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धर्मशाला में बुधवार को बस अड्डे के समीप मूसलाधार बारिश के कारण हुए लैंडस्लाइड से एकपेड़ जड़ से उखड़ गया और भारी मात्रा में मलबा सड़क पर आ गया। हालांकि घटना के समय क्षेत्र खाली होने और वाहनों को पहले ही हटा दिए जाने से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। लैंडस्लाइड से बस अड्डे के बाहर मुख्य सड़क का सुरक्षा डंगा भी ढह गया है। इससे ऐतिहासिक कांगड़ा कला संग्रहालय, पार्किंग-कम-शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, बहुमंजिला भवनों और निजी होटलों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन ने क्षेत्र की निगरानी बढ़ा दी है और लोक निर्माण विभाग (PWD) को तत्काल सुरक्षा उपाय करने के निर्देश दिए हैं। लगातार बारिश के कारण कांगड़ा घाटी में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ी हैं। लोक निर्माण विभाग ने धर्मशाला, मैक्लोडगंज और आसपास के 22 स्थानों को ‘ब्लैक स्पॉट’ के रूप में चिन्हित किया है। विभाग के अनुसार, बस स्टैंड के पास चल रहे निर्माण कार्य के दौरान हुई खुदाई और जल निकासी की अपर्याप्त व्यवस्था ने पहाड़ी की स्थिरता को प्रभावित किया है, जिससे भू-धंसाव की स्थिति गंभीर हुई है। वैज्ञानिकों ने 26 वर्ष पहले ही दी थी चेतावनी उल्लेखनीय है कि धर्मशाला में बढ़ते लैंडस्लाइड को लेकर वैज्ञानिकों ने लगभग 26 वर्ष पहले ही चेतावनी दी थी। वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिक प्रो. ए.के. महाजन और डॉ. एन.एस. विर्दी ने 1999-2000 के अध्ययन के आधार पर वर्ष 2000 में एक विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। अति संवेदनशील श्रेणी में कई स्थान रिपोर्ट में धर्मशाला के टिराह लाइन, बाराकोठी, काजलोट, जोगीवाड़ा, धियाल, गमरू और चोहला को सक्रिय स्लाइडिंग जोन बताते हुए इन्हें अति संवेदनशील श्रेणी में रखा गया था। विशेषज्ञों ने अनियंत्रित निर्माण, वनों की कटाई, कमजोर ड्रेनेज व्यवस्था और पहाड़ों की अवैज्ञानिक कटाई को भविष्य में बड़े खतरे का कारण बताया था। ‘जोशीमठ जैसे हालात बनने का खतरा’
भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि संवेदनशील क्षेत्रों में वैज्ञानिक तरीके से निर्माण, प्रभावी ड्रेनेज व्यवस्था और ढलानों का संरक्षण सुनिश्चित नहीं किया गया तो धर्मशाला में भी भविष्य में जोशीमठ जैसी स्थिति बनने से इनकार नहीं किया जा सकता। लगातार हो रही बारिश ने इस खतरे को और बढ़ा दिया है। क्या बोले डीसी
“वहां पहले भी भूस्खलन हुआ था, जिसके चलते हमने PWD से तुरंत रिस्टोरेशन कार्य शुरू करने का आग्रह किया था। विभाग ने काम शुरू भी किया था, लेकिन अब उसके आगे दोबारा भूस्खलन हो गया है। इससे ऊपर स्थित परिसंपत्तियों के लिए जोखिम बढ़ गया है। PWD को मौके पर जाकर स्थिति का पुनर्मूल्यांकन करने और तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।”-हेमराज बैरवा, डीसी कांगड़ा
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धर्मशाला बस अड्डे के पास लैंडस्लाइड:मुख्य सड़क का डंगा भी ढहा; कांगड़ा कला संग्रहालय-बहुमंजिला इमारतों पर खतरा
