जल जीवन मिशन घोटाले में जेल में बंद पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने सुबोध अग्रवाल के खिलाफ केस चलाने (अभियोजन स्वीकृति) के लिए परमिशन मांगी है।
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ACB के अफसरों ने इस घोटाले में सुबोध अग्रवाल के खिलाफ सबूत की फाइल कार्मिक विभाग (DOP) भेजी है। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में फैसला मुख्यमंत्री स्तर पर होगा। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
20 जुलाई को एप्लीकेशन दी
कार्मिक विभाग (DOP)के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया- एसीबी ने 20 जुलाई को अभियोजन स्वीकृति की एप्लीकेशन दी है।
एसीबी के सबूत और डॉक्यूमेंट्स देखने के बाद विभाग नोटशीट तैयार करेगा। इसके बाद मामले की फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी। स्वीकृति देने या न देने का निर्णय मुख्यमंत्री लेंगे।

दरअसल, एसीबी ने जल जीवन मिशन में 979.27 करोड़ के फर्जी टेंडर मामले में रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल के खिलाफ 30 अक्टूबर 2024 को एफआईआर दर्ज की थी।
इसके बाद 9 अप्रैल को सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी हुई थी। इससे पहले 4 जून को इस पूरे घोटाले की चार्जशीट एसीबी ने कोर्ट में पेश कर दी थी।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 19 के तहत दागी कार्मिकों पर अभियोजन स्वीकृति देने के लिए अधिकतम 4 महीने की समय-सीमा निर्धारित है।
सरकार ने 13 अप्रैल 2012 को परिपत्र जारी कर सक्षम प्राधिकारियों को हर हाल में 4 महीने में निर्णय करने के सख्त निर्देश दिए थे।
सीनियर एडवोकेट प्रतीक कासलीवाल का कहना है- एसीबी आरोपी के खिलाफ कोर्ट में बिना अभियोजन के चालान पेश कर सकती है, लेकिन बिना अभियोजन के कोर्ट मामले में प्रसंज्ञान नहीं ले सकता।

सुबोध अग्रवाल पर क्या हैं आरोप?
केंद्र सरकार की योजना जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश के जलदाय विभाग ने 2023 में करीब 979 करोड़ का टेंडर निकाला था। आरोप हैं जलदाय विभाग (PHED) के तत्कालीन एसीएस सुबोध अग्रवाल ने पद का दुरुपयोग करते हुए टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की।
फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाने वाली फर्मों को टेंडर जारी कर शर्तों में हेराफेरी की गई। एसीबी अफसरों के मुताबिक पूर्व आईएएस के खिलाफ 50 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्ट्स मंजूर करने के भी आरोप हैं।

टॉप ब्यूरोक्रेट्स से लेकर ‘घोटाले’ का प्रमुख चेहरा कैसे बने?
- सुबोध अग्रवाल राजस्थान कैडर के 1988 बैच के रिटायर्ड आईएएस हैं। आईआईटी दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक (1987) किया, उसके बाद प्रिंसटन विश्वविद्यालय से लोक नीति में मास्टर डिग्री और अर्थशास्त्र में पीएचडी हासिल की।
- प्रदेश में बतौर IAS अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर, जिला मजिस्ट्रेट और प्रबंध निदेशक सहित विभिन्न पदों पर रहे। 31 दिसंबर, 2025 को सुबोध अग्रवाल रिटायरमेंट हो गए।
- सितंबर 2023 में एसीबी ने फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर टेंडर हासिल करने के आरोप में श्याम ट्यूबवैल और गणपति ट्यूबवैल के खिलाफ एआईआर दर्ज की।
- फर्म के संचालकों ने कथित रूप से इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र तैयार किए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर PHED विभाग में करीब 979.27 करोड़ रुपए के टेंडर हासिल किए गए। उस दौरान PHED विभाग के एसीएस सुबोध अग्रवाल थे।

7 अगस्त, 2023 के एसीबी ने पीएचईडी इंजीनियर मायालाल सैनी, प्रदीप के साथ ठेकेदार पदमचंद जैन और कंपनी के सुपरवाइजर मलकेत सिंह को पकड़ा था। दलाल प्रवीण गुप्ता भी गिरफ्तार हुआ था।
इनके पास से 2.90 लाख रुपए कैश जब्त किया था। तत्कालीन बहरोड़ एईएन राकेश चौहान की भूमिका संदिग्ध सामने आने के बाद उसे भी अरेस्ट कर लिया।
पदमचंद जैन और महेश मित्तल ने जेजेएम में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र लगाए थे। तत्कालीन पीएचएडी मंत्री हमेश जोशी पर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर लगभग 960 करोड़ रुपए के टेंडर जारी करने और रिश्वत लेने के गंभीर आरोप हैं।

एसीबी अधिकारियों का दावा है कि उनके पास रिटायर्ड आईएएस के खिलाफ घोटाले में शामिल होने के पूरे सबूत हैं।
दिल्ली से किया था गिरफ्तार
9 अप्रैल 2026 को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) टीम ने जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले में फरार चल रहे पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल को गुरुवार को गिरफ्तार किया था।
पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल के खिलाफ जेजेएम घोटाले में गिरफ्तारी वारंट जारी था। जानकारी के अनुसार साल 2024 में शुरू हुई जांच में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 3 आरोपी फरार हैं।
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