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अमेरिका के शिकागो में रहने वाले 91 साल के रैल्फ रेह्बॉक और 82 साल के ली स्टाइनमैन उम्रदराज जरूर हैं, लेकिन उनकी याददाश्त और ऊर्जा आज भी कई युवाओं जैसी है। वैज्ञानिक इन्हें ‘सुपर-एजर’ कहते हैं, यानी 80 की उम्र पार करने के बाद भी जिनकी मेमोरी उनसे काफी कम उम्र के लोगों जैसी तेज रहती है। नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स पिछले 25 साल से ‘सुपर-एजर’ पर काम कर रहे हैं। हाल ही में इस पर एक नया रिसर्च पेपर भी सामने आया है। स्टडी के मुताबिक इन लोगों की लाइफस्टाइल, खानपान या दिनचर्या में कोई एक जैसा पैटर्न नहीं मिलता, लेकिन एक बात लगभग सभी में कॉमन है। ये लोग मिलनसार होते हैं और रिश्तों को बहुत अहमियत देते हैं। सामाजिक सक्रियता से बुजुर्गों के दिमाग पर उम्र का असर कम, अकेलेपन से नुकसान का खतरा एक्सपर्ट्स के मुताबिक सोशल तौर पर एक्टिव रहने से दिमाग की कोशिकाओं का क्षरण धीमा होता है। वहीं अकेलापन तनाव का हार्मोन बढ़ाता है, जो दिमाग को नुकसान पहुंचा सकता है। इसी वजह से इन बुजुर्गों का दिमाग का आकार भी उनकी असली उम्र के बजाय ज्यादा युवा लोगों जैसा पाया गया।
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अमेरिका में ‘सुपर-एजर’ पर रिसर्च:तेज याददाश्त का सबसे बड़ा राज मिलनसार स्वभाव और रिश्ते
