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संतकबीरनगर जिले में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावों के बावजूद जमीनी हकीकत अलग है। सरकारी अस्पतालों में मरीज इलाज कराने पहुंच गए लेकिन डॉक्टर नहीं पहुंचे। दैनिक भास्कर की टीम ने शुक्रवार को जिले के तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) की पड़ताल की। ओपीडी का समय सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक है। लेकिन पड़ताल के दौरान जो सामने आया, वह स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। सीएचसी लोहरसन : सांथा विकास खंड के लोहरसन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रोजाना 200 से ज्यादा मरीज ओपीडी में आते हैं। इसके बावजूद शुक्रवार सुबह अस्पताल खुलने के तय समय के बाद भी कई डॉक्टर और कर्मचारी मौजूद नहीं थे। अस्पताल परिसर में अधिकतर कुर्सियां खाली थीं और मरीजों को देखने वाला कोई कर्मचारी नहीं दिखा। पर्ची काटने वाले भी नहीं पहुंचे सुबह करीब 9 बजे तक अस्पताल में पर्ची काटने वाला कर्मचारी और अधीक्षक डॉक्टर आरके चौधरी समेत कई अधिकारी व कर्मचारी मौजूद नहीं थे। इससे इलाज के लिए आए मरीजों और उनके तीमारदारों को काफी परेशानी हुई। 9 बजे तक लोहरसन सीएचसी में सन्नाटा पसरा था और परिसर में झाड़ू लग रहा था। करीब 9:17 बजे तक एक्स-रे टेक्नीशियन राजेश कुमार, डॉक्टर मंजय राम और दीप कुमार आर्य अस्पताल पहुंचे। हालांकि, अन्य अधिकारी और कर्मचारी तय समय पर नहीं पहुंचे। वहीं, पीएचसी मेंहदूपार में स्थिति बेहतर मिली, जहां डॉ. हरिवंश मौर्य, फार्मासिस्ट प्रेमचंद चौधरी और होम्योपैथ के डॉक्टर मौजूद थे। सीएचसी सेमरियावां: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेमरियावां जिले के बड़े सीएचसी केंद्रों में गिनती की जाती है। लेकिन यहां के जिम्मेदार मानो और बेलगाम हो चुके है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेमरियावां क्षेत्र का प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है,जहां प्रतिदिन करीब 500 मरीजों तक की ओपीडी होने का दावा किया जाता है। यहां सेमरियावां विकासखंड के अलावा बेलहर क्षेत्र और पड़ोसी बस्ती जिले से भी मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। सीएचसी सेमरियावां का आंखों देखा हाल की रिपोर्ट करने सुबह 8:30 बजे भास्कर रिपोर्टर अस्पताल पहुंचे। तो इमरजेंसी में चिकित्सक डॉ. तौहीद अहमद दो कर्मचारियों के साथ मरीजों को देखते मिले। इसके अलावा अधीक्षक डॉ. सुरेश चंद्रा समेत अन्य चिकित्सकों के कक्षों में सन्नाटा पसरा रहा। अस्पताल के एक कर्मचारी ने बताया कि संबंधित चिकित्सक अभी आवास पर हैं और अस्पताल आ रहे हैं। पड़ताल के दौरान ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधन कार्यालय, कोल्ड चेन/टीकाकरण कक्ष, औषधि भंडार कक्ष,टीबी यूनिट और दंत चिकित्सा केंद्र समेत कई स्थानों पर ताले लटके मिले। इनसे संबंधित कई कर्मचारी भी मौके पर मौजूद नहीं थे। महिला चिकित्साधिकारी की कुर्सी भी खाली मिली,एक्स-रे टेक्नीशियन भी मौके पर अनुपस्थित रहे। मौके पर एक महिला नर्स, सफाईकर्मी और चार अन्य कर्मचारी नजर आए। वहीं खून जांच केंद्र के कर्मचारी मौजूद थे और मरीजों की जांच का कार्य करते दिखाई दिए। इस दौरान फार्मासिस्ट भी उपस्थित रहे। पर्ची काउंटर पर भी सन्नाटा पसरा रहा और मरीजों की संख्या नगण्य रही। हड्डी रोग विशेषज्ञ और अल्ट्रासाउंड की सुविधा अब तक नहीं सीएचसी हैंसर : जिले के धनघटा विधानसभा के सीएचसी हैंसर में अस्पताल में 9 बजे तक अस्पताल के अधीक्षक स्वयं नहीं पहुंचे। अधिकतर कुर्सियां खाली मिलीं। महिला डॉक्टर रीता की भी कुर्सी खाली रही। महिला मरीज बाहर बैठकर महिला डॉक्टर के आने का इंतजार करती हुई देखी गई। कौशिल्या, रामरती देवी ने बताया कि वह साढ़े आठ बजे ही अस्पताल पहुंची लेकिन महिला डॉक्टर मौजूद न होने से उनको बैठ कर इंतजार करना पड़ा। अस्पताल पर पांच डॉक्टर की तैनाती है, जिसमे मात्र दो डॉक्टर राकेश चन्द यादव व अजय अग्रहरी ही नौ बजे पहुंचे। एक्सरे कक्ष में राम रक्षा यादव मौजूद मिले, वही डार्क रूम सहायक अवनीश कुमार नदारद दिखे। चीफ फार्मासिस्ट राजेश चौधरी व वार्ड बॉय नूरुद्दीन ड्यूटी पर पाए गए। स्टाफ नर्स कक्ष में नर्स नही थी। स्टॉप नर्स में श्रीमती प्रतिमा, अंजली, सविता चौधरी, पूनम की तैनाती है। वही पीआईसीयू में ताला बंद मिला। यहां कार्यरत अजय कुमार गौतम, अमित कुमार, अनुज, श्रीमती अनिता की तैनाती है लेकिन इनमें से कोई भी ड्यूटी पर नही दिखा। सीएमओ डॉक्टर रामानुज कन्नौजिया ने कहा- मरीज के आने से पहले डॉक्टर बैठ जाते हैं, लेकिन अगर ऐसी कोई शिकायत आएगी तो इसकी जांच कराई जाएगी।
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संतकबीरनगर की सीएचसी में 9 बजे तक सन्नाटा, डॉक्टर नदारद:लोहरसन और सेमरियावां में खाली कुर्सियां मिलीं, हैंसर में 9 बजे तक इंतजार करते रहे मरीज
