है।
गुटबाजी का नया दौर: विधानसभा चुनाव में हार के बाद से शांत दिख रही राजस्थान कांग्रेस में पायलट समर्थकों और डोटासरा/गहलोत खेमे के बीच की पुरानी खींचतान एक बार फिर सतह पर आ गई है।

सवाल-5: इस पूरे विवाद पर क्या बोले कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा? जवाब: विश्वेंद्र सिंह के रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा-
उनके इस्तीफे की मुझे आधिकारिक जानकारी नहीं है। ‘विश्वेंद्र सिंह, हमारी पार्टी के बेहद वरिष्ठ नेता हैं, मैं खुद उनकी सरकार में राज्य मंत्री रहा हूं और वे मुझे छोटा भाई मानते हैं। हम सोशल मीडिया के बयानों पर कोई राय नहीं बना सकते।’
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी मुद्दे पर जल्दबाजी में फैसला नहीं लिया जाएगा। ‘मैं प्रदेशाध्यक्ष हूं; मुझे कार्यकर्ता-नेताओं की भावनाएं, जिलाध्यक्षों और क्षेत्र के अन्य वरिष्ठ नेताओं की राय भी समझनी होगी।
उनकी जो भी बात होगी, उसे पूरी गंभीरता से सुना जाएगा।’ साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हाल के घटनाक्रम से पहले उन्होंने कभी भी उनसे संगठन की नियुक्तियों या टिकट वितरण को लेकर व्यक्तिगत रूप से कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी।
सवाल-6: भाजपा प्रदेशाध्यक्ष का बड़ा बयान, क्या बोले? जवाब: पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह के कांग्रेस से इस्तीफे के संकेतों पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कड़ा हमला बोला है। राजसमंद पहुंचे एक कार्यक्रम में मदन राठौड़ ने कहा- ‘कांग्रेस अब पूरी तरह बिखर रही है और चार धड़ों में बंट चुकी है। पहले सचिन पायलट को बाहर का रास्ता दिखाया गया, और अब पार्टी के निष्ठावान नेता खुद किनारे हो रहे हैं।’
नोटिस के बाद फिर विश्वेंद्र सिंह के तल्ख तेवर…
कांग्रेस की ओर से मिले नोटिस के बाद विश्वेंद्र सिंह के सोशल मीडिया हैंडल से फिर शुक्रवार देर शाम एक पोस्ट की। जिसमें उदयलाल आंजना को संबोधित करते हुए लिखा गया कि, पहले आपके नोटिस का जवाब देना चाहिए या पीसीसी चीफ का उनको लेकर दिए बयान पर कोई प्रतिक्रिया। वो मुझे अपने बड़े भाई के रूप में देख रहे हैं, दूसरी ओर आपकी कारगुजारी सामने है.. आप अपनी कार्यवाही के लिए स्वतंत्र हैं और मैं राजनीतिक भविष्य को लेकर स्वतंत्र हूं। मैं हमेशा मर्यादा और अनुशासन में रहा हूं। उम्र के इस पड़ाव पर शायद मुझे किसी की नसीहत की जरूरत नहीं है।


