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कम बारिश का असर अब शहर की पेयजल आपूर्ति पर दिखने लगा है। इस सीजन में इंदौर में औसत से करीब 14 इंच कम (मात्र 23 इंच) बारिश हुई है, जिससे शहर की प्यास बुझाने वाले प्रमुख जलस्रोत यशवंत सागर और बिलावली तालाब अपनी पूरी क्षमता तक नहीं भर पाए हैं।
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यशवंत सागर, जिससे रोजाना शहर की 6 पानी की टंकियां भरी जाती हैं, अपनी 19 फीट की कुल क्षमता के आंकड़े को इस बार छू भी नहीं सका है।
आमतौर पर फरवरी-मार्च में महसूस होने वाली पानी की किल्लत की आहट इस बार दिसंबर-जनवरी में ही शुरू होने की आशंका है। स्मार्ट सिटी कार्यालय में नगरीय प्रशासन विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे और निगमायुक्त क्षितिज सिंघल की उपस्थिति में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शहर की पेयजल स्थिति की समीक्षा की।
जलसंकट से निपटने यह उपाय किए जाएंगे
1. आपातकालीन रीफिलिंग करना होगी नवंबर से अप्रैल के बीच यशवंत सागर और बिलावली तालाब को कम से कम दो बार नर्मदा नदी के पानी से भरा जाएगा। इसके लिए नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण से चर्चा की गई है, जिस पर सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है।
2. विशेष पैकेज की मांग महापौर ने राज्य सरकार से इस अतिरिक्त जल आपूर्ति और प्रबंधन के लिए विशेष वित्तीय पैकेज की मांग की है।
3. नए बोरिंग पर पूरी तरह प्रतिबंध का प्रस्ताव शहर के कई क्षेत्रों में बोरिंगों का जलस्तर तेजी से गिर रहा है। गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए निगमायुक्त ने जिला प्रशासन को पेयजल परिरक्षण अधिनियम के तहत शहर में नए बोरिंग कराने पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रस्ताव भेजा है। निगम के अनुसार, शहर में बड़े पैमाने पर हो रहे नए निर्माण कार्यों में लोग सबसे पहले बोरिंग करवाकर भूजल का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे जलस्तर पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है।
आपात योजना : 800 से अधिक टैंकर और लीकेज पर सख्ती
- जलूद सप्लाय पर निर्भरता : वर्तमान में इंदौर को 70 किलोमीटर दूर स्थित जलूद पंपिंग स्टेशन से रोजाना 430 एमएलडी नर्मदा जल मिल रहा है।
- टैंकरों की संख्या बढ़ेगी : आगामी गर्मियों में पानी की किल्लत वाले इलाकों के लिए टैंकरों की संख्या बढ़ाई जाएगी। पिछले साल 700 से अधिक टैंकर चलाए गए थे, जबकि इस बार 800 से ज्यादा लगेंगे ।
- लीकेज मरम्मत व साप्ताहिक समीक्षा: हर वार्ड में जलापूर्ति की स्थिति की साप्ताहिक समीक्षा होगी। पाइपलाइनों के लीकेज प्राथमिकता के आधार पर सुधारे जाएंगे, ताकि सप्लाय के दौरान पानी की बर्बादी न हो।
- ट्रीटेड वाटर का उपयोग : पेयजल पर दबाव कम करने के लिए टरशरी वाटर प्लांट विकसित किए जा रहे हैं, ताकि निर्माण और अन्य गैर-पेयजल कार्यों में केवल ट्रीटेड वाटर का ही इस्तेमाल किया जा सके।
