नंद कुमार | एटा3 मिनट पहले
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थाने में युवक का पीट-पीटकर हत्या करने वाले दरोगा गजराज सिंह और सिपाही महावीर सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। साथ ही दोषियों पर 25-25 हजार का जुर्माना लगाया है। मामला 21 साल पुराना है। डिस्टिक्ट कोर्ट ने बुधवार को यह फैसला सुनाया। उधर, पीड़ित का कहना है कि केस लड़ने के पाने के लिए जमीन तक बेचनी पड़ी।
कोर्ट ने दोनों की जमानत निरस्त कर उन्हें न्यायिक हिरासत में जिला जेल भेज दिया। मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी मनीष कुमार और ड्राइवर मिढ़ई लाल की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है।
पढ़िए पूरा मामला….
प्रधानी की रंजिश में थाने लाने का आरोप
मामला 2005 में जैथरा थाना क्षेत्र के बहगों गांव का है। गांव में प्रधानी के चुनाव को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था। दोनों पक्षों ने थाने में शिकायत दी थी। आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी मनीष कुमार, दरोगा गजराज सिंह, सिपाही महावीर सिंह समेत पुलिसकर्मी मुहरपाल उर्फ पप्पू को थाने लेकर आए।
परिजनों का आरोप था कि थाने में मुहरपाल के साथ मारपीट की गई। जब परिवार के लोग थाने पहुंचे तो उन्हें वहां से भगा दिया गया। आरोप है कि पिटाई के दौरान मुहरपाल की मौत हो गई, जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने शव को वाहन में रखकर काली नदी में फेंक दिया।
घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने थाने पर हंगामा किया था। कुछ समय बाद मुहरपाल का शव बरामद हुआ। लिखित शिकायत के आधार पर तत्कालीन थाना प्रभारी समेत पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या, मारपीट और साक्ष्य मिटाने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया।
सीबीसीआईडी जांच के बाद दाखिल हुई थी चार्जशीट
मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई। जांच पूरी होने के बाद चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया। लंबे समय तक मामले की सुनवाई चलती रही। इसी दौरान तत्कालीन थाना प्रभारी मनीष कुमार और चालक मिढ़ई लाल की मौत हो गई। इसके बाद दरोगा गजराज सिंह और सिपाही महावीर सिंह के खिलाफ सुनवाई जारी रही।
अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता रेशपाल सिंह राठौर ने मामले की प्रभावी पैरवी की। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर दोनों पुलिसकर्मियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
बेटे ने कहा- खेती बेचकर लड़ी न्याय की लड़ाई
फैसले के बाद मुहरपाल (मृतक) के बेटे सुनील ने कहा कि घटना के समय उनके पिता को पुलिस 26 तारीख को पकड़कर ले गई थी। अगले दिन उन्हें पीट-पीटकर मार डालने और 28 तारीख को शव गायब किए जाने की जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि परिवार को थाने से भगा दिया गया था और न्याय के लिए 21 साल तक संघर्ष करना पड़ा।
सुनील के मुताबिक, पिता के मुकदमे की पैरवी के लिए परिवार को अपनी जमीन तक बेचनी पड़ी। उन्होंने कहा कि इतने लंबे इंतजार के बाद न्याय मिला है, इसलिए उन्हें राहत महसूस हो रही है।
मुहरपाल (मृतक) की पत्नी गुड्डी देवी ने बताया कि पुलिस उनके पति को चुनाव के दौरान घर से ले गई थी। उनके बच्चे उस समय छोटे थे और परिवार ने लंबे समय तक काफी मुश्किलें झेलीं। उन्हें हमेशा न्याय मिलने की उम्मीद थी। कोर्ट के फैसले के बाद परिवार को 21 साल पुराने मामले में आखिरकार न्याय मिलने की राहत मिली है।
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