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राजस्थान हाईकोर्ट ने बड़ी सादड़ी तहसील क्षेत्र में औद्योगिक अपशिष्ट डंप किए जाने के आरोपों पर संबंधित भूमि की जांच के निर्देश दिए हैं। यह निर्देश रणजीत सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए गए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की दरीबा माइंस/स्मेल्टिंग यूनिट से निकलने वाले औद्योगिक कचरे को स्कूलों के खेल मैदानों, कृषि भूमि, खुली जमीन और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर डंप किया गया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने इस मामले में नोटिस जारी किए। कोर्ट ने तहसीलदार और संबंधित अधिकारी को प्रभावित भूमि से मिट्टी के नमूने लेने का निर्देश दिया। इन नमूनों को राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के समक्ष परीक्षण के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है। 9 सितंबर 2026 को अगली सुनवाई हाईकोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण मंडल को नमूनों की जांच कर अगली सुनवाई से पहले अदालत में रिपोर्ट पेश करने को कहा है। याचिका में यह भी कहा गया है कि अपशिष्ट हटाने के बावजूद उसके अवशेष मिट्टी और भूजल को प्रभावित कर सकते हैं। याचिकाकर्ता ने प्रभावित क्षेत्रों की वैज्ञानिक जांच और पर्यावरणीय बहाली की मांग की है। कोर्ट ने मामले के शेष प्रतिवादियों को भी नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अदिति मोड़ ने पैरवी की।
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औद्योगिक कचरा डंपिंग, हाईकोर्ट ने जांच के दिए निर्देश:हिंदुस्तान जिंक पर लगे आरोपों पर सुनवाई, 9 सितंबर को अगली सुनवाई
