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बार काउंसिल में 30% महिला प्रतिनिधित्व का समर्थन:ज्यादा वोट पाने वाली महिला उम्मीदवारों को बार काउंसिल में मिले मौका




नई दिल्ली में 11 राज्य बार काउंसिलों की महिला उम्मीदवारों ने 30% महिला प्रतिनिधित्व के सिद्धांत का समर्थन करते हुए सहयोजन (Co-option) प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की है। जारी प्रेस वक्तव्य में महिला अधिवक्ताओं ने कहा कि बार काउंसिल अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के तहत बार का प्रतिनिधित्व करने वाली निर्वाचित और स्वायत्त संस्थाएं हैं। ऐसे में सहयोजन की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे बार की स्वतंत्रता और बार-बेंच के बीच संस्थागत संतुलन प्रभावित न हो। उन्होंने भारतीय बार काउंसिल से सभी राज्यों में सहयोजन के लिए समान, पारदर्शी और वस्तुनिष्ठ मानदंड तय करने की मांग की है। वक्तव्य में कुछ राज्यों में चुनाव प्रक्रिया या समितियों से जुड़े लोगों को सहयोजन के लिए विचार किए जाने की रिपोर्ट पर भी चिंता जताई गई है। अधिक वोट पाने वाली महिला उम्मीदवारों को मौका देने की मांग महिला अधिवक्ताओं ने कहा कि कई राज्यों में चुनाव लड़ने वाली महिला उम्मीदवारों ने अधिक वोट हासिल किए और योग्यता सूची में चौथे, पांचवें, छठे और सातवें स्थान तक रहीं, लेकिन उन्हें सहयोजन में विचार नहीं किया गया। उनका कहना है कि मतदाताओं ने 1.25 लाख रुपए का निर्धारित शुल्क देकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लिया है, इसलिए उनके जनादेश को महत्व मिलना चाहिए। वक्तव्य में यह भी कहा गया कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के बाहर से बिना पारदर्शी आधार के सहयोजन या मनोनयन की प्रक्रिया निर्वाचित और स्वतंत्र बार काउंसिल की भावना के अनुरूप नहीं हो सकती। साथ ही सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के सहयोजन को लेकर भी बार-बेंच संतुलन और संवैधानिक स्थिति पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है। इन अधिवक्ताओं ने दिया है मांग को समर्थन झारखंड की अधिवक्ता स्वाति सिन्हा और शौर्या द्विवेदी के अलावा पंजाब एवं हरियाणा की रबीना शाह व निम्रता गिल, कर्नाटक की अनुपमा एचएस व विजयलक्ष्मी, तमिलनाडु एवं पुडुचेरी की कनिमोझी मथि व डॉ. प्रिसिला पंडियन, महाराष्ट्र एवं गोवा की सुप्रिया कोठारी व केसरी मौर्य, राजस्थान की वंदना शर्मा व मंजू जोशी, उत्तराखंड की शिवांगी गंगवार व सृष्टि तिवारी, पश्चिम बंगाल की सहाना बानू व सतवाना बाग, हिमाचल प्रदेश की मेनका राज चौहान, गुजरात की पारिख मनीषा बलदेवभाई व भूमिका पटेल तथा दिल्ली की डॉ. रेनू अग्रवाल व सूरु चिमित्तल के नाम शामिल हैं। महिला अधिवक्ताओं ने 30% प्रतिनिधित्व के लिए चुनाव में अगले सबसे अधिक वोट पाने वाली महिला उम्मीदवारों को निर्वाचित घोषित करने पर विचार करने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि इससे आरक्षण के उद्देश्य के साथ मतदाताओं के जनादेश का भी सम्मान होगा।



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