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श्रीगंगानगर में सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में विचाराधीन एक मुकदमे में आरोपी की जमानत फर्जी डॉक्यूमेंट से करवाए जाने का मामला सामने आया है। जमानत जब्त होने पर जब जमानती को नोटिस जारी किया गया, तो पूरा फर्जीवाड़ा खुल गया। कोर्ट के रीडर सुनील कुमार सिडाना ने कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज करवाया है। पुलिस के अनुसार- आरोपी अमनदीप सिंह उर्फ योगी पुत्र जगतार सिंह, निवासी 4 बीबी (पदमपुर) की जमानत के लिए सुखराम पुत्र पृथ्वीराज निवासी (लालगढ़ जाटान) के नाम से एक व्यक्ति दस्तावेजों के साथ कोर्ट पहुंचा। उसने आधार कार्ड की फोटोकॉपी, सुखराम के नाम जमीन की जमाबंदी और फोटो पेश की। वकील के सामने हस्ताक्षर किए और अपना मोबाइल नंबर भी लिखवाया। जब अमनदीप सिंह की जमानत जब्त हुई और असली सुखराम को नोटिस गया, तो उन्होंने कहा- मैंने किसी अमनदीप सिंह की जमानत नहीं दी। मैं उसे जानता तक नहीं। उन्होंने बताया कि कागजों पर लगी फोटो उनकी नहीं, बल्कि पड़ोसी राजेन्द्र पुत्र संतराम नायक निवासी (लालगढ़ जाटान) की है। जांच में खुलासा हुआ कि राजेन्द्र ने ई-मित्र से सुखराम का आधार कार्ड निकलवा लिया, जमीन की जमाबंदी भी हासिल कर ली। फिर खुद को सुखराम बताकर कोर्ट में पेश हुआ और फर्जी हस्ताक्षर कर जमानत दिलवा दी। इस मामले में कोर्ट रीडर सुनील सिडाना ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई है। आगे की जांच जारी है।
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पड़ोसी ने फर्जी आधार-जमाबंदी से जमानत दिलवाई, मामला दर्ज:असली जमानती को नोटिस जारी हुआ तो पता चला, जांच में जुटी पुलिस
