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झालावाड़ में जीवित्पुत्रिका (जितिया) पर्व श्रद्धा से मनाया गया। संतान की लंबी उम्र के लिए महिलाओं ने 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा। शनिवार सुबह 7 बजकर 28 मिनट पर व्रत का पारण हुआ।
द्वारकाधीश मंदिर परिसर स्थित तालाब पर उत्तर प्रदेश से आई महिलाओं ने भगवान जीमूतवाहन की पूजा की। उन्होंने विधि-विधान से पूजन कर संतानों के दीर्घायु और सुखी जीवन की कामना की। यह व्रत मातृत्व और संतान के प्रति अटूट प्रेम का प्रतीक है। काशी बनारस से शशि सिंह ने इसे मां के विश्वास का प्रतीक बताया। बलिया की ममता मौर्या (शालू) ने कहा, मां का आशीर्वाद बच्चों के लिए रक्षा कवच है। आजमगढ़ की अंजू सिंह ने बताया व्रत की कथा त्याग और परोपकार का संदेश देती है। यह व्रत भगवान जीमूतवाहन के त्याग और परोपकार की कथा से जुड़ा है। महिलाओं ने पूजा के साथ कथा सुनी और संतानों के लिए प्रार्थना की।
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झालावाड़ में जितिया पर्व पर महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत:संतान की लंबी उम्र के लिए की पूजा, सुबह 7:28 पर व्रत का पारण
