सोनीपत2 घंटे पहलेलेखक: राम सिंहमार
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हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान मर्डर केस की जांच अब गैंगस्टर राहुल उर्फ भोलू शाहपुरिया के गांव शाहपुर तक पहुंच गई है। भोलू शाहपुरिया ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस हत्याकांड की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था। इसके बाद से यूपी पुलिस की गांव में लगातार रेड चल रही है।
पुलिस की कार्रवाई के बीच गांव में ऐसा माहौल बन गया है कि करीब 20 युवा अपना कामकाज और नौकरी छोड़कर अंडरग्राउंड हो गए हैं। दिन में चहल-पहल वाली गलियां रात होते ही सुनसान नजर आती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रात में पुलिस की गाड़ियां और सिविल ड्रेस में आने वाले लोग घूमते दिखाई देते हैं। कई गाड़ियों पर नंबर प्लेट तक नहीं होती, जिससे लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर इनमें कौन आ रहा है।
दैनिक भास्कर टीम गांव में फैली इस दहशत की हकीकत जानने पहुंची तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। ग्रामीणों के मुताबिक, रात में ड्रोन से भी निगरानी रखी जाती है। वहीं, भोलू शाहपुरिया के चाचा रमेश का कहना है कि कई परिवारों को अब यह डर सताने लगा है कि कहीं उनका बच्चा सुसाइड जैसा कदम न उठा ले।
शाहपुर में पुलिस रेड के बाद कैसे बदले हालात, गांव के लोग क्या कह रहे हैं और क्यों युवा घर छोड़ने को मजबूर हुए… पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट।

गांव शाहपुर में दहशत की कहानी, ग्रामीणों की जुबानी…
- रात में गाड़ियां आती हैं, पहचानना मुश्किल: गांव शाहपुर सोनीपत जिला मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर है। गांव में एंट्री करते ही ग्रामीण सुमेर मिले। भोलू शाहपुरिया का नाम लेते ही वह तपाक से कहते हैं कि जब से भोलू के नाम से अंकित हत्याकांड की जिम्मेदारी लेने की बात सामने आई है, तब से गांव में डर बढ़ गया है। रात में गाड़ियां घूमती रहती हैं। कई गाड़ियों पर नंबर प्लेट तक नहीं होती, जिनमें सिविल ड्रेस में लोग दिखाई देते हैं। ऐसे में गांव वालों को समझ नहीं आता कि सामने पुलिस है या कोई और।
- रात में ड्रोन देखकर लोग घरों में सिमट जाते हैं: कुछ दूर चलने पर कर्म सिंह मिले। गांव के माहौल का जिक्र करते हुए वह कहते हैं कि पुलिस कभी भी रात में पहुंच जाती है। रात के समय ड्रोन भी उड़ाए जाते हैं और निगरानी रखी जाती है। सिविल ड्रेस में आने वाले लोगों को पहचानना मुश्किल होता है। इसी वजह से ग्रामीणों में लगातार बेचैनी बनी रहती है।
- नौकरी करने वाले कई लड़के गांव से बाहर: एक और ग्रामीण दिलावर बताते हैं कि गांव के करीब 20 से 25 युवक सरकारी और प्राइवेट नौकरी करते हैं। पुलिस की लगातार रेड के डर से कई लड़के गांव छोड़कर चले गए हैं। डर यह है कि कहीं किसी को गलत मामले में न फंसा दिया जाए। वह कहते हैं कि भोलू से गांव का कोई लेना-देना नहीं है और उसके परिवार ने भी उससे नाता तोड़ रखा है। गांव पहले शांत था, लेकिन अब एक व्यक्ति के मामले का असर पूरे गांव पर पड़ रहा है।

- अगर भोलू ने अपराध किया है तो सजा मिले: गांव के भीतरी हिस्से में 60 साल से अधिक उम्र के जयकिशन शर्मा मिले। वे बताते हैं कि अगर भोलू ने अपराध किया है तो उसे कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए, लेकिन पुलिस का बार-बार गांव की गलियों में आना लोगों को परेशान कर रहा है। भोलू का छोटा भाई रितेश भी घर से चला गया है। वह अपनी मां का सहारा था। भोलू अपने पिता की मौत पर भी घर नहीं आया। उत्तर प्रदेश पुलिस को गांव में जांच करनी है तो वर्दी में आए और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में पूछताछ करे। गांव जांच में पूरा सहयोग करेगा।
- आहट होते ही दरवाजे खुल जाते हैं: जयकिशन शर्मा गांव के बदले माहौल का एक और दृश्य बताते हैं। वे कहते हैं कि अब गली में थोड़ी सी भी आहट होती है तो लोग घरों से निकलकर देखने लगते हैं। महिलाएं अकेले घर में रहने से घबराती हैं और बच्चों में भी डर बैठ गया है। गांव की आबादी करीब 2,500 है और लगभग 1,580 वोट हैं। बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों को लेकर भी लोगों में चिंता है कि आखिर इनमें कौन आ रहा है और किस काम से।
- दिन में आए पुलिस, स्थानीय पुलिस को साथ लाए: धर्मवीर कहते हैं कि मौजूदा माहौल का असर बच्चों पर भी पड़ रहा है। उनकी सीधी मांग है कि पुलिस को अगर पूछताछ या कोई कार्रवाई करनी है तो दिन के समय करे और स्थानीय पुलिस को साथ लेकर आए। गांव पुलिस का विरोध नहीं कर रहा। जांच में ग्रामीण पूरा सहयोग करेंगे, लेकिन कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए जिससे निर्दोष लोगों में डर पैदा न हो।
- हम अपने गांव में ही कैद होकर रह गए: अजीत सिंह बताते हैं कि उनका भतीजा आरके कॉलोनी में दुकान करता है और मुरथल से गांव लौटते समय उससे भी पूछताछ होती है। उन्होंने एक घटना बताते हुए कहा कि शाम को पति-पत्नी गांव से बाहर घूमने निकले तो गांव के बाहर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोककर वापस जाने को कहा। कभी वर्दी में तो कभी सिविल ड्रेस में लोग दिखाई देते हैं। इसी वजह से ग्रामीणों में यह डर है कि कहीं उनके बच्चों को भी उठाकर किसी मामले से न जोड़ दिया जाए।

चार साल से गांव नहीं आया भोलू
भोलू की मां राजपति बताती हैं कि भोलू ने 12वीं तक पढ़ाई की और पढ़ाई में अच्छा था। करीब चार साल पहले वह काम के लिए बाहर गया था। इसी दौरान कुमासपुर के एक विवाद में उसका नाम आया और बाद में हत्या के मामले में भी नाम जुड़ गया। इसके बाद से वह गांव नहीं आया।
राजपति आगे बताती हैं कि उनके परिवार में चार बेटियां शादीशुदा हैं और दूसरा बेटा रितेश भी अब घर पर नहीं है। उनके पति सुरेश खेती करते थे। रितेश प्रॉपर्टी डीलिंग करता था, लेकिन करीब 10 महीने से पिता की सेवा के लिए काम छोड़ रखा था।
राजपति के मुताबिक सुरेश की 26 जुलाई को मौत हुई। इस दौरान श्मशान के आसपास रातभर पुलिस मौजूद रही, जिसकी वजह से भोलू पिता के अंतिम संस्कार में भी नहीं आया। वह साफ कहती हैं कि अब परिवार का भोलू से कोई नाता नहीं है।

शाहपुर गांव में मंगलवार को हुई पंचायत में पहुंचे लोग।
पंचायत में अंकित के परिवार के साथ खड़े होने का दावा
मंगलवार की पंचायत में ग्रामीणों ने अंकित बालियान की हत्या पर दुख जताया और उसके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। ग्रामीणों का कहना था कि अंकित की मौत से पूरा गांव दुखी है। पूरा गांव उसके परिवार के साथ खड़ा है।
पंचायत में फैसला लिया गया कि ग्रामीण अंकित हत्याकांड के दोषियों को पकड़वाने में पुलिस की मदद करेंगे। इसके साथ ही ग्रामीणों ने पुलिस से कहा कि कार्रवाई अपराधी तक सीमित रहे और किसी निर्दोष युवक को केवल रिश्तेदारी या गांव से संबंध के आधार पर परेशान न किया जाए।
भोलू शाहपुरिया की हत्या की जिम्मेदारी लेने वाली पोस्ट…


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