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विश्व स्तनपान सप्ताह-2026 के अवसर पर पटना के गंगा देवी महिला महाविद्यालय में “ह्यूमन मिल्क माइक्रोबायोम: बेनिफिट्स फॉर इन्फेंट हेल्थ” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मातृ दुग्ध के वैज्ञानिक महत्व, शिशुओं की प्रतिरक्षा क्षमता और स्वस्थ विकास में इसकी भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. (डॉ.) श्यामा राय ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने शिशुओं के समुचित पोषण और स्वस्थ विकास के लिए स्तनपान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे शैक्षणिक एवं जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक संदेश प्रसारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम का संचालन गृह विज्ञान विभाग एवं न्यूट्रिशन क्लब की संयोजक डॉ. विद्या ने आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. भाव्या झा के सहयोग से किया। उन्होंने मुख्य वक्ता, प्राचार्या, शिक्षकगण एवं छात्राओं का स्वागत करते हुए विश्व स्तनपान सप्ताह की प्रासंगिकता और कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता के रूप में नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज, पटना की सहायक प्राध्यापक डॉ. रूपम कुमारी ने मानव दुग्ध में पाए जाने वाले लाभकारी सूक्ष्मजीवों (ह्यूमन मिल्क माइक्रोबायोम) की संरचना, उनकी भूमिका और शिशुओं की प्रतिरक्षा प्रणाली, आंतों के स्वास्थ्य, शारीरिक वृद्धि तथा समग्र विकास पर उनके सकारात्मक प्रभावों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मातृ दुग्ध केवल पोषण का माध्यम नहीं, बल्कि नवजात शिशु के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच भी है, जो अनेक संक्रमणों से बचाव कर दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। व्याख्यान के बाद आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में छात्राओं और शिक्षकों ने विषय से जुड़ी विभिन्न जिज्ञासाएं रखीं, जिनका डॉ. रूपम कुमारी ने वैज्ञानिक तथ्यों और शोध आधारित जानकारी के साथ विस्तार से उत्तर दिया। कार्यक्रम के अंत में गृह विज्ञान विभाग की यूजी सेमेस्टर-7 की छात्रा नंदिनी कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मुख्य वक्ता, प्राचार्या, अतिथियों, शिक्षकगण एवं छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर महाविद्यालय की ऑफिस-इन-चार्ज डॉ. बिमला चौधरी, बर्सर डॉ. रचना जायसवाल, प्रॉक्टर डॉ. विधुबाला, शिक्षकगण तथा बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं। सभी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय सहभागिता निभाई।
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पटना के कॉलेज में विश्व स्तनपान सप्ताह कार्यक्रम:डॉ. रूपम बोलीं- "मां का दूध केवल पोषण नहीं, शिशु के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच है"
