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अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए संतुलित और बीमारी के अनुकूल आहार इलाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन रांची सदर अस्पताल में मरीजों की थाली के साथ खिलवाड़ हो रहा है। यहां मरीजों को न मानकों के अनुरूप आहार मिलता है और न ही डाइट चार्ट का पालन हो रहा है। चाहे सामान्य बीमारी वाले मरीज हों या फिर गंभीर बीमारी से पीड़ित, सभी को रोजाना एक ही तरह का भोजन दिया जाता है। यही नहीं, भोजन परोसने के लिए भी जंग लगे बर्तनों का इस्तेमाल होता है। यह स्थिति तब है, जब आउटसोर्स कंपनी को सिर्फ नौ महीने में ही 1.37 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। यह खुलासा महालेखाकार (कैग) की ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट में सिर्फ भोजन की गुणवत्ता पर ही सवाल नहीं उठाए गए हैं, बल्कि पानी की उपलब्धता, डाइट रजिस्टर, मरीजों के पोषण आकलन,रसोई की स्वच्छता, गुणवत्ता जांच और रसोइयों के स्वास्थ्य परीक्षण तक में गंभीर कमियां गिनाई गई हैं। यह ऑडिट जनवरी 2017 से जनवरी 2026 तक के लिए की गई थी। ऑडिट में रोकड़ बही, विपत्र बही, वेतन नामावली, आवंटन पंजी, पत्राचार-खरीद व योजना की फाइल, प्रगति रिपोर्ट और कोषागार विवरणी की जांच की गई थी। जानिए…कैग की रिपोर्ट में और क्या-क्या खामियां गिनाईं मरीजों का नहीं हुआ पोषण आकलन अस्पताल में डायटिशियन का पद स्वीकृत है। लेकिन मरीजों का पोषण आकलन नहीं किया गया। ऑडिट में पाया गया कि मरीजों की कैलोरी जरूरत निर्धारित करने, आहार संबंधी परामर्श देने और बीमारी के अनुसार भोजन की योजना तैयार करने की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। यह कमी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हर मरीज की भोजन संबंधी जरूरत अलग होती है। मधुमेह, कुपोषण, ऑपरेशन के बाद की स्थिति, गंभीर बीमारी या उच्च प्रोटीन की जरूरत वाले मरीजों के लिए भोजन की मात्रा और प्रकृति अलग होती है। भोजन की गुणवत्ता जांचने की भी कोई व्यवस्था नहीं
रिपोर्ट में भोजन की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक भोजन की गुणवत्ता जांचने की अस्पताल में कोई एसओपी नहीं थी। आउटसोर्स एजेंसी के साथ हुए अनुबंध में भी अस्पताल प्रबंधन की ओर से भोजन की गुणवत्ता जांच का पर्याप्त प्रावधान शामिल नहीं था। आहार सेवा का आंतरिक मूल्यांकन और उसके परिणामों का भी आकलन नहीं किया गया। कैग ने इसे आउटसोर्स एजेंसी पर कमजोर निगरानी और नियंत्रण का संकेत माना है। इसे तत्काल सुधारने की जरूरत बताई है। रसोई में न मास्क-दस्ताने, न कर्मचारियों का स्वास्थ्य परीक्षण… ऑडिट टीम ने रसोई और भोजन व्यवस्था का भौतिक निरीक्षण किया था। इसमें पाया कि रसोई के कर्मचारी न तो मास्क का प्रयोग करते हैं, न दस्ताने का। इन कर्मचारियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण भी नहीं हो रहा था। क्योंकि इनके स्वास्थ्य परीक्षण का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। यही नहीं, आउटसोर्स एजेंसी के साथ किए गए अनुबंध में भी इन कर्मचारियों के स्वास्थ्य परीक्षण का प्रमाण नहीं था।
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कैग की रिपोर्ट में खुली आहार व्यवस्था की पोल:सदर अस्पताल में हर मरीज को एक ही खाना, जंग लगे बर्तनों में परोस रहे भोजन
