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फरीदाबाद में रक्षाबंधन (28 अगस्त) के अवसर पर ओल्ड फरीदाबाद में लगने वाले ऐतिहासिक पंखा मेले की तैयारियां तेज हो गई हैं। करीब 400 साल पुरानी इस परंपरा को लेकर पंखा मेला कमेटी ने पथवारी मंदिर में बैठक आयोजित की। इसमें शहर के विभिन्न समाजों के लोगों ने हिस्सा लिया। बैठक में मेले की तैयारियों और व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा की गई। पंखा मेला कमेटी के प्रधान बिल्ला पहलवान उर्फ जितेश पाराशर ने बताया कि इस बार मेले में अलग-अलग समाजों की 27 झांकियां शामिल होंगी। सभी समाज अपने स्तर पर झांकियां तैयार कर मेले में लेकर पहुंचेंगे। कमेटी की ओर से मेले को भव्य और व्यवस्थित बनाने के लिए तैयारियां की जा रही हैं। महामारी से बचाव के लिए शुरू हुई थी परंपरा बुजुर्गों के अनुसार, करीब 300 वर्ष पहले ओल्ड फरीदाबाद में महामारी फैल गई थी। उस समय लोगों ने महामारी से बचाव और शहर की सुख-शांति के लिए मां पथवारी के दरबार में पंखा चढ़ाने की परंपरा शुरू की। इसके बाद हर साल रक्षाबंधन के दिन पंखा मेला आयोजित होने लगा। समय के साथ यह परंपरा फरीदाबाद की पहचान बन गई और आज भी उसी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है। हरिद्वार से आता है नया पंखा मेले के लिए हर साल हरिद्वार से नया पंखा लाया जाता है। खास बात यह है कि इस पंखे को एक मुस्लिम परिवार तैयार करता है। यही वजह है कि पंखा मेला हिंदू-मुस्लिम सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की मिसाल माना जाता है। मेले के दौरान पंखे को धूमधाम से उठाकर चार पीरों की परिक्रमा कराई जाती है। इसके बाद शहर की सुख-शांति और समृद्धि की कामना के साथ पंखा वापस मां पथवारी के चरणों में चढ़ाया जाता है। मां पथवारी को फरीदाबाद की नगर देवी के रूप में पूजा जाता है। सभी समाजों की भागीदारी से दिखेगा भाईचारा पंखा मेले की सबसे खास बात इसमें विभिन्न समाजों की भागीदारी है। 27 झांकियों के जरिए शहर की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता दिखाई देगी। कमेटी का कहना है कि मेले को लेकर लोगों में उत्साह है और आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी समाज मिलकर तैयारियों में जुटे हुए हैं।
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फरीदाबाद में रक्षाबंधन पर सजेगा 400 साल पुराना पंखा मेला:महामारी से बचाव के लिए शुरू हुई थी परंपरा, हरिद्वार से आता है नया पंखा
