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देवघर में 80 वर्षों से झूलनोत्सव की परंपरा जीवंत:28-29 अगस्त को श्रीकृष्ण लीलाएं, माखनचोर-द्रोपदी चीरहरण झांकियां मुख्य आकर्षण




देवघर में श्रावणी मेला और बाबा बैद्यनाथ मंदिर के अलावा झूलनोत्सव की 80 वर्ष पुरानी परंपरा जीवंत है। शहर के राम मंदिर रोड स्थित अनोखा समाज द्वारा श्रावण मास की एकादशी से पूर्णिमा तक इस उत्सव का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भी 28 और 29 अगस्त को दो दिवसीय झूलनोत्सव मनाया जाएगा। अनोखा समाज के अध्यक्ष प्रकाश चरण मिश्र के नेतृत्व में आयोजन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस उत्सव का मुख्य आकर्षण अनोखा समाज के विशेष रंगमंच पर प्रस्तुत की जाने वाली भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहक झांकियां होंगी। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को दर्शाया जाएगा कलाकार सह आयोजन समिति के वरिष्ठ सदस्य भानुश्री के नेतृत्व में झांकियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इन झांकियों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और विभिन्न धार्मिक प्रसंगों को जीवंत रूप में दर्शाया जाएगा। मंच सज्जा, पात्रों की वेशभूषा और दृश्य संयोजन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि दर्शकों को वास्तविक घटनाओं का अनुभव हो सके। समिति के वरिष्ठ सदस्य मुरारी चरण मिश्र ने बताया कि इस बार झूलनोत्सव में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप में ‘माखनचोर’ की लीला के साथ ‘द्रोपदी चीरहरण’ प्रसंग की झांकी भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। इन दोनों झांकियों को आकर्षक और जीवंत बनाने के लिए कलाकार लगातार परिश्रम कर रहे हैं। 80 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा देवघर की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करती है। झूलनोत्सव के दौरान धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सहभागिता और लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। आयोजकों को उम्मीद है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का आनंद लेंगे।



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