छत्तीसगढ़ के चर्चित CGPSC भर्ती घोटाले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भी एंट्री हो गई है। CBI जांच के बाद अब ED इस मामले में कथित मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच करेगी। ED ने जेल में बंद CGPSC के पूर्व चेयरमैन एवं रिटायर्ड IAS अधिकारी टामन सिंह सोनव
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ED ने रायपुर स्पेशल कोर्ट में सोनवानी की एक सप्ताह की रिमांड की मांग की थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने ED की मांग स्वीकार करते हुए सोनवानी को 31 जुलाई तक 7 दिन की रिमांड पर सौंप दिया। माना जा रहा है कि पूछताछ में भर्ती प्रक्रिया में पैसों के लेन-देन, अवैध कमाई और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
ED के वकील सौरभ पांडेय ने बताया कि जांच में पाया गया कि अभ्यर्थियों के चयन के बदले पैसे लेने के आरोप हैं। इसके लिए ग्रामीण विकास समिति के नाम से एक माध्यम तैयार किया गया था। सौरभ के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया कि कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के जरिए बजरंग पावर लिमिटेड से समिति के खाते में ₹45 लाख ट्रांसफर कराए गए।
जिस समिति का उपयोग किया गया, उसमें अधिकांश सदस्य टामन सिंह सोनवानी के परिजन या उनके करीबी बताए गए हैं। ईडी का आरोप है कि इसी माध्यम से धन का लेन-देन किया गया और उसके बदले चयन प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।

रायपुर कोर्ट से ईडी ने टामन सिंह सोनवानी को किया गिरफ्तार।

CBI पहले ही कर चुकी है गिरफ्तारी
CBI ने 2 साल पहले CGPSC के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार किया था। उनके साथ बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के डायरेक्टर श्रवण कुमार गोयल को भी गिरफ्तार किया गया था।
CBI का आरोप है कि CGPSC की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं और कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर, DSP समेत अन्य पदों पर चयनित कराने के लिए अवैध लेन-देन हुआ।

VIP लोगों के रिश्तेदारों का चयन करने का आरोप
CBI के मुताबिक, सोनवानी के कार्यकाल में PSC में हुई भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। आरोप है कि, उन्होंने अपने कई करीबी रिश्तेदारों और कांग्रेस नेताओं और अधिकारियों के 18 रिश्तेदारों की नौकरी लगवाई है। जांच में पैसों के लेन-देन के पुख्ता सबूत मिले हैं।

CBI की जांच में क्या सामने आया ?
CBI के मुताबिक, टामन ने परीक्षा के पर्चे अपने घर पर साहिल, नीतेश, उसकी पत्नी निशा कोसले और दीपा आडिल को दिए। इसके बाद उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर ने लीक हुआ पेपर बजरंग पावर एंड इस्पात कंपनी के डायरेक्टर श्रवण गोयल को सौंपा। श्रवण गोयल के बेटे शशांक और बहू भूमिका ने इसी लीक पेपर से तैयारी की। परिणामस्वरूप दोनों डिप्टी कलेक्टर बन गए।

आरोप है कि श्रवण गोयल के बेटे बहू ने भी इसी लीक पेपर से तैयारी की थी।
कोलकाता से रायपुर तक साजिश
प्रश्नपत्र छापने का काम कोलकाता की एक प्रिंटिंग कंपनी को दिया गया था। जनवरी 2021 में कंपनी का कर्मचारी महेश दास 7 सेट प्रश्नपत्र लेकर रायपुर आया। उसने ये सभी पर्चे आरती वासनिक को सौंपे।
आरती पर्चे घर ले गईं, जहां टामन और ललित के साथ मिलकर उनकी कॉपी की गई। इसके बाद पर्चों को दोबारा सील कर प्रिंटिंग के लिए वापस भेज दिया गया।

घोटाले का मास्टरमाइंड टामन सिंह, अभी जेल में बंद है।
जानिए क्या है CGPSC घोटाला
यह मामला CGPSC 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है। आरोप है कि आयोग की परीक्षाओं और इंटरव्यू में पारदर्शिता को दरकिनार कर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों के उम्मीदवारों को उच्च पदों पर चयनित किया गया।
इस दौरान योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी कर डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर अपने नजदीकी लोगों को पद दिलवाने का खेल हुआ। प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी। जांच एजेंसी ने छापेमारी में कई दस्तावेज और आपत्तिजनक साक्ष्य बरामद किए हैं।
171 पदों के लिए हुई थी भर्ती परीक्षा
CGPSC परीक्षा 2021 में 171 पदों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। प्री-एग्जाम 13 फरवरी 2022 को कराया गया। इसमें 2 हजार 565 पास हुए थे। इसके बाद 26, 27, 28 और 29 मई 2022 को हुई मेंस परीक्षा में 509 अभ्यर्थी पास हुए। इंटरव्यू के बाद 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की सिलेक्शन लिस्ट जारी हुई थी।
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