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समोसे में कॉकरोच मिलने की घटना ने इंदौर के स्ट्रीट फूड की साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। स्वाद और खानपान के लिए देशभर में पहचान रखने वाले शहर में दैनिक भास्कर की टीम ने करीब 50 स्ट्रीट फूड स्टॉल का जायजा लिया। ग्राहकों को सामने से साफ नजर आने वाले कई ठेलों और दुकानों के पीछे की तस्वीर अलग मिली। कहीं खुले डस्टबिन के पास खाद्य सामग्री रखी थी, तो कहीं खुले में रखे समोसे-कचोरी और पकौड़ों पर मक्खियां मंडरा रही थीं। कई जगह खाना बनाने और परोसने वाले कर्मचारी ग्लव्स और कैप के बिना काम करते मिले। काउंटर साफ, लेकिन पीछे गंदगी का अंबार कई स्टॉल पर ग्राहक के सामने का हिस्सा व्यवस्थित नजर आया, लेकिन खाना बनाने की जगह के आसपास कचरा जमा मिला। खुले डस्टबिन और उनके आसपास रखी खाद्य सामग्री के कारण संक्रमण का खतरा नजर आया। कई जगह समोसे, कचोरी और पकौड़े बिना ढके रखे मिले, जिससे वे धूल और मक्खियों के सीधे संपर्क में थे। विजय नगर: सफाई के हाथ से ही परोसे जा रहे पकौड़े विजय नगर में बारिश के दौरान पकौड़े की स्टॉल पर भीड़ थी, लेकिन सफाई के इंतजाम संतोषजनक नहीं मिले। कर्मचारी जिस हाथ से सफाई कर रहा था, उसी हाथ से खाद्य सामग्री परोसता नजर आया। पकौड़ों के पास ही खुला कचरे का डिब्बा भी रखा था। स्कीम नंबर 78: कचरे के ठीक ऊपर खाना बनाने का सामान स्कीम नंबर 78 में मंचूरियन में इस्तेमाल होने वाला पानी हरे प्लास्टिक टब में रखा मिला। खाना बनाने की जगह के नीचे ही कचरे का डिब्बा था। डस्टबिन के ऊपर खाना पकाने के बर्तन और सामग्री रखी थी। कर्मचारी बिना ग्लव्स खाद्य सामग्री मिलाते नजर आया। MR-9: खुले समोसे-कचोरी पर मंडराती मक्खियां MR-9 रोड पर एक स्टॉल पर समोसे और कचोरी खुले में रखे मिले। इनके ऊपर मक्खियां मंडरा रही थीं। खाद्य सामग्री को धूल और कीड़ों से बचाने के लिए ढकने की व्यवस्था नहीं थी। छप्पन दुकान: पीछे के किचन में भी लापरवाही इंदौर की प्रसिद्ध छप्पन दुकान में भी कुछ स्थानों पर किचन की हाइजीन व्यवस्था कमजोर मिली। कर्मचारी बिना ग्लव्स और कैप खाना तैयार करते नजर आए, जबकि डस्टबिन भी खुले हुए थे। 60 फीट रोड, पाटनीपुरा, मालवा मिल और कालानी नगर के स्ट्रीट फूड स्टॉल पर भी साफ-सफाई से जुड़ी कमियां नजर आईं। बारिश में फूड पॉइजनिंग के मरीज 30% तक बढ़े पेट रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश शिवहरे के अनुसार बारिश के मौसम में फूड पॉइजनिंग के मामले करीब 30% तक बढ़ जाते हैं। दूषित पानी और भोजन से डायरिया, उल्टी और अन्य संक्रमण हो सकते हैं। गंभीर स्थिति में संक्रमण किडनी फेल्योर या मल्टी-ऑर्गन फेल्योर जैसी जटिलताओं तक पहुंच सकता है। इस मौसम में वायरल हेपेटाइटिस ए और ई के मामले भी बढ़ते हैं। बाहर खाना है तो ये सावधानी रखें डॉ. शिवहरे के मुताबिक बाहर खाना खाते समय स्टॉल की साफ-सफाई और इस्तेमाल होने वाले पानी की गुणवत्ता जरूर देखें। खुले में रखी खाद्य सामग्री से बचें, साफ पानी पिएं और खाना खाने से पहले हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखें। फूड विभाग: गंदगी मिली तो कार्रवाई होगी मुख्य खाद्य अधिकारी मनीष स्वामी ने बताया कि खाद्य विभाग की टीम लगातार स्ट्रीट फूड स्टॉल का निरीक्षण कर रही है। जहां भी गंदगी या नियमों का उल्लंघन मिलता है, वहां कार्रवाई की जाती है। समोसे में कॉकरोच मिलने की शिकायत के बाद टीम रतलाम नमकीन कॉर्नर भी पहुंची थी। जांच के दौरान संचालक के पास पेस्ट कंट्रोल का सर्टिफिकेट नहीं मिला। अक्टूबर 2025 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तलावली चांदा में 8.30 करोड़ रुपए की लागत से खाद्य जांच लैब का लोकार्पण किया था, लेकिन अब तक यहां जांच शुरू नहीं हो पाई है।
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कचरे के पास बन रहे पकौड़े, कचोरी-समोसे पर भिनभिनाती मक्खियां:इंदौर के 50 स्ट्रीट फूड स्टॉल में हाइजीन का रियलिटी चेक, बारिश में फूड पॉइजनिंग के मरीज 30% तक बढ़े
