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Supreme Court Notice to Centre & Election Commission on CEC Immunity


नई दिल्ली5 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को कानूनी कार्रवाई से छूट देने वाले 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को सुनवाई की।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। NGO एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने कानून की धारा 16 को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है।

इस धारा के तहत आधिकारिक कामकाज के दौरान किए गए कुछ कार्यों, दिए गए बयानों और फैसलों के लिए CEC और ECs को सिविल और आपराधिक कार्रवाई से छूट मिलती है।

जनवरी में धारा 16 पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था

इस साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने CEC और ECs को धारा 16 के तहत मिली छूट को चुनौती देने वाली एक दूसरी याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी थी।

यह याचिका NGO लोक प्रहरी ने दायर की थी। तब कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब मांगा था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उस समय धारा 16 पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

याचिका में दावा किया गया था कि यह प्रावधान CEC और ECs को अपने पद के गंभीर दुरुपयोग और गलत कामों के लिए जीवनभर की पूरी छूट देता है।

याचिका के मुताबिक, इससे CEC और ECs को “अभूतपूर्व और बेलगाम शक्ति” मिलती है। यह छूट सिविल और आपराधिक, दोनों तरह की कार्यवाही से है।

नया कानून सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन

कांग्रेस कार्यकर्ता जया ठाकुर ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि धारा 7 और 8 स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांत का उल्लंघन है क्योंकि यह चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति के लिए स्वतंत्र तंत्र प्रदान नहीं करता है।

याचिका में यह कहा भी गया है कि यह कानून सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2023 के फैसले को पलटने के लिए बनाया गया, जिसने CEC और EC को एकतरफा नियुक्त करने की केंद्र सरकार की शक्तियां छीन ली थीं।

यह वो प्रथा है जो देश की आजादी के बाद से चली आ रही है।

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