नई दिल्ली3 मिनट पहले
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राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे लगातार दूसरे साल लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं हुए। 2025 में भी दोनों ने हिस्सा नहीं लिया था।
इस पर भाजपा ने कहा कि राहुल नेता प्रतिपक्ष बनने के लायक नहीं हैं। उनकी सोच दिमागी नक्सल जैसी है।
रक्षा मंत्रालय ने राहुल और खड़गे को स्वतंत्रता दिवस समारोह का औपचारिक निमंत्रण भेजा था। हालांकि, दोनों कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। इसके पीछे 2024 का विवाद बताया जा रहा है। उस समय कांग्रेस ने राहुल की सीटिंग व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई थी।

2024 में राहुल गांधी को 5वीं लाइन में बैठाया गया था।
कांग्रेस बोली- भाजपा को हर चीज में अपमान दिखता है
- कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा- जिन्होंने आजादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया, उन्हें हर चीज में अपमान नजर आता है।
- भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी- राहुल लाल किले पर मौजूद रहने से बचते हैं। क्या कोई देशभक्त नेता प्रतिपक्ष या सार्वजनिक पद पर बैठा व्यक्ति जानबूझकर ऐसा कर सकता है? उनका समारोह में नहीं आने का फैसला वंदे मातरम के प्रति उनकी नफरत दिखाता है।
2024 में पीछे की लाइन में बैठाने पर हुआ था विवाद
2014 के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद खाली था, क्योंकि किसी पार्टी के पास जरूरी 55 सीटें नहीं थीं। 2014 में कांग्रेस को 44 और 2019 में 52 सीटें मिली थीं।
2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 99 सीटें जीतीं। इसके बाद राहुल लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बने थे। इस साल लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह में उन्हें 5वीं पंक्ति में बैठाया गया था।
कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सरकार ने राहुल को पीछे की सीट देकर नेता प्रतिपक्ष के पद का अपमान किया है।
रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि समारोह में पहुंचे ओलंपिक खिलाड़ियों को विशेष सम्मान देने और आगे बैठाने के कारण क्रम में बदलाव करना पड़ा था।
कैबिनेट मंत्री के साथ बैठते हैं विपक्ष के नेता
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष के बैठने की जगह ‘टेबल ऑफ प्रेसिडेंस’ (ToP) के नियमों के आधार पर तय की जाती है।
राष्ट्रपति सचिवालय के नियमों के मुताबिक लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की रैंक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के समकक्ष होती है और बैठने की व्यवस्था इसी के हिसाब से की जाती है।

