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हरे कृष्ण के जयघोष से गूंजा इंदौर:भगवान जगन्नाथ के रथ के साथ उमड़ा जनसैलाब; ड्रोन से बरसे फूल




भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की भव्य रथयात्रा ने रविवार को पूरे इंदौर को भक्तिमय बना दिया। अन्नपूर्णा मंदिर से निकली इस्कॉन की रथयात्रा राजवाड़ा स्थित गोपाल मंदिर तक पहुंची। करीब 5 किलोमीटर लंबे मार्ग पर काफी संख्या में श्रद्धालु भक्ति और उत्साह के साथ शामिल हुए। रिमझिम फुहारों के बीच “हरे रामा-हरे कृष्णा” और “जगन्नाथ स्वामी नयन पथगामी भवतु मे” के जयघोष से पूरा शहर गुंजायमान रहा। यात्रा का शुभारंभ इस्कॉन इंदौर के अध्यक्ष स्वामी महामनदास, अन्नपूर्णा आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि, स्वामी जयेन्द्रानंद गिरि, डॉ. स्वामी चेतन स्वरूप, महंत पवनदास महाराज सहित अनेक संतों के सान्निध्य में हुआ। अतिथियों ने रथ का पूजन कर और मार्ग की प्रतीकात्मक सफाई कर यात्रा को रवाना किया। ड्रोन से पुष्पवर्षा, भक्तों में रथ खींचने की होड़ 51 फीट ऊंचे भव्य रथ पर विराजित भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन के लिए मार्गभर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। यात्रा के दौरान ड्रोन से पुष्पवर्षा की गई, जबकि 65 स्वागत मंचों और तोरण द्वारों से भी फूल बरसाकर भगवान का स्वागत किया गया। रथ को अपने हाथों से खींचने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। देश-विदेश के संत बने आकर्षण कतर, यूक्रेन, वृंदावन, मायापुर (कोलकाता) और देश के विभिन्न हिस्सों से आए संतों और भक्तों ने संकीर्तन एवं नृत्य प्रस्तुतियों से माहौल को भक्तिमय बनाए रखा। विदेशी भक्तों के कृष्ण भक्ति नृत्य और संकीर्तन ने लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। राधा-कृष्ण स्वरूप में सजी महिलाएं और गोपियों की झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। एक किलोमीटर लंबा बना श्रद्धालुओं का काफिला यात्रा में दो रथ, छह बग्घियां, दो बैंड, तीन भजन मंडलियां, विंटेज कारें और दर्जनों वाहन शामिल रहे। श्रद्धालुओं का काफिला इतना लंबा था कि उसका एक सिरा महू नाका क्षेत्र में था तो दूसरा काफी पीछे तक फैला हुआ था। यात्रा को गोपाल मंदिर पहुंचने में लगभग पांच घंटे का समय लगा। हर मोड़ पर स्वागत, पूरे मार्ग में प्रसाद वितरण अग्रवाल, जैन, माहेश्वरी, खंडेलवाल, गुर्जर गौड़, यादव-अहीर समाज, विश्व हिंदू परिषद सहित अनेक सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संगठनों ने यात्रा का स्वागत किया। जगह-जगह फलाहार, शीतल पेय और प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई। विशेष व्यवस्थाएं भी रहीं आकर्षण बिजली के तारों और अन्य अवरोधों से रथ को सुरक्षित निकालने के लिए हाइड्रोलिक सिस्टम का उपयोग किया गया। यातायात व्यवस्था संभालने के लिए इस्कॉन के 21 स्वयंसेवक तैनात रहे, जबकि यात्रा समाप्त होने के बाद मार्ग की सफाई के लिए विशेष वाहन भी साथ चल रहा था। राजवाड़ा स्थित गोपाल मंदिर पहुंचकर रथयात्रा का समापन हुआ, जहां हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर महाप्रसाद ग्रहण किया।



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