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'मुझे धमकी मिली, जयचंद मेरी हत्या करवाएगा':तेजप्रताप बोले- राजद में असुरी मानसिकता के लोग घुसे, तेजस्वी को पावर मिला; इसलिए बात नहीं समझ रहा




जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव इन दिनों ‘भोजपुरी बवाल’ शो में नजर आ रहे हैं। इसमें उन्होंने खुलासा किया है कि उन्हें कई धमकी मिल चुकी है, जयचंद उनकी हत्या करवाएगा। उन्होंने यह भी कहा, ‘राजद में असुरी मानसिकता के लोग आ गए हैं। उन्होंने भाई-भाई में बंटवारा करके दूर किया है। लालू जी के सामने जयचंद पैर पर पैर चढ़ाकर बैठता है। तेजस्वी को पावर मिला हुआ, इसलिए वो बात को समझ नहीं पा रहे।’ उन्होंने अपने बचपन के दिन को याद करते हुए कहा,’जब मैं शरारत करता था तो मां छड़ी से मेरी पिटाई करती थी, मगर पिताजी मुझे बचाते थे।’ मैं और तेजस्वी सीएम हाउस में कीचड़ में खेलते थे- तेज प्रताप जब तेज प्रताप से पूछा गया कि बचपन कितना अलग था? उन्होंने कहा, ‘बचपन में हमें नहीं पता था कि राजनीति क्या होती है। हम तो अपना मस्ती करते थे। मुख्यमंत्री आवास में ही कीचड़ में लोटपोट करके खेलते थे।’ उन्होंने बताया, ‘मैंने अपने बचपन को पूरी तरह जिया है। मैं बचपन में तीर धनुष बनाकर खेलता था। पेड़ पर निशाना लगाकर हम लोग प्रैक्टिस करते थे। मैं राम बनता था और तेजस्वी लक्ष्मण बनते थे।’ मम्मी छड़ी से मारती थी, तो पिताजी बचाते थे- तेज प्रताप तेज प्रताप बचपन के दिन को याद करते हुए कहते हैं, ‘तेजस्वी के साथ बचपन में क्रिकेट खेलने के दौरान मेरी लड़ाई होती थी। बात झगड़े से हाथापाई पर आ जाती थी। बगल में कीचड़ था, उसी में लड़ाई करते हुए गिर गए।मम्मी आई तो हमें काफी डाटा। वो तो हमें छड़ी से भी मारती थी।’ मैं परिवार का सबसे फेवरेट बच्चा, पिताजी तेजू बुलाते थे- तेज प्रताप राबड़ी देवी को याद करते हुए तेज प्रताप ने कहा, ‘पहले मेरी मां को इस बात की चिंता होती थी कि मैं स्कूल जाऊं, अच्छे से पढ़ लिख लूं, क्योंकि मैं स्कूल बंक करता था। अब मैंने अलग संगठन बनाया है तो मेरी मां को चिंता होती है कि मैं अकेले कैसे सब कुछ संभाल लूंगा। तेज प्रताप आगे बताते हैं, ‘मां अपने बेटा को अकेले देख रही हैं। कोई साथ में नहीं है। इसलिए कभी-कभी वह मुझे खाना भिजवा दिया करती हैं। मैं परिवार का सबसे फेवरेट बच्चा हूं। पिताजी मुझे प्यार से तेजू बुलाते थे।’ राजद में असुरी मानसिकता के लोग आ गए हैं- तेज प्रताप तेज प्रताप ने तेजस्वी के साथ अपने रिश्ते को लेकर कहा, ‘हमारे उम्र में सिर्फ साल भर का अंतर है। इसलिए हम लोग भाई से ज्यादा दोस्त की तरह रहते थे। हम दोनों एक दूसरे को सलाह देते रहते थे। जहां उचित लगता था, वहां एक दूसरे की सलाह मानते भी थे।’ जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें नहीं लगता है कि अब भी एक-दूसरे की बात मानना चाहिए? तेज प्रताप ने जवाब दिया, ‘सबसे पहले उन्हें राम का बात मानना चाहिए, क्योंकि उनके संगठन में जयचंद भरे पड़े हैं। वो हमें एक नहीं होने देना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने षड्यंत्र रचना चालू किया। कई बार मुझे पार्टी मीटिंग में नहीं बुलाया जाता था।’ मुझे धमकी मिलती, जयचंद मेरी हत्या करवाएगा- तेज प्रताप इस पर जब तेज प्रताप से सवाल किया गया कि जब आप जयचंद को पहचान पा रहे थे तो तेजस्वी क्यों नहीं पहचान रहे थे? इस पर उन्होंने कहा, ‘तेजस्वी को पावर मिला हुआ था। इसलिए वो बात को समझ नहीं पा रहे। लालू जी के सामने जयचंद पैर पर पैर चढ़ाकर बैठता है। जयचंद ने कई नए लोगों को पार्टी में एंट्री करवाया और इसमें पिताजी का सलाह किसी ने नहीं लिया। इसलिए जनता को भी यह सारी चीज बर्दाश्त नहीं है।’



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