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लखनऊ में पार्क का नाम बदलने की मांग उठी:हेरिटेज म्यूजियम और फ्रैगरेंस पार्क को नवाबीन ए अवध का नाम देने की सीएम योगी से अपील




लखनऊ के हुसैनाबाद क्षेत्र में प्रदेश का पहला फ्रैगरेंस पार्क बना है। घंटाघर के ठीक सामने बने इस पार्क को खुशबू वाला पार्क भी कहते हैं। इस पार्क को 3.41 करोड़ रूपए की लागत से विकसित किया गया है। पार्क में एनबीआरआई द्वारा हॉर्टीकल्चर का कार्य कराया गया है। फ्रैगरेंस पार्क की वजह से पूरा इलाका महकने लगा है। पार्क के डेवलप होने के बाद अब इसके नाम को बदलने की भी डिमांड होने लगी है। नवाब मसूद अब्दुल्ला ने इस पार्क का नाम बदलकर नवाबीन ए अवध के नाम पर रखने की मांग किया है। पार्क में लाल और सफेद रंग के बोगनवेलिया फूल , अलग अलग वैरायटी के मौसी फूल , कमल और विभिन्न प्रकार के गुलाब सजे है। 50 से अधिक वैरायटी के फूल लगाए गए हैं। जिसमें सबसे अधिक वैरायटी गुलाब में देखने को मिल रही है। लाल , सफेद , गुलाबी और काला गुलाब समेत 2 दर्जन से अधिक प्रकार के गुलाब मौजूद हैं। लखनऊ बागों का शहर नवाब मसूद अब्दुल्ला ने कहा कि लखनऊ को बागों का शहर कहा जाता है। नवाबीन ए अवध ने बहुत सारे बाग बनवाए। ये बाग शहर की खूबसूरती और माहौल को बेहतर बनाने में योगदान देते हैं । चारबाग, आलमबाग, मूसा बाग , बादशाह बाग, सिकंदर बाग , बंद दरिया बाग , महताब बाग ऐसे बहुत सारे बाग है। लखनऊ चारों ओर बाग ही बाग हुआ करते थे। बागों से शहर की रौनक है उन्होंने बताया कि नवाब आसिफुद्दौला ने 1775 में शीश महल का निर्माण करवाया । 1784 में बड़ा इमामबाड़ा का निर्माण हुआ । इमामबाड़ा निर्माण के साथ उसके चारों ओर बागान लगाए गए थे गुलशन सजाया गया था। जो बाद में धीरे धीर खत्म हो गया था । फिलहाल गवर्नमेंट ने स्मार्ट सिटी के तहत फ्रैगरेंस पार्क बनाया है ये अच्छा कदम है जहाँ अलग अलग तरह के फूल महक रहे हैं और शहर की रौनक बढ़ा रहे हैं । इन दो जगहों का नाम बदलने की डिमांड हमारी मांग है कि फ्रैगरेंस पार्क जो खुशबू से महक रहा है यह तहजीब और कलचर नवाबीन ए अवध की देन है। इसलिए किसी नवाब के नाम पर ही इसका नाम होना चाहिए। जो म्यूजियम बना है जिसका नाम अभी ‘लखनऊ म्यूजियम ऑफ हेरिटेज एंड आर्ट है’ उसे बदल कर नवाब आसिफुद्दौला का नाम दिया जाए। जबकि ‘फ्रैगरेंस पार्क’ का नाम बदल कर किंग मोहम्मद अली शाह के नाप पर रखा जाए। सीएम योगी से नाम बदलने की अपील नवाब मसूद अब्दुल्ला ने कहा कि मौजूदा समय में जो पार्क बन रहे हैं वो आज के बुजुर्ग और अहम शख्सियतों के नाम पर हैं । उनकी वहां पर मूर्ति लगती है उनके नाम का बोर्ड लगता है। इसलिए जिन्होंने लखनऊ को एक तहजीब दिया इसे संवारने का काम किया उनके नाम पर भी कुछ होना चाहिए। सीएम योगी आदित्यनाथ से हमारी दो डिमांड है कि इन दोनों जगहों का नाम बदल दें ताकि नवाबीन ए अवध ने लखनऊ को बेहतर बनाने में जो योगदान दिया है उसे सम्मान मिले।



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