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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अमृतसर की सेंट्रल जेल में बंद अपने भाई के लिए कोल्ड क्रीम के डिब्बों में छिपाकर हेरोइन लाने के आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि जेल के अंदर नशा पहुंचाने का मामला सिर्फ जेल की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे समाज पर पड़ता है। मामले में जांच के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ की जरूरत को भी कोर्ट ने अहम माना। जस्टिस नीरजा के. कलसन ने कहा कि जेल में नशीले पदार्थ पहुंचने से जेल की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। साथ ही, इससे उस अपराध को बढ़ावा मिल सकता है, जिसे रोकने और अपराधियों को सुधारने के लिए जेल व्यवस्था बनाई गई है। कोल्ड क्रीम के दो डिब्बों में छिपाए सरकारी वकील के अनुसार, आरोपी अमृतसर सेंट्रल जेल में बंद अपने भाई राजविंदर सिंह उर्फ रिंका से मिलने गया था। उसका भाई एक मामले में विचाराधीन कैदी है। आरोपी ने भाई के लिए जेल में कुछ सामान जमा करवाया था। भाई के बयान के आधार पर फंसाया जेल अधिकारियों ने जब सामान की जांच की तो एमामी कोल्ड क्रीम के दो डिब्बों के अंदर से दो पैकेट मिले। इनमें करीब 43.95 ग्राम हेरोइन और 44.05 ग्राम तंबाकू था। पुलिस ने इस मामले में 29 जुलाई 2026 को अमृतसर के इस्लामाबाद थाने में एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 और 29 तथा जेल एक्ट की धारा 42 के तहत एफआईआर दर्ज की थी। आरोपी के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि उसे झूठा फंसाया गया है। उसका नाम सह-आरोपी भाई के खुलासे के बाद सामने आया है। वकील के अनुसार, आरोपी केवल अपने भाई से मिलने जेल गया था। जेल अधिकारियों ने सामान की जांच की थी और आरोपी के पास से सीधे कुछ बरामद नहीं हुआ था। बचाव पक्ष ने कहा कि सह-आरोपी के बयान के अलावा आरोपी के खिलाफ कोई स्वतंत्र सबूत नहीं है। इसलिए उसे अग्रिम जमानत दी जानी चाहिए। वहीं, पंजाब सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि सह-आरोपी ने 31 जुलाई 2026 के बयान में आरोपी की भूमिका बताई थी। सरकार के अनुसार, आरोपी से हिरासत में पूछताछ जरूरी है, ताकि पता लगाया जा सके कि हेरोइन कहां से लाई गई, उसे डिब्बों में कैसे छिपाया गया और क्या इस काम में दूसरे लोग भी शामिल थे। इससे पहले अमृतसर की विशेष अदालत भी 3 सितंबर 2026 को आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुकी थी। केवल बयान पर नहीं टिका मामला हाईकोर्ट ने माना कि सह-आरोपी का खुलासा अपने आप में अपराध साबित करने का ठोस सबूत नहीं होता। लेकिन कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर यह तय करना जरूरी नहीं है कि आरोपी का अपराध में शामिल होना पूरी तरह साबित हुआ है या नहीं। सवाल यह है कि जांच के दौरान सामने आई परिस्थितियां उसे गिरफ्तारी से पहले जमानत देने की अनुमति देती हैं या नहीं। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने आरोपी की भूमिका स्पष्ट रूप से बताई है और जेल अधिकारियों ने उसके जमा करवाए सामान की जांच के दौरान नशीले पदार्थ बरामद किए हैं। केवल इस वजह से कि सामान की जांच हुई थी, यह तय नहीं हो जाता कि आरोपी को उसमें छिपी हेरोइन की जानकारी थी या नहीं। कोर्ट के अनुसार, जेल के अंदर सामान पहुंचाने और उसकी जांच के लिए तय प्रक्रिया होती है। इसलिए जांच में यह पता लगाना जरूरी है कि नशीला पदार्थ कहां से आया, उसे कैसे छिपाया गया और उसे जेल के अंदर किस तरह पहुंचाने की योजना थी। हिरासत में पूछताछ की जरूरत को माना अहम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हिरासत में पूछताछ की मांग हर मामले में अपने आप स्वीकार नहीं की जा सकती। इसके लिए जांच की जरूरत से उसका उचित संबंध होना चाहिए। हालांकि, इस मामले में हेरोइन की बरामदगी की परिस्थितियों और आरोपी की बताई गई भूमिका को देखते हुए कोर्ट ने जांच के लिए हिरासत में पूछताछ की जरूरत को महत्व दिया। कोर्ट ने यह भी माना कि बरामद नशीले पदार्थ की मात्रा व्यावसायिक श्रेणी में नहीं आती, इसलिए एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 की कड़ी शर्तें लागू नहीं होतीं। लेकिन कोर्ट ने कहा कि इन शर्तों का लागू न होना अपने आप में अग्रिम जमानत पाने का अधिकार नहीं देता।
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हाईकोर्ट ने हेरोइन तस्करी में आरोपी की जमानत ठुकराई:कोल्ड क्रीम के डिब्बों में मिला था नशा; अमृतसर सेंट्रल जेल का मामला
