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इन दिनों मैं विदेश यात्रा पर हूं। पहले लंदन गया, फिर अमेरिका पहुंचा और अमेरिका के कुछ शहर देखने के बाद इस समय मैं न्यूयॉर्क शहर में हूं। जब से प्लेन में बैठा हूं, तब से मुझे अमेरिका में बनी फिल्मों की शूटिंग के दौरान के किस्से याद आ रहे हैं।
अमेरिका में मैंने दो फिल्मों की शूटिंग की है – ‘आ अब लौट चलें’ और ‘बीवी नंबर वन’। ‘बीवी नंबर वन’ मियामी में शूट की थी और ‘आ अब लौट चलें’ ज्यादातर न्यूयॉर्क में शूट हुई थी। एक-एक महीने के दो शेड्यूल में हम दो बार अमेरिका पहुंचे थे। एयरपोर्ट से होटल जाने में मुझे वो सारे फ्लैशबैक आ रहे हैं। अक्षय खन्ना, ऐश्वर्या, कादर खान, सतीश कौशिक, जसपाल भट्टी, हिमानी शिवपुरी, विवेक वासवानी, रणधीर कपूर, राजीव कपूर, कृष्णा (कपूर) आंटी , पूरी यूनिट की शक्लें आंखों के सामने घूम रही हैं। खासकर चिंटू जी (ऋषि कपूर) बहुत याद आ रहे हैं। एक-एक किस्सा, एक-एक पल, एक-एक लोकेशन मेरी आंखों के सामने से ऐसे गुजर रही है, जैसे कल की बात हो।
अपने होटल की खिड़की से मैं टाइम्स स्क्वायर देख रहा हूं तो मुझे याद आ रहा है कि वो मई 1998 की बात थी। हम यहां शूटिंग कर रहे थे और इसी दौरान हमें हिंदुस्तान द्वारा न्यूक्लियर टेस्ट किए जाने की खबर मिली। हमारी खुशी का ठिकाना न था। जहां हमें लगता था कि हम अमेरिका से बहुत पीछे हैं, वहीं अब हम अचानक सीना तानकर घूमने लगे थे। हमें बड़ा गर्व महसूस हुआ। मगर इससे कई अमेरिकी नाराज हो गए। वो रास्ते चलते हमें भला-बुरा कहने लगे। हमें परेशान करने लगे। हिंदुस्तान परमाणु शक्ति कैसे बन सकता है, यह उन्हें पसंद नहीं आया।
इसी टाइम्स स्क्वायर पर हम शूटिंग कर रहे थे और एक आदमी कैमरा उठाकर जाने लगा। उसको पकड़ा तो वो बोला कि तुम हिंदुस्तानी लोग फिल्म बनाओ, बम क्यों बना रहे हो? हर अमेरिकी गुस्से में था। हमारी शक्ल देखकर चिढ़ रहा था। मगर मुझे याद है, एक-दो दिन बाद ही अटल जी की कड़ी लीडरशिप में दो टेस्ट और किए गए। इससे उन्होंने दुनिया को यह संदेश दिया कि देश किसी के दबाव में रुकने या झुकने वाला नहीं है। इसी बात पर अटल जी की ही प्रसिद्ध कविता की पंक्तियां याद आ रही हैं :
हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं गीत नया गाता हूं, गीत नया गाता हूं…
इधर हमको शूटिंग करने में परेशानी उठानी पड़ रही थी। पुलिस ऑफिसर्स जरूर सपोर्ट कर रहे थे, मगर पब्लिक परेशान कर रही थी। इससे हम लोग न्यूयॉर्क से थोड़ी दूर सी साइड हाइट शिफ्ट हो गए कि चलो वहां सुकून से शूट करते हैं। बहुत कम आबादी है, बहुत सुंदर बीच है।
हम एक रिसोर्ट पर रुक गए। मेरी बीवी हनान मेरे साथ थी और गाने की शूटिंग चल रही थी। मैं आराम से सोकर उठा। नीचे कृष्णा आंटी बैठी थीं। तो मैं और हनान उनके पास जाकर बैठ गए, उनसे बातें करने लगे। तभी एक बस आकर रुकी। उसमें से 40-50 लड़के-लड़कियां उतरे। हमें देखते हुए ऊपर चले गए। उनके कमरे ऊपर बुक थे। फिर उन्होंने हमें गालियां देनी शुरू कर दी। थूकना शुरू कर दिया, पेपर, ग्लास वगैरह फेंकने शुरू कर दिए। तो मैं यह सोचकर घबरा गया कि कृष्णा आंटी को कुछ न हो जाए। मैंने कृष्णा आंटी को एक रूम में बैठाया और मैं मैनेजर के पास गया। उसे लड़के-लड़कियों की बदतमीजी के बारे में बताया।
मैनेजर ने 911 डायल किया। पुलिस तो बड़ी कमाल की निकली। मैं रिसेप्शन से चलता हुआ कृष्णा आंटी के रूम तक पहुंचा ही था कि मुश्किल से एक-दो मिनट में पुलिस की दो गाड़ियां फुल स्पीड से सायरन बजाती हुई आकर रुक गईं। उन्होंने मैनेजर से बात की और सीधे ऊपर चले गए। थोड़ी देर बाद लौटे तो मैनेजर ने मुझे बताया कि पुलिस बच्चों को वार्निंग देकर गई है। इनकी दसवीं खत्म हुई है और छुट्टी मनाने आए हैं। लेकिन पुलिस के जाने के थोड़ी देर बाद लड़कों ने फिर गाली देना, थूकना और भद्दी-भद्दी बातें करना शुरू कर दिया। मैनेजर ने दोबारा 911 डायल किया। इस बार भी डेढ़ मिनट में पुलिस पहुंच गई और सीधे ऊपर चली गई। मैंने देखा कि लड़के चेक इन कर चुके थे। कोई टी-शर्ट उतार चुका था, कोई जूते उतार चुका था। पुलिस ने उन्हें कपड़े पहनने तक का मौका नहीं दिया और जैसे थे, वैसे ही सबको होटल से निकाल दिया। मैं दाद दूंगा न्यूयॉर्क पुलिस की। इससे पता चला कि अमेरिकन पुलिस कितनी प्रोफेशनल है। चाहे उसे हमारा बम बनाना पसंद न आए, मगर ड्यूटी पूरी ईमानदारी से निभाई। आज ‘आ अब लौट चलें’ को याद करते हुए न्यूयॉर्क में शूट हुआ ये गाना सुनिए, अपना ख्याल रखिए और खुश रहिए : ओ यारो माफ करना, कुछ कहने आया हूं…
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रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से:न्यूयॉर्क में लौटीं ‘आ अब लौट चलें’ की यादें
