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भास्कर न्यूज | बलरामपुर जब जिले की कमान संभालने वाली अफसर अचानक क्लासरूम में पहुंचकर खुद डस्टर-चॉक संभाल ले या बच्चों के सामने किताब खोलकर सवाल पूछने लगे तो व्यवस्था का चौकन्ना होना लाजिमी है। कुछ ऐसा ही नजारा बलरामपुर जिले में देखने को मिला, जब कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने प्राथमिक शाला कोठीखाड़, तलैयापारा, बड़कागांव हाई स्कूल और इंजानी छात्रावास का निरीक्षण किया। निरीक्षण केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहा; कलेक्टर ने न सिर्फ शिक्षा का स्तर जांचा, बल्कि मध्याह्न भोजन में बेहतर सुधार के निर्देश देते हुए हरी सब्जियों का इस्तेमाल करने सुझाव दिए। उन्होंने शिक्षकों को हिदायत दी कि पढ़ाई ऐसी हो जो बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाएं, न कि उनमें डर पैदा करे। नवाचार की सराहना और बड़े सपनों का पाठ: कबाड़ से जुगाड़ और बच्चों की रचनात्मकता की कलेक्टर ने दिल खोलकर तारीफ की। छात्रावास के एक छात्र द्वारा बेकार कागज से बनाए गए सुंदर होल्डर को देखकर उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां व्यक्तित्व निखारती हैं। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि परिस्थितियां जैसी भी हों, हमेशा बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए जी-तोड़ मेहनत करें। कलेक्टर जब बड़कागांव के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 12वीं की क्लास में पहुंचीं, तो उन्होंने छात्रों की विषयगत समझ परखने के लिए अर्थशास्त्र से जुड़े गहरे सवाल पूछे। उन्होंने छात्रों से पूछा कि प्राथमिक क्षेत्र (कृषि व प्राकृतिक संसाधन), द्वितीयक क्षेत्र (उत्पादन व निर्माण) और तृतीयक क्षेत्र (सेवाएं व व्यापार) क्या होते हैं और अर्थव्यवस्था में इनकी क्या भूमिका है? प्राथमिक शाला में उन्होंने बच्चों से पहाड़ा सुना और साफ लिखावट का अभ्यास कराया। निरीक्षण में प्रशासनिक कसावट का सीधा असर जमीनी व्यवस्था पर दिखा। तलैयापारा में मध्याह्न भोजन का जायजा लेते हुए कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चों की थाली में न्यूट्रिशन से समझौता नहीं होगा मेन्यू में अनिवार्य रूप से हरी सब्जियां शामिल की जाएं। इंजानी प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास के निरीक्षण के दौरान जब शयनकक्षों की खिड़कियों पर मच्छर-रोधी जाली नहीं दिखी, तो उन्होंने अधिकारियों को तत्काल जाली लगाने और कमरों की अव्यवस्था दुरुस्त करने की कड़ी चेतावनी दी।
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कलेक्टर बनीं मास्टर साहब… पहाड़ा और इकोनॉमिक्स के सवाल पूछे
