![]()
विकासखंड बलरामपुर के ग्राम पंचायत बरदबंधा की प्राथमिक शाला भवन के अभाव में अब विद्यार्थी विहीन हो गई है। पिछले शैक्षणिक सत्र में यहां महज तीन बच्चे पढ़ते थे, लेकिन कक्षा संचालन के लिए भवन नहीं होने और असुविधाओं के चलते तीनों ने स्कूल से अपना नाम कटवा लिया। वर्तमान सत्र में अगस्त तक प्रवेश का इंतजार किया गया, लेकिन एक भी नया विद्यार्थी दाखिल नहीं हुआ। ग्रामीणों के मुताबिक, स्कूल का पुराना भवन करीब तीन-चार साल पहले जर्जर होने के कारण डिस्मेंटल कर दिया गया था। इसके बाद नए भवन के निर्माण की स्वीकृति भी मिली। निर्माण सामग्री मौके पर पहुंची, लेकिन बाद में उसे हटा लिया गया और भवन निर्माण शुरू नहीं हो सका। भवन नहीं होने के कारण पिछले सत्र में बच्चों की कक्षाएं मध्याह्न भोजन कक्ष में संचालित की जाती थीं। तीन बच्चे थे, सभी ने कटवा लिया नाम पिछले सत्र में कक्षा पहली में दो और कक्षा दूसरी में एक बच्चा पढ़ता था। भवन और पढ़ाई के लिए उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण तीनों ने स्कूल छोड़ दिया। इसके बाद नए सत्र में विद्यालय में एक भी विद्यार्थी नहीं पहुंचा। दो शिक्षक पदस्थ, एक लंबे समय से अनुपस्थित स्कूल में एक प्रधान पाठक और एक शिक्षक, यानी कुल दो शिक्षकों की पदस्थापना है। ग्रामीणों के अनुसार इनमें से एक शिक्षक लंबे समय से स्कूल नहीं आ रहे हैं। बीईओ संजू कनौजिया ने बताया कि संबंधित शिक्षक कैंसर से पीड़ित हैं और बीमारी के कारण लंबे समय से अनुपस्थित हैं। 2022 में 11 लाख की मंजूरी, फिर भी निर्माण नहीं बीईओ संजू कनौजिया के मुताबिक, प्राथमिक शाला बरदबंधा के भवन निर्माण के लिए वर्ष 2022 में करीब 11 लाख रुपए की स्वीकृति मिली थी, लेकिन निर्माण कार्य नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि पूर्व में बच्चे मध्याह्न भोजन कक्ष में पढ़ते थे। वर्तमान में स्कूल विद्यार्थी विहीन है। शासन के निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रधान पाठक को प्राथमिक शाला धनेशपुर में अटैच करने की प्रक्रिया भी बताई गई है। ग्रामीण बोले- जल्द बने स्कूल भवन ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल भवन की समस्या की जानकारी कई बार शिक्षा विभाग और अधिकारियों को दी गई, लेकिन अब तक इसका समाधान नहीं हुआ। भवन के अभाव में गांव के बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरी जगह जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि 2022 में स्वीकृत भवन निर्माण की स्थिति की जांच कर जल्द काम शुरू कराया जाए, ताकि बच्चों को गांव में ही सुरक्षित और सुविधायुक्त शिक्षा मिल सके और विद्यार्थी विहीन हो चुके स्कूल में फिर से पढ़ाई शुरू हो सके।
Source link
भवन नहीं मिला तो स्कूल में एक भी एडमिशन नहीं:बलरामपुर में पिछले सत्र के 3 बच्चों ने भी नाम कटवाया,मध्याह्न-भोजन कक्ष में लगती थीं कक्षा
