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12.50 करोड़ के प्लॉट सौदे में धोखाधड़ी का आरोप, विवादित जमीन क्लीयर बताई, 7 के खिलाफ केस



फेज-3 इंडस्ट्रियल एरिया में 12.50 करोड़ रुपए के प्लॉट सौदे में धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। चंडीगढ़ के बिजनेसमैन संयम हरीश की शिकायत और जांच के बाद पुलिस ने 7 आरोपियों पर केस दर्ज किया है। आरोप है कि प्लॉट नंबर बी-32 को विवादमुक्त और क्लियर बताकर सौदा किया गया, जिसके भरोसे पर संयम ने आरोपियों के खातों में करीब 6.10 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए। बाद में पता चला कि जमीन से जुड़ा मामला पहले से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित था। विवाद खत्म कराने और प्लॉट पर कब्जा दिलाने के नाम पर उससे और रकम ली गई। शिकायत के अनुसार, मूल वारिसों को 5.40 करोड़ रुपए देने पड़े। पैसे देने के बाद जीपीए और वसीयत कैंसिल करने का आरोप संयम हरीश के अनुसार प्लॉट की पूरी रकम देने के बाद महिंदर सिंह चन्ना ने उसके पक्ष में तैयार की गई जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी और वसीयत को कथित तौर पर कैंसिल कर दिया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद प्लॉट पर दोबारा अधिकार जताने की कोशिश की गई। इसी दौरान हरि कृष्ण कक्कड़ की ओर से अपनी मां और प|ी के नाम पर प्लॉट के ट्रांसफर के लिए गमाडा कार्यालय में आवेदन किए जाने का भी आरोप है। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि उसे इस पूरी कार्रवाई की जानकारी बाद में हुई। आरोप है कि संपत्ति पर दोबारा दावा स्थापित करने के लिए दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने महिंदर सिंह चन्ना, अरविंदर सिंह चन्ना, हरि कृष्ण कक्कड़, कान्ता रानी, उपमा कक्कड़, अशोक बतरा और पवन कुमार को आरोपी बनाया है। मुख्य आरोपी महिंदर सिंह चन्ना ने संयम हरीश की मुलाकात हरि कृष्ण कक्कड़ से कराई। आरोप है कि कक्कड़ ने खुद को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का सीनियर एडवोकेट बताया और भरोसा दिलाया कि वह अपनी पहुंच के जरिए लंबित केस को खत्म करवा देगा। इस भरोसे पर उससे और रकम ली गई। शिकायत में उसे फर्जी वकील बताया गया है। हरि कृष्ण कक्कड़ समेत उसकी पत्नी और अन्य आरोपियों को केस में नामजद किया है। सीसीटीवी लगवाए तो गार्ड्स को धमकाने का आरोप… शिकायतकर्ता के मुताबिक उसने प्लॉट पर अपना कब्जा सुरक्षित रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे। आरोप है कि इसके बाद आरोपी वहां पहुंचे और सुरक्षा गार्ड्स को धमकाया। शिकायत में बाउंड्री वॉल तोड़ने की कोशिश का भी आरोप लगाया गया है। संयम हरीश का दावा है कि इस पूरी घटना की वीडियो फुटेज भी पुलिस को उपलब्ध कराई गई है। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने शिकायत की जांच की और सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। पुलिस अब प्लॉट के पुराने मालिकाना रिकॉर्ड, हाईकोर्ट में लंबित मुकदमे, पैसों के लेन-देन, जीपीए/वसीयत और गमाडा में दिए गए आवेदनों की जांच कर रही है।



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