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पठानकोट की सड़कों पर 130 टन कचरे का बोझ:₹2 करोड़ बकाया पर डीजल सप्लाई बंद; पार्किंग में कूड़ा उठाने वाली 75 गाड़ियां




स्वतंत्रता दिवस के जिला स्तरीय समारोहों से पहले पठानकोट शहर एक बड़े नागरिक संकट की चपेट में आ गया है। नगर निगम पर पेट्रोल पंप मालिक का ₹2 करोड़ से अधिक का बकाया न चुकाए जाने के कारण पंप मालिक ने निगम के सभी सफाई वाहनों की डीजल सप्लाई पूरी तरह ठप कर दी है। इसके चलते 2 दिन से 50 वार्डों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई और प्रतिदिन उठने वाला करीब 65 टन कचरा सड़कों और गलियों में ही पड़ा रहा। 2 दिन में शहर की सड़कों/गलियों पर 130 टन कचरे का बोझ पड़ा है। नगर निगम के कूड़ा उठाने वाले सभी 70 वाहन ओल्ड वेटरनरी अस्पताल परिसर में खड़े रहे। एक तरफ जहां पूरा देश आजादी के जश्न की तैयारियों में जुटा है, वहीं दूसरी ओर पठानकोट शहर की मुख्य सड़कें और बाजार कूड़े के डंपिंग ग्राउंड में तब्दील होते नजर आ रहे हैं। शहर की सफाई व्यवस्था पटरी से उतरी 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस से ठीक 1 दिन पहले शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरने से नागरिकों और दुकानदारों में भारी रोष है। गौरतलब है कि इससे पहले भी 15 से 17 जुलाई तक भुगतान न होने पर पंप मालिक ने तेल की सप्लाई रोकी थी। तब नगर निगम अधिकारियों द्वारा कुछ भुगतान करके मामला शांत कराया गया था, लेकिन एक महीने बाद ही स्थिति फिर वही पहुंच गई है। मुख्य बाजारों में पसरी गंदगी, बदबू से व्यापारी और राहगीर परेशान डीजल नहीं मिलने के कारण सुबह से ही नगर निगम की गाड़ियां फील्ड में नहीं उतर सकीं। इसका सीधा असर शहर के सबसे व्यस्त व्यावसायिक इलाकों पर देखने को मिला। प्रभावित इलाके: गांधी चौक, मेन बाजार, डाकखाना चौक, वाल्मीकि चौक, पटेल चौक और स्टेशन रोड समेत लगभग सभी अंदरूनी गलियों में कचरे के बड़े-बड़े ढेर लग गए। बेसहारा पशुओं का जमावड़ा: बदबू मारते कचरे के ढेरों पर आवारा मवेशी और कुत्ते मुंह मारते दिखाई दिए, जिससे पूरी सड़क पर गंदगी फैल गई। दुकानदारों में रोष: गांधी चौक के स्थानीय दुकानदारों रामपाल विक्की, सिद्धार्थ महाजन, मनिंदर सिंह और अन्य व्यापारियों ने तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि तेज हवाओं के कारण कचरा और प्लास्टिक के लिफाफे उड़कर उनकी दुकानों के अंदर आ रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जब शहर में अधिकारियों व वीआईपी की आवाजाही रहती है, तब ऐसी दुर्दशा प्रशासनिक नाकामी का सबसे बड़ा प्रमाण है। निगम का ईंधन बजट: 70 गाड़ियां और हर महीने 16 हजार लीटर खपत नगर निगम के पास शहर भर से डोर-टू-डोर और सेकेंडरी डंपिंग पॉइंट्स से कचरा उठाने के लिए कुल 70 छोटे-बड़े वाहन मौजूद हैं। दैनिक कचरा निष्पादन: शहर के 50 वार्डों से रोजाना लगभग 65 टन कचरा इकट्ठा करने के लिए 60 व्हीकल और 65 के करीब रेहड़ियां तैनात की गई हैं। वाहनों का दैनिक कोटा: छोटे ऑटो-टिपिंग व्हीकल को 2.5 लीटर, ट्रैक्टर-ट्रॉली को 19 लीटर, हूपर को 5 लीटर तथा बड़े टिप्पर व डंपर प्लेसर को 50 लीटर का रोजाना डीजल कोटा आवंटित होता है। मासिक खर्च: सभी वाहनों को चलाने के लिए औसतन 16 हजार लीटर डीजल प्रतिमाह लगता है, जिसका हर महीने का बिल लगभग ₹14.33 लाख बनता है। पिछले कई महीनों से भुगतान न होने के कारण यह आंकड़ा ₹2 करोड़ के पार पहुंच चुका है। सफाई मजदूर यूनियन की हुंकार: आज निगम गेट पर पार्क करेंगे सभी गाड़ियां अखिल भारतीय सफाई मजदूर यूनियन के पंजाब प्रधान रमेश कुमार गिल ने निगम प्रशासन और उच्च अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि 1 दिन बाद देश का राष्ट्रीय पर्व 15 अगस्त है, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा सफाई सेवकों को भुगतना पड़ रहा है। गिल ने चेतावनी देते हुए कहा कि अधिकारी सफाई सेवकों पर काम का दबाव बनाते हैं, लेकिन जब गाड़ियों में तेल ही नहीं होगा तो काम कैसे होगा? अगर आज और कल में डीजल का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो आज कूड़ा उठाने वाले सभी ऑटो, ट्रैक्टर और टिप्पर नगर निगम के मुख्य गेट के बाहर लाकर खड़े कर दिए जाएंगे और पूर्ण रूप से काम बंद कर धरना दिया जाएगा। ग्रांट मिलने में देरी बनी वजह, जल्द सुलझेगा मामला मामले को लेकर जब नगर निगम के असिस्टेंट कमिश्नर परमजोत सिंह से बात की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि डीजल भुगतान न होने के कारण संकट खड़ा हुआ है। वित्त कमीशन की तरफ से मिलने वाली ग्रांट में देरी होने की वजह से वित्तीय संकट पैदा हुआ है। फंड रिलीज होते ही पेट्रोल पंप मालिक का बकाया चुका दिया जाएगा और जल्द ही सफाई व्यवस्था को पूरी तरह से सुचारू कर लिया जाएगा।



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