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सुप्रीम कोर्ट ने खतरनाक कुत्तों को जहरीला इंजेक्शन लगाने का आदेश दिया है। इससे लखनऊ में एक बार फिर आवारा कुत्तों को लेकर बहस छिड़ गई है। लखनऊ में 86 हजार आवारा कुत्ते हैं। रोजाना जिले में औसतन 150 डॉग बाइट के मामले आते हैं। नगर निगम एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) नियमों के तहत नसबंदी और टीकाकरण अभियान चला रहा है। इसके बावजूद हर महीने 4500 से 5000 लोग कुत्तों के हमले का शिकार होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। नगर निगम अब अवारा कुत्तों में चिप लगाने की तैयारी कर रहा है। वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि कुत्ते के काटने के बाद समय पर इलाज और एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाना बेहद जरूरी है, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। राजधानी के सरकारी अस्पतालों में हर महीने हजारों डॉग बाइट के मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या हर कुत्ते में रेबीज होता है ? इसके लक्षण क्या है ? बचाव कैसे करें ? कौन सा इंजेक्शन लगता है ? कीमत कितनी होती है ? सबसे पहले लखनऊ में डॉग बाइट के 2 केस पढ़िए… केस 1- 8 साल की अंशिका तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया मार्च 2026 में लखनऊ के रहीमाबाद थाना क्षेत्र के तरौना गांव में आवारा कुत्तों के हमले में 8 साल की अंशिका की दर्दनाक मौत हो गई थी। अंशिका शाम करीब 6 बजे घर से बाहर निकली थी, तभी आवारा कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया। बच्ची का खून से लथपथ शव घर से करीब 500 मीटर दूर खेत में मिला था। उसका चेहरा बुरी तरह नुचा हुआ था और शरीर पर कई जगह गहरे घाव थे। केस 2- रेबीज से महिला की मौत हो गई बाराबंकी की मझिगवा ग्राम प्रधान आशा देवी की कुत्ता काटने के करीब एक माह बाद मौत हो गई। 7 मार्च 2026 को उन्हें घर के बाहर एक कुत्ते ने काट लिया था। शुरुआत में परिवार ने देसी दवा और झाड़-फूंक का सहारा लिया। बाद में रेबीज के लक्षण दिखने पर उन्हें मेडिकल कॉलेज लखनऊ ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। शहर के बड़े अस्पतालों में हर महीने 5 हजार डॉग बाइट के केस आ रहे क्या हर कुत्ते के काटने पर हो सकता है रेबीज? डॉग बाइट का इंजेक्शन कहां लगवा सकते हैं? कुत्ते के काटने पर कौन सा इंजेक्शन लगाया जाता है ? कुत्ते के काटने पर होने वाली रेबीज बीमारी क्या है? कुत्ते ने किस हिस्से में काटा है, क्या इससे भी फर्क पड़ता है? लखनऊ नगर निगम बनाएगा शेल्टर होम इसके अलावा स्ट्रीट डॉग्स के लिए लखनऊ नगर निगम के द्वारा स्ट्रीट डॉग्स के शेल्टर होम का प्रस्ताव जल्द ही पास किया गया है, उसपर जल्द ही काम शुरू होगा। वर्तमान में 2 ABC (Animal Birth Control) सेंटर है, जहां पर जरूरत के अनुसार स्ट्रीट डॉग्स का गहन परीक्षण और नसबंदी होता है। स्ट्रीट डॉग्स को नगर निगम के द्वारा एनजीओ के जरिए फीडिंग करवाई जाती है। लखनऊ में 86 हजार से ज्यादा हैं आवारा कुत्ते नगर निगम पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अभिनव वर्मा ने बताया कि लखनऊ में स्ट्रीट डॉग्स की संख्या लगभग 86 हजार है, जिनमें करीब 80 प्रतिशत कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि जल्द ही माइक्रोचिपिंग की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। स्ट्रीट डॉग्स या पालतू कुत्ते की शिकायत कहां कर सकते हैं? स्ट्रीट डॉग्स की शिकायत करने के लिए आप अपने शहर की नगर निगम समेत कुछ NGO में कर सकते हैं। NGO रेस्क्यू कर कुत्ते को वैक्सीनेट करते हैं। पालतू कुत्ते के काटने IPC की धारा 289 के मुताबिक, कुत्ते के मालिक या मालकिन को सजा होगी। ज्यादा से ज्यादा 6 महीने की जेल या 1 हजार रुपए का जुर्माना या दोनों हो सकती है।
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लखनऊ में हर महीने 5000 लोगों को काट रहे कुत्ते:रेबीज पहचानना मुश्किल, इसलिए इंजेक्शन जरूर लगवाएं; नगर निगम लगाएगा चिप
