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किसान मोबाइल पर बुक कर सकेंगे ट्रैक्टर-कृषि यंत्र:खेतों तक पहुंचाएगी कंपनी, घंटों के हिसाब से लगेगा किराया; जानिए स्कीम की पूरी जानकारी




अब राजस्थान के किसान ट्रैक्टर, रोटावेटर और दूसरे कृषि यंत्र मोबाइल से बुक कर घर बैठे किराए पर मंगा सकेंगे। कृषि विभाग ने किसानों को रेंट पर ट्रैक्टर और खेती के औजार देने वाली कंपनी टैफे की जेफार्म सर्विसेज के साथ हाल ही में एमओयू साइन किया है। यह रेंटल सर्विस पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अवेलेबल रहेगी, ताकि किसानों को कस्टम हायरिंग सेंटर (ट्रैक्टर और यंत्र के लिए बनाए सेंटर) तक नहीं जाना पड़े। खास बात ये है कि इसके लिए कोई अलग से चार्ज नहीं देना पड़ेगा। केवल घंटों के हिसाब से जो किराया तय हुआ है, वही लगेगा। बता दें राज्य सरकार ने प्रदेशभर में 1075 कस्टम हायरिंग सेंटर खोलने की घोषणा की थी, जहां से किसानों को रेंट पर ट्रैक्टर और कृषि यंत्र मिल सकें। हालांकि अभी तक 200 सेंटर ही खुल पाए हैं। कैसे यह सर्विस किसानों को मिलेगी? कितना किराया होगा? कैसे बुकिंग कर सकेंगे? मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए ऐसे ही सवालों के जवाब… सवाल : कस्टम हायरिंग सेंटर क्या है? जवाब : यह कृषि यंत्रों का एक बैंक है, जहां ट्रैक्टर, रोटावेटर, सीड ड्रिल, रीपर, मल्चर, स्ट्रॉ रीपर, स्प्रे मशीन समेत अन्य आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध रहते हैं। किसान इन्हें तय किराए पर लेकर खेती कर सकते हैं। सवाल: इसका सबसे बड़ा फायदा किसे मिलेगा? जवाब: लघु और सीमांत किसानों को, जो लाखों रुपए खर्च कर कृषि यंत्र खरीदने में सक्षम नहीं हैं। हालांकि इस सुविधा का लाभ अन्य किसान भी ले सकेंगे। सवाल: किसान इस योजना से कैसे जुड़ेगा? जवाब: किसान कस्टम हायरिंग सेंटर एप, जेफार्म सर्विसेज प्लेटफॉर्म या राज किसान साथी पोर्टल के माध्यम से अपने नजदीकी केंद्र पर उपलब्ध कृषि यंत्रों की जानकारी लेकर ऑनलाइन बुकिंग कर सकेगा। सवाल: क्या ऑनलाइन बुकिंग करना जरूरी होगा? जवाब: सरकार का उद्देश्य सभी सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना है। जहां डिजिटल सुविधा उपलब्ध होगी, वहां किसान एप या पोर्टल के माध्यम से बुकिंग कर सकेंगे। स्थानीय स्तर पर हायरिंग सेंटर पर भी संपर्क कर यह सुविधा ली जा सकेगी। सवाल: किसान को कौन-कौन से कृषि यंत्र मिलेंगे? जवाब: ट्रैक्टर, रोटावेटर, सीड-कम-फर्टिलाइजर ड्रिल, रीपर, मल्चर, स्ट्रॉ रीपर, हैप्पी सीडर, स्प्रे मशीन, पावर टिलर सहित विभिन्न आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। उपलब्धता केंद्र और वहां की डिमांड के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। सवाल: किराया कौन तय करेगा? जवाब: कृषि यंत्रों का किराया निर्धारित नियमों और स्वीकृत दरों के अनुसार लिया जाएगा, ताकि किसानों से मनमाना शुल्क न वसूला जा सके। सवाल : ऑनलाइन बुकिंग के बाद किसान तक कृषि यंत्र कैसे पहुंचेगा? जवाब : किसान सबसे पहले कस्टम हायरिंग सेंटर एप, जेफार्म सर्विसेज प्लेटफॉर्म या राज किसान साथी पोर्टल पर अपने नजदीकी कस्टम हायरिंग सेंटर में उपलब्ध कृषि यंत्र की ऑनलाइन बुकिंग करेगा। बुकिंग कन्फर्म होने के बाद संबंधित कस्टम हायरिंग सेंटर के संचालक तय तारीख और समय के अनुसार कृषि यंत्र किसान तक उपलब्ध कराएगा। जरूरत और स्थानीय व्यवस्था के अनुसार मशीन किसान के खेत तक पहुंचाई जा सकती है या फिर किसान उसे केंद्र से प्राप्त कर सकता है। बुकिंग से लेकर मशीन उपलब्ध कराने तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित होगी, ताकि किसानों को समय पर और पारदर्शी तरीके से कृषि यंत्र उपलब्ध हो सकें। सवाल: कस्टम हायरिंग सेंटर कौन खोल सकता है? जवाब: प्रगतिशील किसान, ग्रामीण उद्यमी, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), ग्राम सेवा सहकारी समितियां, क्रय-विक्रय सहकारी समितियां और राजीविका से जुड़े क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। सवाल: सेंटर खोलने पर सरकार कितनी आर्थिक सहायता देती है? जवाब: परियोजना लागत का अधिकतम 40 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। सवाल: सेंटर खोलने के लिए क्या बैंक से ऋण लेना जरूरी है? जवाब: 25 लाख रुपए तक की परियोजना के लिए बैंक ऋण अनिवार्य नहीं है। 25 लाख रुपए से अधिक की परियोजना में बैंक ऋण लेना जरूरी होगा। सवाल: सेंटर के लिए आवेदन कहां किया जा सकता है? जवाब: संबंधित जिले के उपनिदेशक कृषि कार्यालय में आवेदन किया जा सकता है। सवाल: एमओयू के बाद क्या बदलेगा? जवाब: जेफार्म सर्विसेज और कृषि विभाग के एमओयू के बाद कस्टम हायरिंग सेंटर्स को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इससे किसान ऑनलाइन मशीन खोज सकेंगे, बुकिंग कर सकेंगे और पारदर्शी तरीके से सेवाएं प्राप्त कर सकेंगे। घर बैठे ही सुविधा मिल जाएगी। बीते साल का टारगेट 80 प्रतिशत अधूरा यह डिजिटल मॉडल कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) पर आधारित है। यानी वही केंद्र, जहां ट्रैक्टर, रोटावेटर, रीपर, सीड ड्रिल जैसी मशीनें रखी जाती हैं और किसान उन्हें किराए पर लेते हैं। लेकिन सीएचसी स्थापित करने की रफ्तार बहुत धीमी है। सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि वर्ष 2024-25 तक राज्य में 2,159 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं। इसके बाद वर्ष 2025-26 और 2026-27 में कुल 1,075 नए केंद्रों को स्वीकृति दी गई, ताकि यह सुविधा हर क्षेत्र तक पहुंच सके। लेकिन हकीकत यह है कि इन 1,075 स्वीकृत केंद्रों में से अब तक सिर्फ 200 ही धरातल पर उतर पाए हैं। यानी करीब 875 केंद्र अभी भी कागजों और प्रक्रिया में अटके हुए हैं। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि राजस्थान के छोटे व सीमांत किसानों को कृषि यंत्रीकरण और डिजिटल सेवाएं अधिक आसानी से उपलब्ध होंगी। इससे ट्रैक्टर और उपकरण किराया इकोसिस्टम मजबूत होगा और राज्य में कृषि विकास को गति मिलेगी।



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