UGC के नए नियमों के खिलाफ श्रीराजपूत करणी सेना ने मोर्चा खोल रखा है। दो दिन पहले पैदल मार्च के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया। प्रदर्शन में शामिल एक युवक की कथित मौत होने के बाद सियासी बवाल मच गया।
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आखिर UGC के नए नियमों में ऐसा क्या है कि सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद सवर्ण संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। इस आंदोलन का राजस्थान की सियासत पर क्या असर पड़ेगा, क्या इसकी टाइमिंग अगले पंचायत-निकाय चुनाव पर असर डालेगी?
आज के राजस्थान एक्सप्लेनर में समझिए इस विरोध की असली वजह और सियासी मायने…
सवाल-1 : UGC के नए नियम क्या हैं, जिन्हें रोल बैक (वापसी) की मांग उठ रही है?
जवाब- यूनिवर्सिटीज और उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने और ‘समानता का अधिकार’ सुनिश्चित करने का तर्क देते हुए UGC ने नए नियमों का नोटिफिकेशन जारी किया था।
कैंपस में SC-ST, ओबीसी के किसी छात्र के साथ जातिगत भेदभाव पर आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया था।
इसके पीछे तर्क था कि वंचित तबके के स्टूडेंट्स के खिलाफ जातीय भेदभाव और उत्पीड़न रोकने के प्रावधानों को पहले से और ज्यादा सख्त बनाया है। इन नियमों पर सवर्ण संगठनों को आपत्ति है।

UGC रोल बैक और सवर्ण समाज की विभिन्न मांगों को लेकर 3 अगस्त को जयपुर में रैली निकाली गई थी।
सवाल-2 : श्री राजपूत करणी सेना और सवर्ण संगठनों को आपत्ति क्यों है?
जवाब- श्री राजपूत करणी सेना और दूसरे सवर्ण संगठनों का आरोप है कि यूजीसी के नए नियम भेदभाव वाले हैं, इनका दुरुपयोग होगा और बिना वजह सामाजिक स्तर पर विवाद होंगे। दावा है कि नियमों की संरचना ऐसी है कि शिकायत मिलते ही सवर्ण समाज के छात्र को बिना पक्ष सुने दोषी मान लिया जाएगा।
सवाल-3 : एससी-एसटी उत्पीड़न का कानून पहले से, नए प्रावधानों में एसा क्या है जो मुश्किलें बढ़ाने वाला?
जवाब- सवर्ण संगठनों का कहना है अगर SC-ST के किसी भी व्यक्ति या स्टूडेंट के साथ कहीं भी जातीय उत्पीड़न होता है तो इसके खिलाफ पहले से ही कड़ा कानून है।
SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज होता है। कॉलेज यूनिवर्सिटी कैंपस में एंटी रैंगिंग के लिए पहले से प्रावधान है। कैंपस में SC-ST और ओबीसी के स्टूडेंट्स से जातीय उत्पीड़न रोकने के नाम पर ऐसे प्रावधान कर दिए हैं, जिनका मिसयूज होना तय है। तर्क है कि
- कैंपस में जातीय उत्पीड़न की अगर कोई झूठी या फर्जी शिकायत करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई का कोई सख्त प्रावधान नहीं है।
- झूठी शिकायत के बाद किसी सवर्ण स्टूडेंट का एडमिशन कैंसिल हुआ, उसकी पढ़ाई छूटी तो किसकी जिम्मेदारी होगी? उसकी पढ़ाई और करियर पर बुरा असर पड़ना तय है।
- श्रीराजपूत करणी सेना के पदाधिकारियों ने इन नियमों की तुलना अंग्रेजों के जमाने के ‘रोलेट एक्ट’ से करते हुए कहा कि इसमें न वकील, न दलील और न अपील की जगह छोड़ी गई है।

जयपुर में सोमवार को प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट की तरफ बढ़े तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर खदेड़ दिया था।
सवाल-4 : UGC के नए नियमों की कानूनी स्थिति क्या है, क्या ये अभी लागू हैं?
जवाब- 13 जनवरी 2026 को नियमों को अधिसूचित किए जाने के तुरंत बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को यूजीसी के नए नियमों को लागू करने पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
फिलहाल कैंपस में उत्पीड़न रोकने के 2012 के पुराने नियम ही लागू हैं। करणी सेना सहित सवर्ण संगठन यूजीसी के नियमों को सरकारी स्तर पर वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
उनका तर्क है कि जिस दिन सुप्रीम कोर्ट से रोक हटी, ये नियम फिर लागू हो जाएंगे, ऐसे में सरकारी स्तर से इन्हें कानूनी रूप से वापस लिया जाना जरूरी है।

सवाल-5 : राजस्थान की सियासत पर इसका क्या असर पड़ेगा?
जवाब- सवर्ण जातियों का राजस्थान में बड़ा वोट बैंक है। सत्ताधारी पार्टी बीजेपी का ये परंपरागत वोट बैंक माना जाता है। जयपुर में आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज के बाद कई सवर्ण संगठनों ने नाराजगी जताई है।
राजपूत संगठनों इसके विरोध में सोशल मीडिया पर मुहिम छेड़ रखी है। राजस्थान में आगे पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनाव होने वाले हैं।
इन चुनावों में किसी भी प्रकार के डैमेज कंट्रोल के लिए सत्ताधारी पार्टी के नेताओं ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वसुंधरा राजे सरकार के वक्त आनंदपाल एनकाउंटर के बाद इसी तरह की नाराजगी के सुर उठे थे।
उस वक्त बीजेपी के खिलाफ माहौल बनाया गया था, अगर डेमेज कंट्रोल नहीं किया तो वही चैप्टर फिर से दोहराया जा सकता है।

आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान वाटर कैनन की बौछार से घायल होने के बाद देवराज की हॉस्पिटल में मौत हो गई।
सवाल-6 : श्री राजपूत करणी सेना का अब आगे क्या रुख रहेगा?
जवाब- लाठीचार्ज और UGC के नए नियमों के खिलाफ श्रीराजपूत करणी सेना ने जयपुर बंद और सीएम हाउस के घेराव की चेतावनी दे रखी है। सवर्ण संगठनों की मांग है कि UGC रेगुलेशन के नए नियम पूरी तरह वापिस हो।
कैंपस में जातीय उत्पीड़न की शिकायत की निष्पक्ष जांच हो। झूठी शिकायत कराने वाले पर भी बराबर कार्रवाई हो। उच्च शिक्षण संस्थानों में सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकारों के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस, संरक्षण तय किया जाए।

सवाल-7 : दिल्ली में जेन-जी आंदोलन और टाइमिंग के पीछे क्या कोई रणनीति है?
जवाब- दिल्ली में जेन-जी आंदोलन की सफलता के बाद UGC गाइडलाइन के खिलाफ इस मुहिम के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। यूजीसी गाइडलाइन के विरोध से सवर्ण स्टूडेंट को भावनात्मक रूप से जोड़ने का अभियान शुरू किया गया है।
इसकी टाइमिंग भी अहम है, श्रीराजपूत करणी सेना ने ऐसे वक्त में मुहिम शुरू की है, जब राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव होने वाले हैं।
दूसरे राज्यों में भी सवर्ण संगठन यूजीसी गाइडलाइंस के रोलबैक की मांग पर एकजुट हो रहे हैं। यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजस्थान और देश के सियासी नरेटिव को बदल सकता है।
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