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Rakshabandhan Gift Ideas | N Raghuraman Column on Strengthening Bonds


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58 मिनट पहले

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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

जब कोई पंडित आपसे हाथ धुलवाता है, हथेली में अक्षत रखता है, मुट्‌ठी बंद करने को कहता है और मंत्र जाप करते हुए आपकी कलाई पर लाल-पीला धागा बांधता है, तो यह 10 रुपए के बदले होने वाली दो मिनट की रस्म नहीं है। वह उस साधारण सूती धागे को एक अर्थ दे रहा होता है।

यह धागा इस बात की याद दिलाने के लिए है कि आपने एक आध्यात्मिक रिश्ता स्वीकार किया है। यह एक रिमाइंडर है कि आपके कर्म, शब्द और विचार तक उन चीजों से दूर रहें, जिन्हें शास्त्र अपवित्र मानते हैं। यह एक प्रतीकात्मक रिमाइंडर है कि जब आप ईश्वर में आस्था रखते हैं तो उस आस्था के साथ अपने अंतर्मन को पवित्र रखने की जिम्मेदारी भी आती है।

शायद यही वजह है कि हमारी परंपराओं में धागे का इतना शक्तिशाली स्थान है। धागा सिर्फ कलाई को नहीं बांधता, वह श्रद्धालु की आत्मा को उस धारणा से बांधता है कि जिस आध्यात्मिक रिश्ते को उसने स्वीकार किया है, उसे निभाने के योग्य भी बने रहना है।

राखी भी इसी विचार को अलग रूप में सामने लाती है। जब एक बहन भाई की कलाई पर धागा बांधती है तो वह सिर्फ त्योहारी रस्म नहीं निभा रही होती। वह प्यार, जिम्मेदारी और अपनेपन का ऐसा रिश्ता बना रही होती है, जो धागे के बेरंग होने और घिस जाने के बाद भी उसके साथ रहेगा। धागा भले ही सूती, रेशमी, चांदी या सोने का हो- जैसा कि आजकल होने लगा है- लेकिन उसकी असली कीमत उन दो लोगों के बीच बने अदृश्य रिश्ते में है।

अगर दोस्तों से सुनी बात कोई संकेत है तो कम से कम लखनऊ में तो इस धागे में कीमती बदलाव हो रहे हैं। इस साल शहर के बाजारों में एक खास बदलाव दिख रहा है। बाजार में साधारण सूती धागों और कार्टून राखियों से लेकर सोने, चांदी, हीरों से जड़ी राखियां, म्यूजिकल बैंड, पर्सनलाइज्ड ब्रेसलेट, बहनों के लिए लुंबा और पेड़ों पर बांधी जाने वाली राखियां तक उपलब्ध हैं।

जो कभी एक छोटी-सी रस्म का धागा होता था, वह अपनेपन, इन्डिविजुअलिटी और बदलते पारिवारिक रिश्तों को जताने का जरिया बन गया है। जिस तरह एक बहन अपने प्यार के इजहार को ज्यादा रचनात्मक, कीमती और व्यक्तिगत बना रही है, शायद वैसे ही उसके प्रति गर्मजोशी जताने के हमारे तरीके में भी बदलाव की जरूरत है।

क्यों न इस रक्षाबंधन उसे ऐसी चीज दी जाए, जो मिठाइयां खा लिए जाने और तस्वीरें भुला दिए जाने के काफी बाद तक उसकी रक्षा करे? यह मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी हो सकती है, जो गंभीर बीमारी की सूरत में उसके परिवार के लाखों रुपए बचाए। हममें से कोई नहीं चाहता कि वह कभी बीमार हो, लेकिन जिम्मेदारी भरे प्रेम को इसके लिए तैयार रहना जरूरी है।

यह उसके नाम पर किया कोई निवेश हो सकता है। उसके रिटायरमेंट फंड में दिया गया योगदान हो सकता है। उस प्रोफेशनल कोर्स की फीस हो सकती है, जिसे उसने पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते टाल दिया था। उस सपने के लिए रखी रकम हो सकती है, जिसे उसने दूसरों की अधिक जरूरी जरूरतों के लिए चुपचाप छोड़ दिया हो।

कुछ परिवार ऐसे प्रिकॉशनरी इन्वेस्टमेंट में भरोसा नहीं रखते होंगे, क्योंकि यह पारंपरिक बचत जैसे नहीं दिखते। मसलन, इंश्योरेंस ऐसी चीज लग सकती है, जिस पर हम ऐसा पैसा खर्च कर रहे हैं, जिसके इस्तेमाल की उम्मीद हम कभी नहीं करते। लेकिन इसकी खूबसूरती भी यही है।

कभी-कभी सबसे अच्छा तोहफा वही होता है, जिसके लिए हम प्रार्थना करते हैं कि पाने वाले को इसके इस्तेमाल की जरूरत कभी न पड़े। एक भाई कह सकता है कि ‘इस साल मैं तुम्हें सिर्फ अपनी याद नहीं दे रहा, एक ऐसा साथ भी दे रहा हूं, जो मेरे दूर होने पर भी तुम्हारे पास रहेगा।’

फंडा यह है कि आज जब बहन आपकी कलाई पर धागा बांधे तो याद रखिए कि इसका संदेश हमेशा यही रहा है कि ‘तुम मेरे लिए मायने रखती हो।’ आज की दुनिया में शायद इस संदेश को कीमती बदलाव की जरूरत है कि ‘तुम मेरे लिए पहले से ज्यादा मायने रखती हो और मैं कुछ ऐसा करूंगा, जिससे तुम्हारा कल ज्यादा सुरक्षित, खुशहाल और मजबूत बने।’

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